एशियाई शेरों के ‘द्वितीय घर’ को सुदृढ़ प्रशासनिक आधार दे रहे : भूपेंद्र पटेल

@ गांधीनगर गुजरात :-

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने एशियाई शेरों के बरडा में बने ‘द्वितीय घर’ को सुदृढ़ प्रशासनिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बरडा में एशियाई शेरों के पुनर्वास को ‘पक्का’ करने के लिए राज्य सरकार ने तेजी से कवायद करते हुए पोरबंदर वन विभाग के प्रशासनिक ढाँचे को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय किया है। इसके साथ ही, पोरबंदर जिले की वन एवं पर्यावरण से संबंधित समस्याओं का आसानी से निवारण हो, वन विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में सुगमता रहे तथा पोरबंदर क्षेत्र के वन प्रबंधन में सुधार हो; इस उद्देश्य से भी पोरबंदर वन विभाग का पुनर्गठन किया गया है।

उल्लेखनीय है कि बरडा में 143 वर्षों के बाद एशियाई सिंहों के प्राकृतिक रूप से वापस लौटने की घटना के बाद बरडा क्षेत्र में शेरों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार इस पुनर्गठन पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही थी।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया और राज्य मंत्री प्रवीणभाई माळी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय से बरडा सहित पोरबंदर जिले के वन क्षेत्रों में वन संरक्षण तथा वन्यजीव प्रबंधन के लिए जिम्मेदारियों का अधिक स्पष्ट विभाजन होगा। रेंज, बीट, अधिकारी स्तर की जिम्मेदारी, स्टाफ, वाहन, हथियार, वॉकी-टॉकी, वायरलेस और अन्य साधन-सामग्री के प्रशासनिक नियंत्रण में भी बदलाव किया गया है।

शेरों के पुनर्वास के लिए वन प्रबंधन को मिलेगा प्रशासनिक आधार

बरडा क्षेत्र में शेरों के पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ रहे कार्य के लिए केवल वन क्षेत्र का संरक्षण ही नहीं, बल्कि आवश्यक प्रशासनिक एवं जमीनी ढाँचा भी महत्वपूर्ण है। पोरबंदर वन विभाग का यह पुनर्गठन इस आवश्यकता को पूर्ण करेगा।

वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा इस संबंध में किए गए आधिकारिक शासनादेश (जीआर) के अनुसार पोरबंदर जिले की वन एवं पर्यावरण संबंधी समस्याओं के सरल निवारण तथा वन विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में सुगमता के साथ पोरबंदर क्षेत्र के वन प्रबंधन में सुधार तथा बरडा क्षेत्र में शेरों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए विभाग का पुनर्गठन करने की आवश्यकता थी। इससे नई संरचना में रेंज, बीट और अधिकारी स्तर की जिम्मेदारियां अधिक स्पष्ट होंगी। परिणामस्वरूप बरडा क्षेत्र सहित समग्र पोरबंदर वन विभाग में जमीनी स्तर पर अधिक सुव्यवस्थित कार्य के लिए प्रशासनिक आधार तैयार होगा।

पोरबंदर रेंज में 6,840.84 हेक्टेयर और 80 गाँव

पुनर्गठन अंतर्गत पोरबंदर रेंज की संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है, जिसमें पोरबंदर रेंज अंतर्गत 6,840.84 हेक्टेयर क्षेत्र और कुल 80 गाँवों को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र को पोरबंदर सिटी, गोसाबारा, मोकर, विसावाडा, काँटेला, माधवपुर और सतिया सहित विभिन्न बीटों में विभाजित किया गया है। इस नई संरचना में अलग-अलग बीट को निश्चित क्षेत्र एवं गाँवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यानी वन विभाग के फील्ड अधिकारियों तथा कर्मचारियों को अपने क्षेत्र के कार्य के लिए अधिक स्पष्ट जिम्मेदारी मिलेगी।

राणावाव रेंज में 13,051.25 हेक्टेयर क्षेत्र

इसी प्रकार राणावाव रेंज अंतर्गत 13,051.25 हेक्टेयर क्षेत्र व 27 गाँवों को शामिल किया गया है। गोडाणा, बिलेश्वर, सावडीवडर और राणावाव आदि क्षेत्रों को विभिन्न बीट अंतर्गत व्यवस्थित किया गया है। इस प्रकार पोरबंदर एवं राणावाव रेंज के क्षेत्र को अलग-अलग बीट में विभाजित करने से स्थानीय स्तर पर वन संरक्षण, पेट्रोलिंग और अन्य विभागीय गतिविधियों का संचालन अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।

भाणवड रेंज में 305.94 हेक्टेयर की वृद्धि

पुनर्गठन का महत्वपूर्ण हिस्सा जामनगर वन विभाग के अधीन रेंज फॉरेस्ट वाइल्डलाइफ (आरएफडब्लू) भाटिया रेंज के 305.94 हेक्टेयर क्षेत्र को पोरबंदर वन विभाग की भाणवड रेंज में शामिल करना है। यह क्षेत्र देवभूमि द्वारका जिले की भाणवड तहसील के चार गाँवों के क्षेत्र में स्थित है। इस क्षेत्र को पोरबंदर वन विभाग के अधीन हस्तांतरित किए जाने के बाद इसकी सभी प्रशासनिक गतिविधियाँ पोरबंदर वन विभाग के प्रशासनिक तंत्र के अधीन की जाएंगी। इन चार गाँवों में कंडारडा जोगणा, साजडियाळा, जुना और जंबूसर शामिल हैं। इस प्रकार जुड़े हुए वन क्षेत्रों के प्रशासन में अधिक समन्वय लाने का प्रयास किया गया है।

कुतियाणा तथा सामाजिक वनीकरण की रेंजें भी पोरबंदर के अधीन

पुनर्गठन केवल पोरबंदर तथा राणावाव की सामाजिक वनीकरण रेंज तक सीमित नहीं है। कुतियाणा रेंज, पोरबंदर सामाजिक वनीकरण रेंज और राणावाव सामाजिक वनीकरण रेंज को भी पोरबंदर वन विभाग के अधीन हस्तांतरित किया गया है। इसके साथ इन रेंजों में वर्तमान में कार्यरत अधिकारियों के पद एवं कार्य में आवश्यक बदलाव किया जाएगा। संबंधित वाहन, हथियार, वॉकी-टॉकी, वायरलेस सहित वस्तुएँ भी पोरबंदर वन विभाग के अधीन हस्तांतरित होंगी। रिकॉर्ड, कम्प्यूटर, फर्नीचर और अन्य साधन-सामग्री से संबंधित प्रशासनिक हस्तांतरण भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

दो सहायक वन संरक्षकों के अधीन नई जिम्मेदारी

पुनर्गठन के बाद पोरबंदर वन विभाग के अधीन दो सहायक वन संरक्षकों की व्यवस्था की गई है। सहायक वन संरक्षक-1 के अधीन पोरबंदर रेंज, पोरबंदर सामाजिक वनीकरण रेंज और राणावाव सामाजिक वनीकरण रेंज रखी गई है, जबकि सहायक वन संरक्षक-2 के अधीन राणावाव रेंज, भाणवड रेंज, कुतियाणा रेंज और मोबाइल स्क्वाड (टीए) रेंज को शामिल किया गया है। इस व्यवस्था से अलग-अलग क्षेत्रों की निगरानी तथा कार्य के लिए अधिकारी स्तर पर जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन होगा।

जूनागढ वन्यजीव सर्किल के साथ एकीकृत ढाँचा

बदलाव के बाद जूनागढ वन्यजीव सर्किल के अधीन पोरबंदर वन विभाग का प्रशासनिक ढाँचा रहेगा। उप वन संरक्षक, पोरबंदर वन विभाग के नियंत्रण में दोनों सहायक वन संरक्षकों को अलग-अलग रेंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह ढाँचा बरडा क्षेत्र सहित पोरबंदर जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों के लिए अधिकारी स्तर की निगरानी को अधिक स्पष्ट बनाता है।

मोबाइल स्क्वाड का कार्य भी पोरबंदर वन विभाग के अधीन

पोरबंदर वन विभाग के अधीनस्थ परिक्षेत्र वन अधिकारी को पोरबंदर वन विभाग की मोबाइल स्क्वाड का कार्य भी करना होगा। इसलिए जमीन पर कार्यवाही में आवश्यक तत्काल कार्रवाई के लिए मोबाइल स्क्वाड की जिम्मेदारी भी नए ढाँचे से जोड़ी जाएगी।

वन संरक्षण से वन्यजीव प्रबंधन तक व्यापक प्रभाव

पोरबंदर वन विभाग के इस पुनर्गठन से पोरबंदर जिले की वन एवं पर्यावरण संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए अधिक केन्द्रित प्रशासनिक ढाँचा तैयार होगा। साथ ही वन विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में सुगमता लाने का उद्देश्य भी पूरा करने का प्रयास है। विशेष रूप से बरडा क्षेत्र में शेरों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए किया गया यह पुनर्गठन वन क्षेत्र के प्रबंधन के लिए आवश्यक प्रशासनिक आधार उपलब्ध कराता है। रेंज-बीट की नई संरचना, क्षेत्रवार जिम्मेदारी, दो सहायक वन संरक्षकों की व्यवस्था और संबंधित स्टाफ-साधन-सामग्री का एकीकरण इस प्रक्रिया के प्रमुख हिस्से हैं।

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