@ नई दिल्ली :-
ग्रुप कैप्टेन (डॉ) रजनीश कुमार (सेवानिवृत) द्वारा लिखित पुस्तक “India’s Aerospace Power: The Central Asian Dynamics” का विमोचन उप वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल एन. तिवारी तथा इंटीग्रेटेड डिफेन्स स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित द्वारा, Centre for Aerospace Power and Strategic Studies (CAPSS) तथा Indian Military Review (IMR) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में, एयर फोर्स ऑडिटोरियम, सुब्रोतो पार्क, नई दिल्ली में किया गया।

यह पुस्तक मध्य एशिया में एयरोस्पेस पावर के विमर्श को गहराई से अन्वेषित करती है। यह भारत-मध्य एशिया संबंधों के ऐतिहासिक, सैन्य और रणनीतिक तत्त्वों का विश्लेषण करते हुए उस आयाम-वायुसैन्य शक्ति- की पड़ताल करती है, जिस पर अब तक सीमित विमर्श हुआ है ।
ग्रंथ में मुगलकालीन बारूद आधारित युद्ध प्रणाली और सैन्य संरचनाओं से लेकर ब्रिटिश काल में आधुनिक रक्षा अवसंरचना और उड्डयन के विकास तक की यात्रा को रेखांकित किया गया है।
स्वतंत्रता के बाद सोवियत सहयोग और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) जैसे स्वदेशी संस्थानों के उद्भव के साथ, भारत ने आयात-निर्भरता से आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की और आज एक संभावित एयरोस्पेस तकनीक निर्यातक राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। मध्य एशिया, जो प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध एवं रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है, भारत के लिए अवसरों और चुनौतियों का संगम प्रस्तुत करता है। इस क्षेत्र में एविएशन मेंटेनेंस, रक्षा सहयोग और अंतरिक्ष आधारित साझेदारी की अपार संभावनाएँ हैं, किंतु इन्हें कनेक्टिविटी गैप्स , ग्रेट पावर रिवालरी और क्षेत्रीय अस्थिरताओं जैसी चुनौतियाँ भी जटिल बनाती हैं।
पुस्तक में यह विवेचना की गई है कि भारत अपने एरोनॉटिकल कौशल, रक्षा उद्योग और सॉफ्ट पावर का उपयोग कर मध्य एशिया के साथ सतत और पारस्परिक रूप से लाभप्रद साझेदारी कैसे स्थापित कर सकता है, जिससे भारत की Strategic depth एक सतत परिवर्तित होते Geo-political landscape में सुदृढ़ हो सके। लेखक ने आयनी और फरखोर (ताजिकिस्तान) स्थित भारत के निष्क्रिय विदेशी वायु ठिकानों के पुनःसक्रियण एवं पुनःसंचालन की आवश्यकता पर बल देते हुए, भारत-मध्य एशिया सहभागिता के उज्ज्वल भविष्य की परिकल्पना की है।

About the Author : ग्रुप कैप्टेन (डॉ) रजनीश कुमार (सेवानिवृत) , संप्रति महानिदेशक, भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार विकास संगठन
ग्रुप कैप्टेन (डॉ) रजनीश कुमार (सेवानिवृत), भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पीएच.डी. उपाधिधारी एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के फेलोशिप अवार्डी हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मेधावी छात्र के रूप में परास्नातक किया तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार में भी स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। साथ ही उन्होंने सामग्री प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्रथम श्रेणी विशिष्ट के साथ अर्जित किया है।
छात्र जीवन (1986-91) से ही वे समसामयिक विषयों पर सक्रिय लेखन करते रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय भू-राजनीति और मध्य एशियाई अध्ययन उनके विशेष शोध क्षेत्र हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कई स्ट्रेटेजिक स्टडीज पर शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं तथा अनेक विश्वविद्यालयों एवं अकादमिक संस्थानों की राष्ट्रीय संगोष्ठियों में अध्यक्षीय भूमिका निभाई है।
डॉ. रजनीश कुमार मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (MP-IDSA), यूनाइटेड सर्विस इंस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया (USI), इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मटेरियल्स मैनेजमेंट (IIMM), इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (IICA) तथा एरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सदस्य हैं।

डॉ. रजनीश ने भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में प्रतिनियुक्ति पर कार्य किया है। वे मान्यता प्राप्त पीएचडी पर्यवेक्षक एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में दो राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों—जिनमें से एक गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन है—से संबद्ध हैं। वे भारत सरकार के कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन पंजीकृत स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) भी हैं।
डॉ. रजनीश पूर्व में Centre for Aerospace Power and Strategic Studies (CAPSS), नई दिल्ली के सीनियर फेलो रह चुके हैं, जहाँ वे भारत के मध्य एशिया में रणनीतिक हितों पर उन्नत शोध एवं विश्लेषण कार्यों में संलग्न रहे।
वर्तमान में वे Indian International Trade Development Organisation (IITDO) के महानिदेशक (Director General) के रूप में कार्यरत हैं।
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