@ नई दिल्ली :-
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के 65वें स्थापना दिवस को संबोधित किया और दीक्षा 2.0 सहित कई पहलों का शुभारंभ किया। उन्होंने ओडिशा की 100 महान हस्तियों के जीवन और योगदान पर आधारित पुस्तक ‘उत्कल जननींकर सुजोग्य संतान’ का भी विमोचन किया।

NCERT के 65वें स्थापना दिवस समारोह में शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव संजय कुमार; भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष चामू कृष्ण शास्त्री; NCERT के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी; यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार; इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. श्रीधर पणिक्कर सोमनाथ; और NCERT के पूर्व निदेशक प्रो. जेएस राजपूत के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय और NCERT के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
धर्मेंद्र प्रधान ने NCERT की नई शैक्षिक पहलों का उद्घाटन करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। प्रधान ने NCERT को भारतीय शिक्षा प्रणाली का एक प्रतिष्ठित संस्थान बताया। उन्होंने कहा कि NCERT देश के शैक्षिक परिदृश्य का स्तंभ रहा है, जिसने अद्वितीय प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ छात्रों के भविष्य को आकार दिया है।

धर्मेंद्र प्रधान ने NCERT को ‘ज्ञान-कुंभ’ बताते हुए अपनी स्थापना के बाद से शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने NCERT से सुधारोन्मुख, तकनीक-संचालित और वैश्विक सर्वोत्तम विधियां अपनाने का आग्रह किया।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वर्ष 2047 तक समृद्ध भारत का निर्माण तभी संभव होगा जब छात्रों को आलोचनात्मक और रचनात्मक सोच और कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने NCERT से अमृत शिक्षा में आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने और ज्ञान को योग्यता में बदलने की दिशा में काम करने हेतु बहुभाषावाद को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
प्रधान ने विश्वास व्यक्त किया कि NCERT शैक्षिक सुधारों, शिक्षण और अधिगम में परिवर्तन के साथ समृद्ध भारत के स्वप्न को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधान ने प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षा पर सरकार के फोकस पर प्रकाश डालते हुए एक उन्नत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म दीक्षा 2.0 के बारे में बात की, जो संरचित पाठ, अनुकूली मूल्यांकन, और रीड अलाउड जैसे एआई-संचालित उपकरणों और 12 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट फ़ाइलों के अनुवाद की सुविधा प्रदान करता है। उन्होंने दीक्षा से लाभान्वित छात्रों से भी बात की। छात्रों की प्रतिक्रियाओं से पता चला कि यह प्लेटफ़ॉर्म विशिष्ट शिक्षा को सुगम बनाकर शिक्षकों और छात्रों दोनों को सशक्त बना रहा है।
