@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-
उत्तराखंड की लोक परम्परा भिंटोली यानि चैत के महीने का कल्यो यानि विवाहता बेटियों को चैत के महीने में दिया जाने वाला कल्यो जिसका सभी विवाहता बेटियों जिसमे युवा से लेकर वृद्ध महिलाओं को बेसब्री से इन्तजार रहता है।

गढ़वाल और कुमाऊँ का पारम्परिक रिवाज चैत के महीने में अपने मायका से आने वाला विभिन्न प्रकार के पकवान का कल्यो का और अपनो से मिलन का त्यौहार का प्राचीन काल से प्रचलन चला आ रहा है।
यह वह पल होता है जोकि दूर बिवाहता बेटियों को सुकून की अनुभूति से प्रफुल्लित करता है।
चैत के महीने के प्रारम्भ होते ही मायका वाले स्वाला, पूरी, पकौड़ी, अरसा बनाकर दूर दूर विवाहता बेटी, बुआ, को चैत के महीने का कल्यो बनाकर देते हैं जब मायके वाले बेटी के घर पहुँचते बेटियाँ प्रसन्न हो जाती है और कहती आज मेरे पिताजी, भाई, चाचा चैत के कल्यो लेकर आये हैं बड़े दिनो के बाद अपनो से मिलन का यह मार्मिक दृश्य आँखो को नम कर देता है।
पर आज लोग इस भौतिकवाद के बनावटी और दिखावटी जीवन में अपने लोक संस्कृति को तेजी से भूल रहे हैं। पर्वतीय क्षैत्रो में इह लोक संस्कृति और लोक परम्परा का विषेश महत्व है। और सभी दूर दूर विवाहता सभी उम्र की महिलाओं को यादो को सहेजकर अपनो से मिलन का इस पर्व चैत का कल्यो का साल भर से इन्तजार रहता है।


