@ नई दिल्ली :-
बिहार के युवा कलाकारों के लिए नाट्य प्रशिक्षण और रंगमंच से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। अब राज्य के कलाकारों को बेहतर प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और रंगमंच की बारीकियां सीखने के लिए दूर जाने की आवश्यकता कम होगी। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के कैंपस से बिहार के कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने के नए अवसर मिलेंगे।

इस पहल को लेकर ‘बाबा-बबुआ’ की रोचक बातचीत के माध्यम से बताया गया है कि बिहार में NSD कैंपस शुरू होने से युवा कलाकारों को किस प्रकार लाभ मिल सकता है। प्रशिक्षण के दौरान कलाकारों को अभिनय, रंगमंच तकनीक, निर्देशन, मंच प्रस्तुति और थिएटर से जुड़ी अन्य विधाओं में विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलेगा।
बिहार में लोक कला और रंगमंच की समृद्ध परंपरा रही है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की संस्था से जुड़ी प्रशिक्षण सुविधाएं राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी क्षमता को बेहतर तरीके से विकसित करने में मदद कर सकती हैं। इससे स्थानीय कलाकारों को नए मंच मिलने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर भी मिलेगा।
NSD कैंपस की पहल से बिहार में रंगमंच के क्षेत्र में प्रशिक्षण और पेशेवर अवसरों का विस्तार होने की उम्मीद है। युवा कलाकारों के लिए यह कदम न केवल उनके कौशल विकास में सहायक होगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत और रंगमंच परंपरा को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD)
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) भारत का प्रमुख नाट्य प्रशिक्षण संस्थान है, जो रंगमंच और अभिनय के क्षेत्र में प्रतिभाओं को व्यवस्थित एवं पेशेवर प्रशिक्षण प्रदान करता है। इसकी स्थापना वर्ष 1959 में संगीत नाटक अकादमी की एक इकाई के रूप में हुई थी और बाद में यह एक स्वतंत्र संस्थान के रूप में विकसित हुआ।
NSD में अभिनय, निर्देशन, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, रंगमंच तकनीक और थिएटर से जुड़ी विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान ने देशभर के अनेक प्रतिभाशाली कलाकारों, निर्देशकों और रंगकर्मियों को मंच प्रदान किया है।
भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपराओं को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ना NSD की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। यहां विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ विभिन्न नाट्य प्रस्तुतियों में भाग लेने का अवसर भी मिलता है।
NSD का उद्देश्य देश में रंगमंच की गुणवत्ता को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी के कलाकारों को सक्षम बनाना है। इसके प्रयासों से भारतीय रंगमंच को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।
