वस्त्र मंत्रालय 7 अगस्त 2026 को 12 वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा

@ नई दिल्ली :-

वस्त्र मंत्रालय 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी), नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय समारोह के साथ 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा। इस समारोह का उद्देश्य भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत का उत्‍सव मनाना और राष्ट्र के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में हथकरघा बुनकर समुदाय के योगदान को मान्यता देना है।

इस अवसर पर भारत की  राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि होंगी। इस समारोह में केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय वस्‍त्र राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा,  नीलम शमी राव, सचिव (वस्‍त्र) और डॉ. एम. बीना, विकास आयुक्त (हथकरघा) भी शामिल होंगी।

इस समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार विजेता और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार विजेता और उनके परिवार के सदस्य, देश भर के हथकरघा बुनकर, पुरस्कार चयन समिति के सदस्य, हथकरघा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण वर्ष 2025 के संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कारों का वितरण होगा। कुल 22 पुरस्कार – 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार- उत्कृष्ट शिल्प कौशल, नवाचार और भारत की हथकरघा परंपराओं के संरक्षण में योगदान देने वाले उत्कृष्ट हथकरघा बुनकरों को प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर भारत की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं का उत्‍सव मनाने वाले चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे।

इस समारोह के दौरान दो प्रकाशनों— “अर्थ. रूट. थ्रेड आल डायड हैंडलूम टैक्‍सटाइल्‍स ऑफ सेंट्रल इंडिया” और हथकरघा पुरस्कार पुस्तक 2025 —का भी विमोचन किया जाएगा।

इस आयोजन के साथ-साथ पुरस्कार विजेता हथकरघा उत्पादों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। आगंतुकों को पारंपरिक कानी विविंग और वॉल हैंगिंग विविंग का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखने का अवसर भी मिलेगा जिससे भारत की हथकरघा परंपराओं की विविधता और शिल्प कौशल की झलक मिलेगी।

7 अगस्त, 2026 को होने वाले मुख्य समारोह के अलावा, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के आसपास आयोजित होने वाले अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में प्रदर्शनियां, सम्मेलन (डिजाइनर, आईआईएचटी) आदि शामिल हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रतिवर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है, जो 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है। इस आंदोलन ने स्वदेशी उद्योगों और भारत के हथकरघा क्षेत्र को नई गति प्रदान की। यह दिवस देश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक विकास में हथकरघा बुनकरों के अटूट योगदान को मान्यता देता है।

2015 में अपनी स्थापना के बाद से, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस भारत के हथकरघा बुनकरों की कलात्मकता, कौशल और समर्पण का उत्‍सव मनाने के साथ-साथ हथकरघा क्षेत्र के संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है।

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