सूर्य मन्दिर, नालन्दा, बिहार भाग :३०५,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : सूर्य मन्दिर, नालन्दा, बिहार भाग :३०५

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल: श्री दरबारण्येश्वर शनि मन्दिर, तिरुनल्लर, पांडिचेरी, तमिलनाडु! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजा टुडे के अति विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं!

भारत के धार्मिक स्थल : सूर्य मन्दिर, नालन्दा, बिहार भाग :३०५

पूर्व से पश्चिम की ओर हुआ नालन्दा के औंगारी धाम मन्दिर का द्वार! नालन्दा के एकंगर सराय प्रखण्ड मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर द्वापर-कालीन सूर्योपासना का केंद्र औंगारी धाम है। यहाँ का सूर्य मन्दिर एकदम अनूठा है। शायद यह भारत देश का इकलौता ऐसा सूर्य मंदिर है, जिसका द्वार पश्चिम की ओर है। भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र राजा शाम्ब ने कुष्ठ रोग से निजात पाने के लिए यहां पूजा की थी। राजा ने ही यहां के सूर्य मन्दिर तालाब का निर्माण कराया था।

औंगारीधाम ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष श्री भूषण दयाल जी के अनुसार, सूर्यनगरी से कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं। भगवान श्री कृष्ण के पौत्र राजा शाम्ब ने यहाँ पूजा-अर्चना की थी। आज भी यहां के ऐतिहासक तालाब में स्नान करने से कुष्ठ रोग से निज़ात मिलती है। लोगों का मानना है कि इसी रास्ते से एक बारात जा रही थी। कुछ बारातियों ने कहा कि अगर भगवान में शक्ति है तो मंदिर का दरवाजा पूरब से पश्चिम की ओर हो जाए। इतना कहते ही पूरब से दरवाजा पश्चिम की ओर हो गया, जो आजतक है। औंगारी धाम सूर्य मंदिर देश के 12 अर्कों में शामिल है। यहां अर्घ्य देने से श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल की आस्था है। निर्धन को धन तो नि:संतान को संतान की प्राप्ति होती ही। आज भी छठ के मौके पर देश के कोने-कोने से यहां श्रद्धालु अर्घ्य देने पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहाँ से कोई भी ख़ाली हाथ नहीँ लौटता, भगवान सूर्य देव की कृपा से भिक्षुक-धनवान, बेऔलाद-सन्तान, कोढ़ि-काया-निरोगी होकर भगवान सूर्य नारायण का आशीष मानते हैं।

सूर्यार्घ्य के अनन्य लाभ :

सूर्य पूजा, सूर्यार्घ्य और सूर्य नमस्कार से मिलते हैं सेहत और सौभाग्य के कई वरदान।

सूर्य नमस्कार का सम्बन्ध योग एवँ प्राकृतिक चिकित्सा से भी जुड़ा हुआ है। सूर्य की ऊष्मा एवँ प्रकाश से स्वास्थ्य में अभूतपूर्व लाभ होता है और बुद्धि की वृद्धि होती है। सूर्य नमस्कार की विधियाँ मुख्य रूप से हस्तपादासन, प्रसरणासन, द्विपाद प्रसरणासन, भूधरासन, अष्टांग, प्रविधातासन तथा सर्पासन इन आसनों की प्रक्रियाएं अनुलोम- विलोम क्रम से की जाती हैं।

सूर्य के प्रकाश एवँ सूर्य की उपासना से कुष्ठ, नेत्र आदि रोग दूर होते हैं। सब प्रकार का लाभ प्राप्त होता है। अर्थात मनुष्य भगवान जनार्दन विष्णु से मोक्ष की अभिलाषा करनी चाहिए। सूर्य अशुभ होने पर उक्त राशि वाले को अग्निरोग, ज्वय बुद्धि, जलन, क्षय, अतिसार आदि रोगों से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य समस्त ग्रह एवं नक्षत्र मंडल के अधिष्ठाता है तथा काल के नियंता हैं।

आप किसी और को ऐसा नमस्कार करें या न करें, परन्तु प्रत्येक दिन प्रात:काल कम से कम सूर्य नमस्कार अवश्य करें, क्योंकि सूर्य नमस्कार ही साष्टांग नमस्कार है। इस करने से मानव निरोग, वैभवशाली, सामर्थ्यवान, कार्यक्षमतावान होता है और व्यक्तित्व प्रतिभाशाली होता है।

सूर्यार्घ्य अथवा अर्घ्य मन्त्र :-

सूर्य को निम्नलिखित मन्त्र बोल करके अर्घ्य प्रदान करें ;-

ॐ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।

ॐ सूर्याय नम:, ॐ आदित्याय नम:, ॐ नमो भास्कराय नम:।
ॐ अथ अर्घ्य समर्पयामि नमः।।

ध्यान मंत्र :-

ध्येय सदा सविष्तृ मंडल मध्यवर्ती।
नारायण: सर सिंजासन सन्नि: विष्ठ:।।
केयूरवान्मकर कुण्डलवान किरीटी।
हारी हिरण्यमय वपुधृत शंख चक्र।।
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाधुतिम।

तमोहरि सर्वपापध्‍नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम।।
सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं योन तन्द्रयते। चरश्चरैवेति चरेवेति!

(सूर्य का श्रम देखो कि वह कभी विश्राम नहीं करता इसीलिए आगे बढ़ो, आगे बढ़ते रहो। तुझे चलना है, तुझे बढ़ना है, ख़ास करना है, तू बढ़ता चल ज्ञानेश्वर, आगे निकल ज्ञानेश्वर!)

भगवान सूर्यदेव की कृपा पाना चाहते हैं तो छठ पर्व के दिनों में अवश्य पढ़ें सूर्य चालीसा का संपूर्ण पाठ। कटें कोटि अपराध, मिलेगा अभीष्ट फल! सूर्य-ध्यान से ब्रह्माजी, श्रीनारायण एवँ श्री शिवशँकर कृपा स्वतः बरसने लगती है, मानव आध्यत्मिक हो तेजवान हो जाता है तथा परोपकारी हो जाता है! ३०० ईस्वी पूर्व में हुआ था मन्दिर का निर्माण। १२ में से दो सूर्य मन्दिर हैं नालन्दा में! औंगारी धाम का सूर्य मंदिर। बिहारशरीफ। एकंगरसराय प्रखंड से चार किलोमीटर की दूरी पर है औंगारीधाम। यहां देश के १२में से एक सूर्यमन्दिर है। खास बात यह है कि केवल इसी मन्दिर का द्वार पश्चिम की ओर है। यहां का इतिहास भी राजा साम्ब से जुड़ा है। यहां छठ व्रत के मौके पर लाखों की भीड़ जुटती है। आमदिनों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

नालंदा तक सड़क मार्ग या रेलवे द्वारा पहुंचा जा सकता है क्योंकि यह दोनों से जुड़ा हुआ है। अधिकांश पर्यटक इस स्थान पर सड़क मार्ग से आते हैं क्योंकि यह सबसे आसान तरीका है और अन्य शहरों से भी जुड़ा हुआ है और इतना महंगा भी नहीं है।

सड़क मार्ग से नालंदा पहुंचें:

नालंदा बोधगया, राजगीर, बिहार शरीफ और पटना आदि के साथ एक अच्छे सड़क नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। यह शहर की यात्रा करने का सबसे आसान और सस्ता तरीका है।

रेल द्वारा नालंदा पहुंचें:

निकटतम रेलवे स्टेशन राजगीर में लगभग १२ किलोमीटर दूर है। दिल्ली, कोलकाता आदि के लिए यहां नियमित ट्रेनें उपलब्ध हैं। प्रमुख रेलवे स्टेशन लगभग ६५ किलोमीटर दूर गया में है। आपको मुख्य शहर तक ले जाने के लिए यहां से टैक्सी और कैब आसानी से उपलब्ध हैं।

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

बाय एयर, निकटतम कामकाजी,हवाई मार्ग यानी वायुयान मार्ग से निकटतम घरेलू हवाई अड्डा नालंदा से पटना में है और लगभग ८९ किलोमीटर दूर है। पटना से मुंबई, दिल्ली, कोलकाता आदि के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। आपको मनचाहा स्थान लेने के लिए हवाई अड्डे के बाहर कैब आसानी से उपलब्ध हैं।

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

ट्रेन द्वारा यानी रेल गाडी द्वारा आप बिहार के नालन्दा पास के 0४ किलोमीटर है एकंगरसराय से दूरी रेलवे स्टेशन हैं। आप पैदल, ऑटो से या कैब से भी पहुँच सकते हो मन्दिर!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

आप ISBT से बस द्वारा अथवा अपनी कार से NH : आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस-वे से पँहुँच सकते है मन्दिर। इस मन्दिर की निकटवर्ती सड़कें यहाँ की सड़कें बेहतर है! दिल्ली से इस मन्दिर में आप १७ घँटों ४६ मिनट्स में पहुंच सकते हैं। दिल्ली से कुल दूरी १,११२.७ किलोमीटर दूर है। यह मन्दिर के पास बस मार्ग पर स्थित है। राज्य परिवहन निगम की बसें के अधिकांश शहरों से जोड़ती हैं।

सूर्य नारायण देव की जय हो। जयघोष होII

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