@ नई दिल्ली :-
दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने मंगलवार को निर्माणाधीन गोयला डेयरी स्थित बायोगैस संयंत्र का दौरा किया और प्लांट में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की ।

निरीक्षण के दौरान नजफगढ़ जोन अध्यक्ष सविता शर्मा, दिल्ली नगर निगम अतिरिक्त आयुक्त बी एस जगलान, नजफगढ़ क्षेत्र के उपायुक्त सुमित कुमार, निर्माण एजेंसी के अधिकारी सहित निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
महापौर प्रवेश वाही ने इस दौरान गोयला सीबीजी प्लांट को सुचारू रूप से क्रियान्वयन में लाने के लिए सख्त निर्देश दिए। उन्होनें संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोयला संयंत्र की स्थापना और संचालन में कोई भी अनावश्यक देरी न हो।
उन्होंने कहा कि इस संयंत्र से चलने से क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण से राहत मिलेगी और यमुना नदी में गंदगी जाने पर रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि गोयला डेयरी में बायोगैस प्लांट जुलाई माह तक बनकर में तैयार हो जाएगा।
वाही ने कहा कि यह प्लांट पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन और स्थानीय स्वच्छता सुधार के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विजन के अनुरूप दिल्ली नगर निगम दिल्ली को स्वच्छ व हरित राजधानी बनाने में अपने स्तर पर सभी प्रयास कर रही है।

वाही ने बताया कि दिल्ली नगर निगम के अधीन बायोगैस प्लांट प्रतिदिन कुल 200 टन पशु गोबर के वैज्ञानिक निस्तारण की क्षमता रखते हैं। नंगली सक्रावती बायोगैस प्लांट पिछले साल मुख्यमंत्री के सहयोग से स्थापित किया जा चुका है। उसी क्रम में आगामी जुलाई माह से पहले ही 200 मैट्रिक टन वाले गोयला सीबीजी प्लांट को जनता की सुविधा के लिए बनकर तैयार हो जाएगा।
इस अवसर पर महापौर को गोयला बायोगैस संयंत्र की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। इस दौरान महापौर ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया ।
महापौर ने गोयला संयंत्र के निर्माण संबंधी सभी लंबित कार्यो को अतिशीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। इस संबंध में उन्होंने अधिकारियों को सभी एजेंसी के साथ तालमेल करके कार्य समय से पूरा करने को कहा, जिससे समूचे क्षेत्र की सफाई सुनिश्चित की जा सके ।
उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में साफ सफाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
नंगली और गोयला क्षेत्र में लगभग 1,500 डेयरियां संचालित हो रही हैं। इन डेयरियों से प्रतिदिन भारी मात्रा में पशु गोबर निकलता है, जो अक्सर नालियों के माध्यम से बहकर नजफगढ़ ड्रेन और अंत में यमुना नदी में चला जाता है। गोयला संयंत्र के निर्माण से यह गोबर वैज्ञानिक तरीके से संसाधित होगा और यमुना नदी में गंदगी जाने पर रोक लगेगी।

