@ नई दिल्ली :-
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), सिनेमाटोग्राफ अधिनियम 1952, सिनेमाटोग्राफ प्रमाणन नियम 2024 और संबंधित दिशा-निर्देशों के तहत सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को प्रमाणित करता है।

फिल्मों में काट-छांट या संशोधन की सिफारिश केवल तभी की जाती है, जब फिल्म की सामग्री भारत की संप्रभुता और अखंडता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, नैतिकता, मानहानि, न्यायालय की अवमानना या अपराध के लिए उकसाने से संबंधित वैधानिक मापदंडों का उल्लंघन करती हो।
पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) में, सीबीएफसी ने 71,963 फिल्मों को प्रमाणित किया है।
सिनेमाटोग्राफ अधिनियम में बोर्ड के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान है। ऐसे मामलों का निपटारा न्यायिक कार्यवाही के परिणाम के अनुसार किया जाता है।
सरकार रचनात्मक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए और सिनेमाटोग्राफ अधिनियम के तहत अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रमाणन प्रक्रिया बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा लोकसभा में मनीष तिवारी और टी.आर. बल्लू द्वारा उठाए गए प्रश्न का उत्तर दिया गया।
