सूर्य मन्दिर उलार पटना, बिहार भाग : २४८ ,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : सूर्य मन्दिर उलार पटना, बिहार भाग: २४८

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा राहु मन्दिर, गाँव पैठानी, पौड़ी गढ़वाल! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएं हैं।

भारत के धार्मिक स्थल : सूर्य मन्दिर उलार, पटना, बिहार भाग: २४८

देश के प्रमुख सूर्य मन्दिरों में से एक है उलार का सूर्य मन्दिर, यहीं पर श्री कृष्ण के बेटे को मिली थी कुष्ठ रोग से मुक्ति! पिछ्ली ३१ अक्टूबर से लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हुआ! इस मौके पर हम आपको उलार स्थित सूर्य मन्दिर के बारे में बताने जा रहे हैं! देश के प्रमुख सूर्य मन्दिर में से एक है पटना जिले के दुल्हिन बाज़ार स्थित उलार सूर्य मन्दिर! देश के १३ आर्क स्थलों में कोणार्क और देवार्क के बाद उलार्क ( उलार ) सूर्य देव की सबसे बड़े तीसरे आर्क स्थल के रूप में माना जाता है!

श्री कृष्ण पुत्र शाम्ब कुष्ट-मुक्ति :

पौराणिक कथानुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब ऋषि-मुनियों के श्राप के कारण कुष्ठ रोग से पीड़ित हो गए थे! बाद में देवताओं की सलाह पर उन्होंने उलार के तालाब में स्नान कर सवा महीने तक सूर्य कीआ उपासना की थी! इससे वे कुष्ठ रोग से मुक्त हो गए थे! लोककथा के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के पुत्र शाम्ब सुबह की बेला में स्नान कर रहे थे, तभी गङ्गाचार्य ऋषि की दृष्टि उन पर पड़ गई! यह देख ऋषि आगबबूला हो गए और उन्होंने शाम्ब को कुष्ठ से पीड़ित होने का श्राप दे दिया! इसके बाद देव ऋषि नारद जी ने श्राप से मुक्ति के लिए उन्हें १२ स्थानों पर सूर्य मन्दिर की स्थापना कर सूर्य की उपासना करने को कहा! इसके बाद शाम्ब ने उलार्क, लोलार्क, औंगार्क, देवार्क, कोर्णाक समेत १२ स्थानों पर सूर्य मन्दिर बनवाए! तब जाकर उन्हें श्राप से मुक्ति मिली!

छठ पूजा पर मिलेगी लोक आस्था का महापर्व की पूरी जानकारी :

इतिहासकार बताते हैं कि बाद में मुस्लिम शासकों ने अन्य मन्दिरों की तरह उलार सूर्य मन्दिर को भी ध्वस्त कर दिया! फिर १९५०-५४ में संत अलबेला बाबा ने जन सहयोग से मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया! यहाँ पर प्रत्येक रविवार को काफी संख्या में कुष्ठ से पीड़ित लोग स्नान कर सूर्य को जल व दूध अर्पित करते हैं! चैती हो या कार्तिक, दोनों छठ पर यहाँ लाखों की भीड़ जुटती है! कहा जाता है कि यहाँ पर सच्चे मन से जो नि:संतान सूर्य की उपासना करता है, उन्हें सन्तान की प्राप्ति होती है! यह अक्षरषः सत्य है!

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य :

जानिए सूर्य उपासना का महत्व और इससे जुड़े नियम और पूजन विधि! रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। सूर्यदेव की आराधना का अक्षय फल मिलता है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा गया है।

कुंडली में सूर्य प्रबल होने पर मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और सरकारी नौकरी के अवसर प्राप्त होते हैं। ज्योतिष में सूर्य को आत्म का कारक ग्रह माना गया है। ज्योतिष में सूर्य को आत्म का कारक ग्रह माना गया है। वैदिक ज्योतिष में सूर्यदेव का विशेष महत्व होता है। आदिकाल से ही भगवान सूर्य की उपासना होती चली आ रही है। सूर्य समस्त लोकों में ऊर्जा के केन्द्र माने गए हैं। सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है क्योंकि उनके दर्शन हमें प्राप्त होते हैं। मान्यता है की सूर्य की उपासना करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा गया है। जातक की कुंडली में सूर्यदेव का विशेष महत्व होता क्योंकि यह मनुष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। प्रत्यक्ष देवता सूर्य की उपासना शीघ्र ही फल देने वाली मानी गई है। जिनकी साधना स्वयं प्रभु श्री राम ने भी की थी। विदित हो कि प्रभु श्रीराम के पूर्वज भी सूर्यवंशी थे। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब भी सूर्य की उपासना करके ही कुष्ठ रोग दूर कर पाए थे। ज्योतिष में सूर्य को आत्म का कारक ग्रह माना गया है। आइए जानते हैं सूर्य उपासना का महत्व और नियम।

सूर्यदेव की कृपा के लाभ :

– अगर किसी जातक के ऊपर सूर्य की कृपा होती है तो उसके सभी बिगड़े हुए काम जल्दी पूरे होने लगते हैं। रास्ते में पड़ने वाली बाधाएं हटने लगती हैं।
– सूर्यदेव की कृपा होने पर कुंडली में नकारात्मक प्रभाव देने वाले ग्रहों का प्रभाव कम हो जाता है।
– धन प्राप्ति के योग बनते हैं और घर में हमेशा सुख-शांति का वातावरण बना रहता है।
– जातक की कुंडली में सूर्य प्रबल होने पर मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और सरकारी नौकरी के अवसर प्राप्त होते हैं।

सूर्य देव का महत्व :

शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्यदेव की आराधना का अक्षय फल मिलता है। सच्चे मन से की गई साधना से प्रसन्न होकर भगवान भास्कर अपने भक्तों को सुख-समृद्धि एवं अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। ज्योतिष के अनुसार सूर्य को नवग्रहों में प्रथम ग्रह और पिता के भाव कर्म का स्वामी माना गया है। जीवन से जुड़े तमाम दुखों और रोग आदि को दूर करने के साथ-साथ जिन्हें संतान नहीं होती उन्हें सूर्य साधना से लाभ होता हैं। पिता-पुत्र के संबंधों में विशेष लाभ के लिए सूर्य साधना पुत्र को करनी चाहिए। वैदिक काल से ही भारत में सूर्य की पूजा का प्रचलन रहा है। पहले यह साधना मंत्रों के माध्यम से हुआ करती थी लेकिन बाद में उनकी मूर्ति पूजा भी प्रारंभ हो गई। जिसके बाद तमाम जगह पर उनके भव्य मंदिर बनवाए गए। प्राचीन काल में बने भगवान सूर्य के अनेक मन्दिर आज भी भारत में हैं। सूर्य की साधना-अराधना से जुड़े प्रमुख प्राचीन मंदिरों में कोणार्क, मार्तंड और मोढ़ेरा आदि हैं।

सात घोड़ों के रथ पर सवार हैं सूर्य :

सृष्टि के प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य के रथ में सात घोड़े होते हैं, जिन्हे शक्ति एवं स्फूर्ति का प्रतीक माना जाता है। भगवान सूर्य का रथ यह प्रेरणा देता है कि हमें अच्छे कार्य करते हुए सदैव आगे बढ़ते रहना चाहिए, तभी जीवन में सफलता मिलती है। सूर्य की साधना को समर्पित है रविवार का दिन! रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य की साधना आराधना करने पर शीघ्र ही उनकी कृपा प्राप्त होती है। रविवार के दिन भक्ति भाव से किए गए पूजन से प्रसन्न होकर प्रत्यक्ष देवता सूर्यदेव अपने भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

इस विधि से करें सूर्य की साधना

सनातन परंपरा में प्रत्यक्ष देवता सूर्य की साधना-उपासना शीघ्र ही फल देने वाली मानी गई है। सूर्य देव की पूजा के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। इसके पश्चात् उगते हुए सूर्य का दर्शन करते हुए उन्हें ॐ घृणि सूर्याय नम: कहते हुए जल अर्पित करें। सूर्य को दिए जाने वाले जल में लाल रोली, लाल फूल मिलाकर जल दें। सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात्प लाल आसन में बैठकर पूर्व दिशा में मुख करके सूर्य के मंत्र का कम से कम १०८ बार जाप करें। उगते ही नहीं डूबते सूर्य को भी देते हैं अर्घ्य! सूर्यदेव की न सिर्फ उदय होते हुए बल्कि अस्त होते समय भी की जाती है। भगवान भास्कर की डूबते हुए साधना सूर्य षष्ठी के पर्व पर की जाती है। जिसे हम छठ पूजा के रूप में जानते हैं। इस दिन सूर्य देवता को अर्घ्य देने से इस जन्म के साथ-साथ, किसी भी जन्म में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। अस्त हो रहे सूर्य को पूजन करने के पीछे ध्येय यह भी होता है कि ‘हे सूर्य देव, आज शाम हम आपको आमंत्रित करते हैं कि कल प्रातःकाल का पूजन आप स्वीकार करें और हमारी मनोकामनाएं पूरी करें।

सूर्य मंत्र से पूरी होगी मनोकामना :

सूर्य की साधना में मंत्रों का जप करने पर मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती है। सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तमाम तरह की बीमारी और जीवन से जुड़े अपयश दूर हो जाते हैं। सूर्य के आशीर्वाद से आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है। जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता दिलाने वाले सूर्य मंत्र इस प्रकार हैं –

एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।
ॐ घृणि सूर्याय नमः।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पतेए अनुकंपयेमां भक्त्याए गृहाणार्घय दिवाकररू।। ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।।

समृद्धि ही नहीं स्वास्थ्य से भी जुड़े हैं सूर्य देव :

सूर्यदेव की साधना से न सिर्फ सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, बल्कि आरोग्य भी प्राप्त होता है। सूर्य को किए जाने वाले नमस्कार को सर्वांग व्यायाम कहा जाता है। इसे करने से अच्छी सेहत के साथ-साथ मानसिक शांति भी मिलती है।

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

हवाई मार्ग से: ४० किलोमीटर की दूरी पर स्थित हवाई अड्डा पटना का निकटतम हवाई अड्डा! पटना का हवाई अड्डा दैनिक उड़ानों के साथ दिल्ली और दुनियाँ से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है! हवाई अड्डे के साथ मोटर योग्य सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है! हवाई अड्डे से सूर्य मन्दिर लिए टैक्सी उपलब्ध हैं!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

रेल द्वारा आप नई दिल्ली से पटना के लिए लोकप्रिय ट्रेनें लेकर पटना स्टेशन से कैब द्वारा जा सकते हैं सूर्य मन्दिर पटना बिहार पहुँच जाओगे!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

अंतर्देशीय बस स्थानक यानी ISBT से आप तक़रीबन १५ घण्टे ३० मिनट्स में आप राष्ट्रीय राजमार्ग NH: पूर्वांचल एक्सप्रेस वे द्वारा १०५२.५ किलोमीटर की यात्रा तय करके बस अथवा स्वयँ की कार द्वारा सूर्य मन्दिर पहुँच जाओगे!

सूर्य देव की जय हो! जयघोष हो!!

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