@ जयपुर राजस्थान :-
मंडला 2026 प्लेसेंटली इन्क्लूसिव’ के पाँचवें दिन मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा पॉश (पीओएसएच) अधिनियम, 2013- कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) पर केंद्रित कार्यशाला का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम जतन संस्थान, उदयपुर तथा आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी), मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त सहभाग से आयोजित हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों में सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी कार्य-पर्यावरण सुनिश्चित करने के कानूनी प्रावधानों, संस्थागत जिम्मेदारियों और व्यावहारिक प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा करना था।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार रहीं। डॉ. मंजू बाघमार ने कहा कि कार्यस्थल हो या बाहर कहीं भी महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मुहैया करना हमारी जिम्मेदारी ।
कार्यशाला में सक्षम पोर्टल की प्रक्रिया पर विशेष सत्र रखा गया, जिसमें चरणबद्ध तरीके से बताया गया कि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट, पॉश अधिनियम के प्रावधानों का पालन आदि के बारे में जानकारी दी गई।
इस संदर्भ में सुझाव दिया गया कि हर कॉलेज में पॉश अधिनियम के बारे में सूचना-पट्ट, वेबसाइट लिंक, पोस्टर, हैंडबुक और जन-जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ, ताकि छात्र-छात्राएँ, शिक्षक और कर्मचारी अपने अधिकारों और प्रक्रियाओं से भली-भांति परिचित रहें।
इसी अवसर पर महिला अध्ययन केंद्र, उदयपुर द्वारा पॉश एक्ट पर तैयार की गई हैंडबुक का विमोचन भी किया गया। यह हैंडबुक हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे आसानी से समझ सकें। इसमें अधिनियम की मूल धाराएँ, ‘यौन उत्पीड़न’ की परिभाषा, शिकायत दर्ज करने के चरण, आईसीसी की कार्यवाही की रूपरेखा, सामान्य प्रश्नोत्तर (एफएक्यू) और उपयोगी संसाधन संक्षिप्त और व्यावहारिक शैली में संकलित हैं।
आयोजकों ने बताया कि ‘मंडला 2026’ के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला विश्वविद्यालय परिसर में लैंगिक न्याय, सुरक्षा और सम्मान की संस्कृति को न केवल संवैधानिक और कानूनी स्तर पर, बल्कि व्यवहार और दृष्टिकोण के स्तर पर भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
