मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के ‘नारी को न्याय’ दृष्टिकोण का जिला-तहसील के बाद गाँव तक विस्तार

@ गांधीनगर गुजरात :-

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ‘नारी को न्याय’ दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने का लगातार प्रयास कर रही है और इसी कड़ी में जिला और तहसील स्तर के बाद अब ग्रामीण स्तर पर भी नारी अदालत शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

भारत सरकार की मिशन शक्ति योजना के दिशा-निर्देशों के तहत गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए न्याय और सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर प्रायोगिक तौर पर ऐसी नारी अदालतें शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य सरकार ने प्रथम चरण में 10 आदिजाति जिलों की कुल 10 ग्राम पंचायतों का चयन किया है। खास बात यह है कि चयनित सभी ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों के नेतृत्व में नारी अदालत की पहल आगे बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं से जुड़े समस्याओं को ग्रामीण स्तर पर ही सुनने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की व्यवस्था खड़ी करने के इस प्रयास को मिशन शक्ति से जोड़ा गया है।

उल्लेखनीय है कि; इससे पहले ग्राम पंचायत स्तर पर कुल 10 नारी अदालतें शुरू करने के नए प्रस्ताव को प्रायोगिक तौर पर मंजूरी दी गई थी। इसके बाद गुजरात राज्य महिला आयोग द्वारा 10 ग्राम पंचायतों के चयन का प्रस्ताव किया गया था।

उल्लेखनीय है कि; राज्य में वर्ष 2012-13 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिला और तहसील स्तर पर नारी अदालतों की शुरुआत करवाई थी और वर्तमान में राज्य में जिला-तहसील स्तर पर लगभग 270 नारी अदालतें कार्यरत हैं।

इन अदालतों में अब तक आए 45,000 मामलों में से 44,800 अर्थात 99 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा या समझौता किया गया। इस प्रकार; जिला-तहसील स्तर पर मिली भारी सफलता के बाद अब राज्य सरकार इस अवधारणा को ग्रामीण स्तर तक ले जा रही है।

ग्राम पंचायतों के चयन में आदिजाति जिलों को प्राथमिकता

राज्य सरकार द्वारा नारी अदालत के लिए चयनित ग्राम पंचायतों में आदिजाति जिलों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि आदिजाति समुदाय की महिलाओं को ग्रामीण स्तर पर शीघ्र न्याय मिल सके।

चयनित ग्राम पंचायतों में नर्मदा जिले की गरुडेश्वर और चीकदा पंचायतें, दाहोद की सिंगवड, लीमड़ी और कालिया पंचायतें, महीसागर की कोठंबा पंचायत, छोटा उदेपुर की कदवाल पंचायत, वाव-थराद की राधानेसड़ा पंचायत, अरवल्ली की शामळपुर पंचायत तथा बनासकांठा जिले की जलोदा पंचायत शामिल हैं।

इस चयन के साथ राज्य के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में नारी अदालत के प्रायोगिक क्रियान्वयन की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

दसों पंचायतों में महिला सरपंच

इस पहल की विशेष बात यह है कि चयनित सभी 10 ग्राम पंचायतों में सरपंच के रूप में महिलाएँ ही हैं। इस प्रकार; सरकार ने सामाजिक न्याय की पूरी रणनीति के साथ आदिजाति जिलों और उनमें भी महिला सरपंच के नेतृत्व वाली पंचायतों का चयन नारी अदालत के लिए किया है।

इनमें गरुडेश्वर में सरोजबेन बाबूभाई वसावा, चीकदा में लताबेन महेंद्रभाई वसावा, सिंगवड में लिखीबेन बालुभाई वोणिया, लीमडी में शीलाबेन विजयकुमार मोरी, काळिया में पुष्पाबेन भाविनभाई मछार, कोठंबा में नीताबेन विशालकुमार पटेल, कदवाल में उजलीबेन हमसिंगभाई राठवा, राधानेसडा में लक्ष्मीबेन देवजीभाई कोळी, शामळपुर में संगीताबेन महेंद्रभाई पटेल और जलोत्रा में गलबीबेन महेशभाई चौधरी सरपंच हैं।

अर्थात महिलाओं के समस्याओं के लिए नारी अदालत और स्थानीय स्वशासन की संस्था पंचायत का महिला नेतृत्व; दोनों एक ही मंच पर आएँगे।

गाँव की महिलाओं की समस्या गाँव में ही सुनने का प्रयास

नारी अदालत की इस प्रायोगिक पहल का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं के लिए अपने समस्या प्रस्तुत करने और उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्थानीय मंच खड़ा करने का प्रयास है। यह पहल प्रायोगिक तौर पर शुरू हो रही है, इसलिए चयनित पंचायतों में प्राप्त होने वाले अनुभव आगे की कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

महिला आयोग के प्रस्ताव के बाद सरकार का निर्णय

नारी अदालत शुरू करने की पहल को आगे बढ़ाने में गुजरात राज्य महिला आयोग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। आयोग ने ही 10 ग्राम पंचायतों के चयन का प्रस्ताव किया था। सरकार द्वारा विचार किए जाने के बाद अब इन 10 ग्राम पंचायतों का आधिकारिक रूप से चयन किया गया है।

पंचायत स्तर पर महिला सशक्तीकरण का नया मंच

गुजरात में ग्राम पंचायत स्तर पर नारी अदालत की प्रायोगिक शुरुआत को महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक नई व्यवस्था के प्रयोग के रूप में देखा जा सकता है। गाँव की महिला को अपने समस्या प्रस्तुत करने के लिए स्थानीय स्तर पर ही एक मंच मिले और महिलाओं के समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनने की प्रक्रिया मजबूत बने; इस विचार को अब 10 चयनित ग्राम पंचायतों में लागू करने का चरण शुरू होगा।

अब इन 10 ग्राम पंचायतों में नारी अदालत का प्रायोगिक क्रियान्वयन किस प्रकार आगे बढ़ता है और ग्रामीण महिलाओं को इसका कितना लाभ मिलता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

लेकिन एक बात स्पष्ट है कि गाँव की महिलाओं के समस्याओं को गाँव के स्तर पर ही सुनने का प्रयास अब सरकारी पहल के रूप में आगे बढ़ गया है।

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