सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को कृषि निर्यात हब के रूप में बढ़ावा देने के लिए रणनीति तैयार की

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@ नई दिल्ली

पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में उगाए जाने वाले बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने अब स्थानीय रूप से उत्पादित कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत रणनीति तैयार की है। पूर्वोत्तर क्षेत्र भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चीन तथा भूटान, म्यांमार, नेपाल और बांग्ला देश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएं साझा करता है जो इसे पडोसी देशों एवं साथ में विदेशी गंतव्य स्थानों को कृषि ऊपज के निर्यात के लिए संभावित हब बनाता है।

पिछले तीन वर्षों में, एपीडा ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में निर्यात जागरूकता पर 136 क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन किया।सबसे अधिक 62 क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन पूर्वोत्तर क्षेत्र में वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान किया गया जबकि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 21 और वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 53 ऐसे क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन एपीडा द्वारा किया गया। क्षमता निर्माण पहलों के अतिरिक्त, एपीडा ने पिछले तीन वर्षों के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र में 22 अंतरराष्ट्रीय क्रेता विक्रेता बैठकों तथा व्यापार मेलों के आयोजन को भी सुगम बनाया।

एपीडा ने असम तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के पड़ोसी राज्यों के जैविक कृषि उत्पादों की प्रचुर निर्यात क्षमता का दोहन करने के लिए 24 जून, 2022 को गुवाहाटी में प्राकृतिक, जैविक तथा भौगोलिक संकेतकों ( जीआई ) की निर्यात क्षमता पर सम्मेलन का आयोजन भी किया।

एपीडा का लक्ष्य निर्यातकों के लिए सीधे उत्पादक समूहों तथा प्रोसेसरों से उत्पादों को प्राप्त करने के लिए असम में एक प्लेटफॉर्म का सृजन करना है यह प्लेटफॉर्म असम के उत्पादकों तथा प्रोसेसरों तथा देश के अन्य हिस्सों से निर्यातकों को लिंक करेगा जो असम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में निर्यात पॉकेट के आधार को विस्तारित करेगा और राज्य के लोगों के बीच रोजगार के अवसरों में वृद्धि करेगा। एपीडा ने जोरहट स्थित असम कृषि विश्वविद्यालय के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया है जिससे कि फसल-पूर्व तथा फसल-उपरांत प्रबंधन पर विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अन्य अनुसंधान कार्यकलापों का आयोजन किया जा सके।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के एपीडा प्रवर्तित जीआई उत्पादों जैसेकि भुत जोलोकिया, असम लेमन आदि ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का ध्यान आकृष्ट किया जिन्होंने अपने मन की बात कार्यक्रम के दौरान इसका उल्लेख किया। 

एपीडा ने असम कृषि विभाग के अधिकारियों के क्षमता निर्माण को सुगम बनाने की भी योजना बनाई है और चुने हुए अधिकारियों को बैचों में कर्नाटक, महाराष्ट्र तथा गुजरात भेजा जाएगाएपीडा ने कीवी वाईन, प्रसंस्कृत खाद्य, जोहा चावल पुलाव, काले चावल की खीर आदि का गीला नमूना जैसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के उत्पादों की ब्रांडिंग तथा संवर्धन केलिए भी सहायता प्रदान करता है।

क्षमता निर्माण के एक हिस्से के रूप में, एपीडा ने विनिर्माताओं, निर्यातकों तथा उद्यमियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जिससे कि मूल्य संवर्धन तथा निर्यात के लिए स्थानीय ऊपज का उपयोग किया जा सके।मैसूर स्थित केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान ( सीएफटीआरआई ) और भारतीय खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न राज्यों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

एपीडा ने टिकाऊ खाद्य मूल्य श्रृंखला विकास के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र के कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मेघालय में री भोई तथा असम में डिब्रुगढ़ में पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात के लिए खाद्य गुणवत्ता तथा सुरक्षा प्रबंधन पर एक कार्यशाला के आयोजन में भी सहायता प्रदान की।

एपीडा की युक्तिपूर्ण पहल के साथ, त्रिपुरा के कटहल को पहली बार एक स्थानीय निर्यातक के माध्यम से लंदन तथा नागालैंड के राजा मिर्च को लंदन में निर्यात किया गया। इसके अतिरिक्त, असम के स्थानीय फल लेटेकु ( बर्मा का अंगूर ) को दुबई में निर्यात किया गया तथा असम के पान के पत्तों को नियमित रूप से लंदन में निर्यात किया जाता रहा हैपोर्क तथा पोर्क उत्पादों की निर्यात क्षमता का दोहन करने के लिए, एपीडा ने नजीरा में एक आधुनिक पोर्क प्रसंस्करण सुविधा केंद्र स्थापित करने में असम सरकार की सहायता की जिसमें प्रति दिन 400 पशुओं की स्लौटिरिंग की क्षमता है। यह यूनिट तैयार हो चुकी है और इसका शीघ्र ही कमीशन होना निर्धारित है।

एपीडा ने राज्य पशुपालन विभाग के सहयोग से सिक्किम, जोकि भारत का एक जैविक राज्य है, से जैविक पोर्क के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। एपीडा ने गुवाहाटी के पास रानी में स्थित सूअरों पर एनआरसी  की सहायता से ताजे और प्रसंस्कृत पोर्क के निर्यात के लिए दिशानिर्देश भी विकसित किए हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में, सिक्किम जैविक प्रमाणन एजेंसी रखने वाला पहला राज्य है, जिसे एपीडा की सहायता से 2016 में स्थापित किया गया था।  

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