वनाग्नि को रोकने के लिए चलाया जा रहा है जागरुक रथ

@ कमल उनियाल द्वारीखाल उत्तराखंड

वन मानव जीवन के एक अमूल्य धरोहर है। उत्तराखंड का दो तिहाई भू भाग वन क्षेत्र है वन हमारी अमूल्य धरोहर है। बाँझ बुराँश, काफल, देवदार के पेड से आच्छादित वन यहाँ के सौन्दर्य में चार चांद लगाते है।

वनो के बिना जीवन की कल्पना नही की जा सकती। पर गर्मीयाँ शुरू होते ही आग का तांडव यहाँ देखने को मिलता है हर बार की तरह भूमी संरक्षण वन प्रभाग लैन्सडौन इस बार भी वनाग्नि को रोकने सजग है।

इसी परिप्रेक्ष्य में वनाग्नि को रोकने के लिए भूमी संरक्षण वन प्रभाग लैन्सडौन का जागरूक रथ दुगड्डा, लैन्सडौन, जयहरीखाल, गुमखाल, मटियाली होते द्वारीखाल पहुँचा। जागरुक रथ का मुख्य उद्देश्य आमजन को वनो को आग से बचाने की अपील की गयी वनक्षेत्र अधिकारी विशन दत्त जोशी ने बताया कि जागरुक रथ के माध्यम से आग से होने वाले नुकसान की जानकारी देना तथा इससे पडने वाले दुष्परिणामो में जागरुकता तथा यह संदेश देना है कि हमारे जीवन में वनो का बहुत बड़ा महत्व है और बिना वन का मानव जीवन का अस्तित्व खतरे में पड जायेगा।

वन आरक्षी संजय कंडारी ने सभी आम नागरिक को वनाग्नि रोकने में अपना अमूल्य सहयोग की अपील की और कहा वनो की रक्षा का दायित्व हर नागरिक का है। उन्होने कहा कि कोई असामाजिक व्यक्ति वनो में आग लगाता दिखाई दे तो तुरन्त विभाग को इसकी सूचना दे ताकि उस व्यक्ति पर भारतीय वन अधिनियम के अंतर्गत दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी तथा आग लगाने के प्रकरण में कारावास और अर्थदण्ड से दण्डित किया जायेगा।

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