@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-
उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़, हसीन वादियाँ कल कल बहते नदी सांस्कृतिक विविधता और लोकजीवन की आत्मा, पशुपालन, बकरीपालन, कृषि की जीवन शैली यहाँ की पहचान थी। पहाडों की नैसगिर्क सुन्दरता प्रकृति और संस्कृति के बीच का जीवन एकता का प्रतीक था। पर अब इसके पीछे एक डरावना सच छुपा हुआ है वह है आये दिन भालू और गुलदार के हमले से यहाँ के वासिंदो का जीवन बद से बदतर हो गया है।

उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के सभी विकास खंडो में आजकल यहाँ के निवासी गुलदार और भालू के आतंक से सहमे हुये है। पहाड़ के वासी अब दहशत में है आये दिन भालू और गुलदार मानव पर हमले कर रहे हैं जिसमे क ई महिला और पुरष मौत के आगोश में समा गये हैं, अनेक गम्भीर रुप से घायल हुये है अब तो इनके हमले के आँकड़े भी झकझोर कर रहे हैं। डर हर किसी के चेहरे पर झलक रहा है पिछले दो माह में अकेले पौड़ी जनपद के विकास खंडो में हर दिन भालू और गुलदार के हमले हो रहे हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों के जंगलो में घसेरी घास काटते समय खुदेड गीत की आवाज सुनायी देती थी पर अब इन जंगलो में भालू गुलदार के गुर्राने की आवाज सुनायी दे रही है। महिलायें घास, बच्चे स्कूल तथा पशुपालक मवेशी चराने में डर रहे हैं डर और खौफ का दस्तक उनके चेहरो पर नजर आ रहा है भालु और गुलदार की धमक जंगल से गाँव तक पहुंच गयी है।
अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न बना हुआ है पहाड़ वासियों को उनके हाल पर क्यो छोडा जा रहा है सभी शासन प्रशासन और वन विभाग से सवाल पूछ रहे हैं। बहुत बड़ी मानवीय घटनाओं को नजर अंदाज क्यों किया जा रहा है कहीं यह नजर अंदाज जनाआक्रोश का रुप न लेले यह सवाल वन विभाग और शासन को देना होगा।
