नॉर्थईस्ट में पर्यटन को मिल रही नई रफ्तार, कनेक्टिविटी और निवेश से बढ़ी मांग

@ नई दिल्ली :-

नॉर्थईस्ट इंडिया तेजी से देश की उभरती पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, सरकारी योजनाओं, निजी निवेश और नए पर्यटन अनुभवों की बढ़ती मांग ने इस क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से नई पहचान दी है। पर्यटन मंत्रालय के नॉर्थ ईस्ट रीजन के रीजनल डायरेक्टर डॉ. आर. के. सुमन के अनुसार, हाल के वर्षों में पूरे नॉर्थईस्ट में घरेलू पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और 2024 में क्षेत्र में घरेलू पर्यटकों की संख्या 1.28 करोड़ से अधिक रही।

मिजोरम इस बदलाव की सबसे उल्लेखनीय सफलता की कहानी के रूप में सामने आया है। राज्य में हाल के वर्षों में 12.68 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे हैं। पर्यटन वृद्धि को रेलवे कनेक्टिविटी में सुधार, स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत करीब 395 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा निवेश तथा ईको-टूरिज्म और स्पोर्ट्स टूरिज्म पर बढ़ते जोर से मजबूती मिली है।

नॉर्थईस्ट में एयर, रेल और सड़क नेटवर्क के विस्तार ने घरेलू यात्रियों की पहुंच आसान की है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की हिस्सेदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र की जैव विविधता, संस्कृति और एडवेंचर पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए निरंतर मार्केटिंग और बेहतर ट्रैवल अनुभव जरूरी होंगे।

इस बीच हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निजी निवेश भी बढ़ रहा है। 2030 तक नॉर्थईस्ट में ब्रांडेड होटल आपूर्ति लगभग दोगुनी होने का अनुमान है, जबकि 3,000 से अधिक नए कमरे पाइपलाइन में हैं। इससे क्षेत्र में पर्यटन क्षमता, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

नॉर्थईस्ट इंडिया में बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन स्थलों पर बढ़ती आवाजाही और लाइव एंटरटेनमेंट की मांग के चलते हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। बड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हॉस्पिटैलिटी समूह अब इस क्षेत्र में पूंजी निवेश का नेतृत्व कर रहे हैं। विशेषज्ञ सुमन के मुताबिक, यह बदलाव संकेत देता है कि नॉर्थईस्ट अब सिर्फ एक अनछुआ पर्यटन क्षेत्र नहीं, बल्कि देश की प्रमुख ग्रोथ डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है।

असम और मेघालय इस बदलाव की सबसे प्रमुख कहानियां हैं। असम में ब्रह्मपुत्र नदी क्रूज सेक्टर तेजी से विकसित हुआ है। अक्टूबर से अप्रैल के बीच गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ के बीच कई दिनों के लग्जरी एक्सपीडिशन के साथ गुवाहाटी से सनसेट और डिनर क्रूज भी संचालित हो रहे हैं। वहीं मेघालय अपने प्राकृतिक नजारों, जीवित जड़ वाले पुलों, आदिवासी संस्कृति और कम्युनिटी-लेड इको-टूरिज्म के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सिक्किम के अलावा त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।

डॉ. राजेंद्र कुमार सुमन के अनुसार, राज्यों के बीच मौजूदा विजिबिलिटी गैप संभावनाओं में अंतर नहीं, बल्कि विकास की टाइमिंग को दर्शाता है। मिजोरम जैसे क्षेत्र इसका उदाहरण हैं, जो कभी अपेक्षाकृत कम चर्चित थे और अब पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

अगले तीन साल में नई संभावनाएं

यूनियन बजट 2026-27 में नॉर्थईस्ट के लिए प्रस्तावित बुद्धिस्ट सर्किट को सुमन पर्यटन विकास की दिशा में अहम कदम मानते हैं। इससे घरेलू और विदेशी पर्यटकों के बीच क्षेत्र की बुद्धिस्ट विरासत को लोकप्रिय बनाने में मदद मिल सकती है।

रानी गाइदिन्ल्यू फ्रीडम फाइटर म्यूजियम और चराइदेव के मोइदम को UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किए जाने को भी उन्होंने क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक पहचान का संकेत बताया।

आंकड़ों के मुताबिक, देश में घरेलू पर्यटकों की संख्या 2013 में 66.78 लाख से बढ़कर 2024 में 127.8 लाख हो गई, यानी करीब 91 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि में विदेशी पर्यटकों की संख्या 0.84 लाख से बढ़कर 2.44 लाख पहुंची, जो करीब 190 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

डॉ. आर. के. सुमन का कहना है कि इंटीग्रेटेड टूरिज्म ग्रोथ नोड्स प्लान और नॉर्थ ईस्ट विजन प्लान 2047 के तहत पर्यटन के लिए जरूरी आधार तैयार हो चुका है। अब टूर ऑपरेटर्स की जिम्मेदारी है कि वे आकर्षक पैकेज तैयार कर लगातार मांग पैदा करें।

उन्होंने बताया कि 2030 तक क्षेत्र में ब्रांडेड होटल इन्वेंट्री लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उनके मुताबिक, मेघालय के झरनों, काजीरंगा के वन्यजीवन, मठों और स्थानीय त्योहारों के कारण नॉर्थईस्ट शांति, एडवेंचर और इकोटूरिज्म चाहने वाले यात्रियों के लिए तेजी से पसंदीदा विकल्प बन रहा है।

नॉर्थ ईस्ट रीजन के रीजनल डायरेक्टर का मानना है कि नॉर्थईस्ट का उभरता पर्यटन बाजार केवल टूरिज्म की कहानी नहीं, बल्कि समावेशी विकास, सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक सशक्तिकरण की व्यापक कहानी है।

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