बेंगलुरु में उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्त भारत संगोष्‍ठी को संबोधित किया

@ बेंगलुरु कर्नाटक :-

भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नागरिक समाज से नशा मुक्त भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया और कहा कि मादक पदार्थों के सेवन के विरुद्ध लड़ाई व्यक्तियों से शुरू होनी चाहिए और यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बने।

राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयूएचएस) द्वारा स्‍वापक नियंत्रण ब्यूरो और दिशा बोध फाउंडेशन के सहयोग से विश्वविद्यालय के 31वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान बेंगलुरु के कांतीरवा स्टेडियम में आयोजित नशा मुक्त भारत सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मादक पदार्थों का सेवन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि शैक्षिक उपलब्धि, उत्पादकता, सामाजिक सामंजस्य और राष्ट्रीय विकास के लिए भी खतरा है।

आरजीयूएचएस को उसके स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए, उन्होंने स्वास्थ्य शिक्षा, अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य में विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण योगदान और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित स्वास्थ्य पेशेवरों की पीढ़ियों को तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय की प्रशंसा की।

सी.पी. राधाकृष्णन ने बेंगलुरु, कर्नाटक और अंततः पूरे भारत को नशामुक्त बनाने का संकल्प लेने वाले विद्यार्थियों की विशाल सभा को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “नशा मुक्त भारत” का अर्थ केवल मादक पदार्थों का उपयोग नहीं करना नहीं है बल्कि स्वस्थ विकल्पों, सूचित निर्णयों, सहायक परिवारों और सशक्त समुदायों को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तियों का अपने मन पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए और कहा कि जब नशा मन पर हावी हो जाता है तो व्यक्ति अपने जीवन पर से नियंत्रण खो देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशे की लत के कारण खोई हर युवा जिंदगी राष्ट्रीय क्षमता की हानि है। उन्होंने छात्रों, विशेष रूप से भावी डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्टों, मनोवैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों से आग्रह किया कि वे जागरूकता के दूत बनें और मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए रोकथाम, उपचार, अनुसंधान और प्रमाण-आधारित नीति निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं।

 व्यसन चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार विज्ञान और समुदाय-आधारित उपायों में अधिक शोध की मांग करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रमाण ही कार्रवाई का मार्गदर्शन करें और शोध ही नीति का आधार बनें। उन्होंने मादक पदार्थों के सेवन संबंधी विकारों से निपटने में प्रौद्योगिकी, परामर्श सेवाओं और सहकर्मी सहायता नेटवर्क के उपयोग के महत्व के बारे में भी बताया।

नशामुक्त शिक्षण संस्थानों पर अपने निरंतर जोर का उल्‍लेख करते हुए, सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में उन्होंने लगातार नशामुक्त परिसरों की वकालत की है। दिल्ली विश्वविद्यालय में इस वर्ष की शुरुआत में शुरू किए गए नशामुक्त परिसर अभियान और ई-प्रतिज्ञा मंच का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इस पहल ने नशामुक्त परिसर वातावरण बनाने में योगदान दिया है।

 इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के अंतर्गत शिशुओं को पोलियो की दवाई पिलाई। उन्होंने राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपतियों को विश्वविद्यालय के विकास और उन्नति में वर्षों से किए गए उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित भी किया।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सैयद अब्दुल नजीर, कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश आर. पाटिल, कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर फरीद, आरजीयूएचएस के कुलपति डॉ. भगवान और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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