आदि-रंग महोत्सव के तहत 400 से अधिक जनजातीय कलाकारों ने मंच पर रची सांस्कृतिक छटा

@ नई दिल्ली :-

17 फ़रवरी 2026 को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित विश्व के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव, 25वें भारत रंग महोत्सव (बीआरएम) ने इस वर्ष अनेक महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ भी शामिल हैं। दिल्ली संस्करण में विभाजन विभीषिका तमस की प्रभावशाली प्रस्तुति और जनजातीय रंगमंच महोत्सव आदि-रंग का शुभारंभ विशेष आकर्षण रहे।

आदि-रंग के उद्घाटन समारोह में एनएसडी निदेशक श्री चित्तारंजन त्रिपाठी ने कहा,“यह महोत्सव देशभर में 54 स्थलों पर आयोजित किया जा रहा है। इसे न्यूज़ीलैंड, कनाडा और क़तर जैसे देशों में भी प्रस्तुत किया गया है, जहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भारतीय वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में इस राष्ट्रीय गीत का भावपूर्ण गायन कर गीता में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद की आत्मा को दर्शाया।”

उन्होंने आगे कहा: “रंगमंच की शायद ही कोई विधा या शैली होगी जिसे इस 25वें संस्करण में स्थान न मिला हो। आदि-रंग के माध्यम से जनजातीय समुदायों का उत्सव मनाते हुए हम समाज के हर तबके के थिएटर को मंच प्रदान कर रहे हैं। आज वाणिज्यिक यौनकर्मियों द्वारा प्रस्तुत एक विशेष नाट्य प्रस्तुति भी आयोजित की गई। थिएटर को विविधतापूर्ण बनाना हमारा संस्थागत सामाजिक दायित्व है।”

आदि-रंग श्रेणी के अंतर्गत “धरती आबा”, जिसे हृषिकेश सुलभ ने लिखा और सुशांत नायक ने निर्देशित किया, कला अकादमी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके अतिरिक्त ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से धप नृत्य, मयूरभंज छाऊ, ककसर, धीमसा, सिद्धी धमाल, कर्मा सैला तथा बी डांस जैसे जनजातीय लोक-नृत्यों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

आदि-रंग के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाने वाले प्रमुख अतिथियों में श्री चंद्रकांत कवलेकर, अध्यक्ष—कला अकादमी, गोवा एवं पूर्व उप-मुख्यमंत्री, गोवा शामिल थे, जिन्होंने अतिथि-विशेष के रूप में उपस्थिति दर्ज कराई। विशेष अतिथि के तौर पर लेखक, संस्कृति-प्रवक्ता, तकनीक विशेषज्ञ एवं गोवा सरकार के सलाहकार श्री चरुदत्त पाणिग्रही ने भी समारोह में भाग लिया। एनएसडी के रजिस्ट्रार श्री प्रदीप कुमार मोहंती भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

महोत्सव की प्रमुख प्रस्तुतियों में “विभाजन विभीषिका तमस”, जो भीष्म साहनी के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है और श्री त्रिपाठी द्वारा निर्देशित है, विभाजन की त्रासदी को तीव्र भावनात्मकता के साथ मंचित करता है। इसका नाट्य रूपांतरण असीफ़ अली हैदर ख़ान एवं श्री त्रिपाठी ने किया, और इसे एनएसडी रेपर्टरी कंपनी ने प्रस्तुत किया।

 

एक अन्य प्रभावशाली नाटक “मालती माधवम्”, जिसे भवभूति ने लिखा और विवेक इम्मनेनी ने निर्देशित किया, एनएसडी वाराणसी केंद्र द्वारा प्रस्तुत किया गया।

“गुरुदक्षिणा”, लेखक मन्जुनाथ भगवत होस्तोटा और निर्देशक गुरु बणंगे संजीव सुवर्णा, एनएसडी के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें कन्नड़ साहित्य की समृद्ध परंपरा झलकी।

महोत्सव की प्रस्तुतियाँ आगे “सखा” के साथ जारी रहीं, जिसे कश्यप कमल ने लिखा और निर्देशित किया तथा दिल्ली के अछिंजल समूह ने मंचित किया। मैथिली भाषा की इस प्रस्तुति में भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक संवेदना दिखाई दी।

जश्न-ए-बचपन खंड के अंतर्गत “रंग राख”, जिसे छत्रपति सिंह ने रूपांतरित किया और रिकेन नगोंग्ले ने निर्देशित किया, एनएसडी टीआईई, संडे क्लब पार्ट-3, ग्रुप-A द्वारा प्रस्तुत किया गया।

बांग्ला नाटक “राम बाबू”, लेखक-निर्देशक मनोज कुमार साहा (अबीर) और प्रस्तुति नयाबाद तितास द्वारा, दिन की प्रस्तुतियों में प्रादेशिक रंग का सशक्त समावेश रहा।

दिन का समापन द्विभाषी प्रस्तुति “समथिंग लाइक ट्रुथ” से हुआ, जिसे शांता गोखले ने लिखा और परना पेत्रे ने निर्देशित किया। पुणे के सोशल मंच एवं पीस प्रोजेक्ट्स द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने हिंदी और अंग्रेज़ी के संयोजन के साथ एक सच्चा और चिंतनपूर्ण कथ्य प्रस्तुत किया।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित 25वाँ भारत रंग महोत्सव 27 जनवरी से 20 फ़रवरी 2026 तक 25 दिनों तक चल रहा है, जिसमें 228 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं एवं संवाद शैलियों में 277 से अधिक प्रस्तुतियाँ शामिल हैं। देश के हर राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश से आए रंगकर्मियों तथा 9 देशों की भागीदारी ने इसे सच्चे अर्थों में वैश्विक रंगमंच उत्सव बनाया है।

भारत की रंग-परंपरा के उत्सव के रूप में बीआरएम 2026 में बच्चों के समूह, जनजातीय कलाकार और समाज के वंचित वर्गों से जुड़े कलाकारों की प्रस्तुतियाँ शामिल हैं, जो थिएटर की समावेशिता और व्यापकता के प्रति एनएसडी की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती हैं।

एनएसडी निरंतर रंगमंच के प्रसार और लोकतांत्रीकरण के लिए प्रयासरत है। हाल ही में संस्थान ने रंग आकाश—एक इंटरनेट रेडियो मंच—का शुभारंभ किया है, साथ ही ‘नाट्यम’ नामक ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से एनएसडी की मूल्यवान प्रस्तुतियाँ देशभर के रंगप्रेमियों तक पहुँचाई जा रही हैं।

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