@ सिद्धार्थ पाण्डेय /चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम ) झारखंड :-
मनोहरपुर प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के सभागार में स्वास्थ्य मिशन भारत फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत चली आ रही फाइलेरिया मुक्त पंचायत निर्माण के उद्देश्य से तीन दिवसीय जागरूकता अभियान सह कार्यशाला कार्यक्रम गुरुवार को सम्पन्न हुआ ।

कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य सहिया और सेविका और समाज सेवी संस्था फिया फाउंडेशन के कर्मियों को 10 अगस्त से 25 अगस्त के बीच फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाने का उचित दिशा निर्देश समेत फाइलेरिया बीमारी की विस्तृत जानकारी प्रदान कराया । कार्यशाला में प्रशिक्षकों के द्वारा बताया गया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है जिसमें हर उम्र के लोग ग्रहित हो सकते हैं सारंडा में मलेरिया जॉन होने की वजह से ज्यादा फाइलेरिया होने का खतरा ज्यादा है ।
ये भी जानकारी दिया गया कि ट्यूलेस मच्छर के काटने से शरीर में खून के माध्यम माइक्रो फाइलेरिया शरीर प्रवेश करते हैं और नर और मादा मिलकर अपना विस्तार कर लेते हैं ।
इसका प्रभाव 10 से 15 साल के बाद दिखाई देने लगता है जब शरीर के लटकने वाले अंग जैसे हाथ पैर स्तन हाइड्रोसील बड़े अथवा फूलने लगते हैं। पैर में इस बीमारी का जायदा प्रभाव दिखता है इसलिए हाथी पावं भी इस बीमारी को कहते हैं ।बीमारी को रोकने का आसान तरीका को भी बताया गया

अधिक से अधिक इस बीमारी का अभियान के तर्ज पर प्रचार प्रसार करने और हर साल दवाई का सेवन करने पर जोर दिया गया ।रोगियों की पहचान कर उन्हें नियमित रूप से दवा कैसे खिलानी है, साथ ही पारिवारिक नामांकन फॉर्म भरने की प्रक्रिया एवं अभियान से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी साझा की गईं। इस अवसर पर सीएचसी मनोहरपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) डॉ. अनिल कुमार ने उपस्थित सहिया सेविका और एनजीओ कर्मियों को फाइलेरिया की रोकथाम व इसके सामाजिक प्रभाव पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एसआई हरविंदर कुमार, एमपीडब्ल्यू (MPW) दुलीचंद महतो, पिरामल स्वास्थ्य संस्था से पीओ संजय कुमार महतो समाज सेवी संस्था फिया फाउंडेशन कर्मी अनीश नाग सरजोम सोय नारायण महतो जितेंद्र चंपिया विजय तिग्गा, जयमाशी हेरेंज मोहन हंसदा सुबोध मनकी समेत सैकड़ों आंगनबाड़ी सेविका उपस्थित रहीं।
