@ शिमला हिमाचल :-
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कालीबाड़ी मन्दिर के सभागार में आयोजित अखिल भारतीय कलाकार संघ के 71वें वार्षिक समारोह एवं अखिल भारतीय नाटक एवं नृत्य प्रतियोगिता के समापन समारोह की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर राज्यपाल ने भारतीय कला, संस्कृति एवं राष्ट्रीय एकता के संवर्धन में अखिल भारतीय कलाकार संघ के सात दशकों से अधिक समय से दिए जा रहे उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि यह संस्था देश के कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य कर रही है तथा रंगमंच, नृत्य, संगीत और अन्य प्रदर्शन कलाओं के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राज्यपाल ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता, संवेदनशीलता और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का एक प्रभावशाली माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि कलाकार संस्कृति के परिचायक होते हैं और समाज के निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
कविन्द्र गुप्ता ने युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, रंगमंच को बढ़ावा देने तथा उभरते कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए अखिल भारतीय कलाकार संघ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला के साथ अखिल भारतीय कलाकार संघ के पुराने संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्था राज्य की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बन चुकी है। देश के विभिन्न भागों से कलाकार पीढ़ियों से शिमला आते रहे हैं। वे यहां न केवल अपनी प्रस्तुतियां देते हैं, बल्कि रचनात्मकता, उत्कृष्टता और भाईचारे की इस जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा भी बनते हैं।
समारोह में देश के 18 राज्यों से आए 800 से अधिक कलाकारों ने भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने सतीश वर्मा और दिनेश खन्ना को कला क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बलराज साहनी पुरस्कार से सम्मानित किया। इससे पूर्व, राज्यपाल ने कालीबाड़ी मंदिर में शीश नवाया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय कलाकार संघ के अध्यक्ष रोहिताश गौढ़ तथा उपाध्यक्ष रेखा गौढ़ भी उपस्थित थे।
