हरेला महोत्सव पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश, कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में जुटे उत्तराखंड के लोग

@ नई दिल्ली :-

राष्ट्रीय हरेला महोत्सव के अवसर पर अमर संदेश समाचार पत्र की ओर से 30 अगस्त  2026 रविवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में पर्यावरण संरक्षण विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यिक, कला और पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण और लोकपर्व हरेला की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में दिल्ली प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद बछेती, दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय शर्मा और संजय दरमोड़ा , कांग्रेस नेता हरपाल रावत ,के सी पाण्डेय ,मैक्स अस्पताल, दिल्ली के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ , वरिष्ठ समाजसेवी हरीश असवाल, अनिल पंत, प्रताप थलवाल, उदय ममगाईं, सुभाष गुसाईं, जगमोहन बिष्ट और दिगपाल कैंतुरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में दिल्ली प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्षा लता गुप्ता ने भी शिरकत की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों और उत्तराखंड की लोक संस्कृति से जुड़े लोगों की भी बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य अतिथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और संस्कृति से जुड़े लोगों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक और प्रभावशाली स्वरूप प्रदान किया। वक्ताओं ने हरेला पर्व के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने तथा समाज में पर्यावरण के प्रति

विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने उत्तराखंड के प्रमुख लोकपर्व हरेला की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्तराखंड की गहरी आस्था और पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक भावना का प्रतीक है। बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के बीच हरेला का संदेश आज और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाना आवश्यक है। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी भी समाज के प्रत्येक व्यक्ति को निभानी होगी। उन्होंने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने राजधानी दिल्ली में हरेला महोत्सव के उपलक्ष्य में पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित करने के लिए अमर संदेश के संपादक अमर चंद का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में कोमल राणा नेगी के नेतृत्व में घुगुती फाउंडेशन की ओर से आकर्षक सांस्कृतिक एवं नृत्य प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत की सुंदर झलक देखने को मिली। लोकनृत्य ने कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया तथा पूरे वातावरण को उत्तराखंड की सांस्कृतिक रंगत से भर दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सरोकारों और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पत्रकारों एवं समाजसेवियों को ‘पर्यावरण गौरव सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सम्मानित व्यक्तियों को अपने हाथों से सम्मान प्रदान कर उनके कार्यों की सराहना की और उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में पत्रकार द्वारका चमोली, दीप सिलोड़ी, राजेश डंडरियाल, डीएस नेगी, हरीश रावत, विनोद मनकोटी, रूप सिंह गुसाईं, ओंकार कोली, ग्रामीण पत्रकार जगमोहन डांगी, मायाराम बहुगुणा और सत्येन्द्र नेगी समेत अनेक पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

इसके अलावा डॉ. कुसुम भट्ट, रजनी जोशी, कुम्मु जोशी भटनागर, भारती नेगी, विजय लक्ष्मी नौटियाल, संगीता बिष्ट और कोमल राणा नेगी सहित अनेक गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

आयोजन के माध्यम से हरेला पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अधिक से अधिक पौधरोपण करने और लगाए गए पौधों के संरक्षण का संदेश दिया गया। साथ ही पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित कर उनके प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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