तकनीक और मैदानी कार्रवाई से बालाघाट सर्राफा व्यापारियों से लूट का पुलिस ने किया खुलासा

@ भोपाल मध्यप्रदेश :-

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गंभीर एवं संगठित अपराधों के विरुद्ध तकनीकी दक्षता, सतत मैदानी कार्रवाई और अंतर्राज्यीय समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में बालाघाट जिले में सर्राफा व्यापारियों से हुई लूट की दो वारदातों का पुलिस ने खुलासा करते हुए अंतर्राज्यीय ‘ऐरागोल्ला गैंग’ के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दोनों घटनाओं में लूटे गए करीब 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण जप्त किए गए हैं। इस कार्रवाई में पुलिस की टीमों ने अपराधियों की पहचान छिपाने और डिजिटल निशान से बचने की रणनीति के बावजूद सीसीटीवी फुटेज, टेलीफोन रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्यों, मैदानी सूचना तंत्र और महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडि़शा एवं आंध्रप्रदेश तक लगातार सघन तलाश कर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

65 दिनों तक चला व्यापक अंतर्राज्यीय अभियान

पुलिस अधीक्षक बालाघाट के निर्देशन में गठित विशेष टीमों ने 5 अगस्त से 8 अक्टूबर 2026 तक लगातार कार्रवाई की। इस दौरान 14 पुलिस टीमों ने करीब 22,270 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के 21 जिलों में आरोपियों की तलाश की। अभियान में 76 पुलिसकर्मियों ने कुल 149 दिवस मैदानी कार्य किया। इस दौरान करीब 190 व्यक्तियों से पूछताछ की गई तथा विभिन्न राज्यों की 6 जेलों में निरुद्ध आरोपियों से भी पूछताछ कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई गईं। पुलिस टीमों द्वारा 300 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का विश्लेषण किया गया। साथ ही 6,24,588 टेलीफोन रिकॉर्ड की तकनीकी जांच की गई।

रेकी कर सर्राफा व्यापारियों को बनाया निशाना

पहली घटना 5 अगस्त 2026 को थाना किरनापुर क्षेत्र के रजेगांव में हुई थी। सर्राफा व्यापारी दुकान बंद कर सोने-चांदी के आभूषण एवं अन्य सामान से भरे दो बैग लेकर घर जा रहा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल सवार आरोपियों ने रास्ता रोककर दोनों बैग लूट लिए थे।

दूसरी घटना 28 अगस्त 2026 को थाना लांजी क्षेत्र में हुई थी। सर्राफा व्यापारी दुकान बंद कर आभूषण एवं नकदी लेकर घर जा रहा था। रास्ते में आरोपियों ने उसकी मोटरसाइकिल रोककर मारपीट की और आभूषण एवं नकदी से भरे दोनों थैले लूट लिए थे।

सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से मिली महत्वपूर्ण कड़ियां

पुलिस टीमों ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया। इसके बाद रजेगांव से रायपुर तथा ओडिशा, संबलपुर और महासमुंद तक विभिन्न स्थानों के कैमरों के फुटेज का समय-क्रम के आधार पर मिलान किया गया।

साइबर सेल द्वारा घटनास्थल एवं संभावित मार्गों से संबंधित बड़ी संख्या में मोबाइल नंबरों का तकनीकी परीक्षण किया गया। संदिग्ध नंबरों की गतिविधियों, सोशल मीडिया एवं अन्य उपलब्ध सूचनाओं को आपस में जोड़कर आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस टीमों को आवश्यक इनपुट उपलब्ध कराए गए।

साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीमों ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा में दबिश देकर गिरोह के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों द्वारा बालाघाट की दोनों वारदातों में संलिप्तता स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों से ओडिशा एवं अन्य राज्यों में इसी प्रकार की वारदातों के संबंध में भी पूछताछ की जा रही है।

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य सर्राफा व्यापारियों की गतिविधियों की पहले से रेकी करते थे। आरोपियों द्वारा बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिलों का उपयोग किया जाता था तथा पहचान छिपाने के लिए हेलमेट पहनने, कपड़े बदलने और रास्ते में मोटरसाइकिल बदलने जैसी सावधानियां बरती जाती थीं। वारदात के बाद आरोपी तत्काल सुरक्षित एवं दूरस्थ स्थानों की ओर रवाना हो जाते थे।

गिरोह द्वारा डिजिटल पहचान से बचने के लिए व्यक्तिगत सिम अथवा नियमित मोबाइल हैंडसेट का सीमित उपयोग किया जाता था। इसी कारण पुलिस के सामने आरोपियों की पहचान एवं उनकी आवाजाही का पता लगाने की चुनौती थी।

दोनों प्रकरणों में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण जप्त किए हैं।

बालाघाट की यह कार्रवाई दर्शाती है कि संगठित एवं अंतर्राज्यीय अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस केवल घटनास्थल तक सीमित जांच के बजाय अपराधियों की पूरी गतिविधि, उनके आवागमन, संपर्क और नेटवर्क का तकनीकी एवं मैदानी विश्लेषण कर कार्रवाई कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

LIVE OFFLINE
track image
Loading...