काशी के गगन में भारतीय वायुसेना का शौर्य प्रदर्शन, ‘विंग्स ओवर गंगा’ में राफेल, सुखोई और तेजस ने दिखाया दम

@ काशी उत्तरप्रदेश :-

काशी के ऐतिहासिक घाट पर भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित भव्य एयर शो ‘विंग्स ओवर गंगा’ में देश की हवाई शक्ति, आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और वायु योद्धाओं के असाधारण कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, जगुआर और स्वदेशी एलसीए तेजस जैसे लड़ाकू विमानों ने जहां अपनी गति, फुर्ती और सटीक उड़ान कौशल से दर्शकों को रोमांचित किया, वहीं सारंग हेलीकॉप्टर टीम और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने आसमान में आकर्षक आकृतियां बनाकर समारोह को यादगार बना दिया।

गंगा के दोनों तटों पर मौजूद हजारों दर्शकों की निगाहें आसमान पर टिकी रहीं। विमानों की तेज गर्जना, सटीक फॉर्मेशन, रोमांचक हवाई करतब और सूर्य किरण एरोबैटिक टीम की रंगीन आकृतियों ने वातावरण को उत्साह से भर दिया। यह आयोजन केवल हवाई प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, आधुनिक युद्धक तैयारी, स्वदेशी रक्षा तकनीक और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति वायु योद्धाओं के समर्पण का प्रभावशाली परिचय भी बना।

एयर शो का शुभारंभ भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन से हुआ। हेलीकॉप्टरों ने आपसी तालमेल, नियंत्रित गति और सटीक उड़ान कौशल के जरिए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद वायुसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत और अभिनंदन किया तथा उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया। समारोह में भारतीय वायुसेना के 94 गौरवशाली वर्षों की यात्रा को काशी की आध्यात्मिक विरासत से जोड़ते हुए कर्तव्य, त्याग और राष्ट्र सेवा के मूल्यों को रेखांकित किया गया।

इसके बाद तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों ने ग्रुप कैप्टन अनुज गुप्ता के नेतृत्व में ‘ओंकार’ फॉर्मेशन प्रस्तुत किया। हेलीकॉप्टरों पर राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय वायुसेना के ध्वज लहरा रहे थे। भगवान शिव से जुड़े पवित्र ओंकार के नाम वाली इस संरचना ने देशभक्ति और आध्यात्मिक आस्था का संदेश दिया। इसके बाद ग्रुप कैप्टन दीपांकर दास के नेतृत्व में तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की ‘गंगा’ फॉर्मेशन ने प्रवेश किया। मां गंगा के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए हेलीकॉप्टरों से पुष्प वर्षा की गई। गंगा की लहरों और आसमान से बरसते फूलों का दृश्य समारोह के सबसे भावुक क्षणों में शामिल रहा।

कार्यक्रम के अगले चरण में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। विंग कमांडर एस. भार्गव के नेतृत्व में ‘रुद्र’ कॉल साइन वाले विमान ने अपनी गति और उड़ान क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके बाद स्क्वाड्रन लीडर निखिल बाबू ने ‘शंकर’ कॉल साइन के साथ इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणाली का उपयोग करते हुए वायुसेना की खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही यानी आईएसआर क्षमताओं का परिचय दिया।

‘भागीरथी’ फॉर्मेशन में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) और अमेरिकी अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का समन्वित प्रदर्शन हुआ। ग्रुप कैप्टन अनुभव महेंद्र के नेतृत्व में प्रस्तुत इस संरचना ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में हेलीकॉप्टरों की उपयोगिता और उनकी परिचालन भूमिका को प्रदर्शित किया।

‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना के कामोव-31 तथा वायुसेना और थलसेना के एएलएच मार्क-3 हेलीकॉप्टरों ने संयुक्त प्रदर्शन किया। भारतीय नौसेना के कैप्टन दिव्येंदु शर्मा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन ने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त अभियान क्षमता को रेखांकित किया। इसका संदेश स्पष्ट था—तीन सेवाएं, एक मिशन और एक राष्ट्र। वहीं, ग्रुप कैप्टन हर्ष पांडे के नेतृत्व में ‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन में सुखोई और एएलएच हेलीकॉप्टरों ने अनुशासित उड़ान का प्रदर्शन किया।

वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ को विशेष रूप देने के लिए एक हेलीकॉप्टर के पिछले रैंप से आकाश में ‘94’ का अंक प्रदर्शित किया गया। साथ ही वर्षगांठ का विशेष बैनर भी दिखाया गया। इस प्रस्तुति ने वायुसेना के दशकों लंबे साहस, बलिदान, उपलब्धियों और राष्ट्र सेवा की यात्रा को प्रतीकात्मक रूप में सामने रखा।

एयर शो में लड़ाकू विमानों के साथ परिवहन, निगरानी और सहायक अभियानों में इस्तेमाल होने वाले विमानों की क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया गया। विंग कमांडर अनिमेश लांबा के नेतृत्व में ‘भैरव’ फॉर्मेशन में सी-295 और डोर्नियर-228 विमानों ने उड़ान भरी। इस प्रदर्शन में परिवहन क्षमता, बहुउद्देशीय उपयोगिता और सटीक फॉर्मेशन फ्लाइंग का परिचय मिला। काशी के रक्षक बाबा कालभैरव के नाम पर आधारित इस संरचना ने सुरक्षा और विश्वसनीयता के भाव को सैन्य विमानन से जोड़ा।

‘कैलाश’ फॉर्मेशन में सी-130 और एएन-32 विमानों ने अपनी एयरलिफ्ट क्षमता और समन्वित उड़ान का प्रदर्शन किया। इसके बाद ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन में एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमान और मिग-29 लड़ाकू विमान दिखाई दिए। इस संयोजन ने हवाई अभियानों में दूर तक निगरानी, संभावित खतरों के आकलन और लड़ाकू विमानों को सामरिक जानकारी उपलब्ध कराने की भूमिका को उजागर किया।

‘नटराज’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमान और वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमान शामिल हुए। वहीं, ‘महादेव’ फॉर्मेशन में आईएल-78 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और मिराज-2000 विमानों ने हिस्सा लिया। हवा में ईंधन भरने की क्षमता से लड़ाकू विमानों की परिचालन पहुंच बढ़ती है और वे लंबी अवधि तक मिशन पूरा कर सकते हैं। इन प्रदर्शनों ने आधुनिक वायु अभियानों में विभिन्न विमानों और प्रणालियों के परस्पर सहयोग का महत्व सामने रखा।

काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए कई फॉर्मेशन के नाम स्थानीय आस्था से जुड़े रखे गए थे। विंग कमांडर आयुष कुणाल के नेतृत्व में तीन सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन प्रस्तुत किया। इसके बाद ग्रुप कैप्टन मयंक पवार के नेतृत्व में चार जगुआर लड़ाकू विमानों की ‘पशुपति’ फॉर्मेशन ने डायमंड संरचना में उड़ान भरी। विमानों के बीच निर्धारित दूरी और सटीक तालमेल ने दर्शकों को प्रभावित किया। जमीनी लक्ष्यों पर प्रहार करने में जगुआर की भूमिका को देखते हुए यह प्रदर्शन वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता का परिचायक बना।

तीन राफेल लड़ाकू विमानों की ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन ने आधुनिक युद्धक विमानन शक्ति की झलक प्रस्तुत की। विंग कमांडर कौस्तुभ नलावड़े के नेतृत्व में विमानों ने समन्वित उड़ान और अपनी परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके बाद ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 जैसे विभिन्न लड़ाकू विमान एक साथ नजर आए। अलग-अलग पीढ़ियों और भूमिकाओं वाले विमानों की इस संयुक्त प्रस्तुति ने भारतीय वायुसेना की बहुआयामी युद्धक क्षमता और विविध परिस्थितियों में अभियान चलाने की तैयारी को रेखांकित किया।

एयर शो का प्रमुख आकर्षण स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस का एकल प्रदर्शन रहा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारतीय निजी उद्योग की भागीदारी से विकसित इस विमान ने देश की रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता का प्रभावशाली परिचय दिया। ग्रुप कैप्टन रूप के नेतृत्व में तेजस ने अपनी फुर्ती, नियंत्रण क्षमता और हवाई कौशल का प्रदर्शन किया।

तेजस ने चार-बिंदु रोल, वर्टिकल पिच-बैक, मैक्सिमम रेट टर्न और रेड आई टर्न जैसे करतब दिखाए। इसके बाद ‘वर्टिकल चार्ली’ और ‘फॉर्मूला वन टर्न’ ने दर्शकों का रोमांच बढ़ाया। धीमी गति पर नियंत्रित उड़ान वाले ‘स्लो मार्च’ प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि लड़ाकू विमान की क्षमता केवल तेज रफ्तार तक सीमित नहीं होती, बल्कि अलग-अलग परिस्थितियों में सटीक नियंत्रण बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

प्रदर्शन का समापन ‘स्पाइडरमैन फेयरवेल’ के साथ हुआ, जिसमें तेजस ने उल्टी उड़ान की मुद्रा में दर्शकों का अभिवादन किया। गंगा के दोनों तटों पर तालियों की गूंज सुनाई दी। तेजस का प्रदर्शन स्वदेशी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भारत में विकसित रक्षा प्रणालियों की बढ़ती क्षमता का प्रतीक बना।

तेजस के प्रदर्शन के बाद मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल विमानों ने विभिन्न फॉर्मेशन में फिर से उड़ान भरी। ‘महादेव’, ‘विश्वनाथ’ और ‘नीलकंठ’ संरचनाओं में विमानों ने एरियल स्प्लिट जैसे करतब प्रस्तुत किए। विमानों का निर्धारित समय और दूरी पर अलग-अलग दिशाओं में बंटना पायलटों के अनुशासन, प्रशिक्षण और आपसी तालमेल को दर्शाता रहा।

इसके बाद दर्शकों के सामने काल्पनिक हवाई युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। इसमें दो जगुआर विमानों को जमीनी लक्ष्य पर हमला करने और दो सुखोई विमानों को उन्हें रोकने तथा काल्पनिक शत्रु विमानों को निष्क्रिय करने की भूमिका में दिखाया गया। रडार आधारित पहचान, पीछा करने और लक्ष्य को रोकने की इस प्रस्तुति ने आधुनिक हवाई युद्ध में त्वरित निर्णय, सामरिक स्थिति का आकलन और सेंसर से प्राप्त जानकारी के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न लड़ाकू विमानों से जुड़ी हथियार प्रणालियों का भी उल्लेख किया गया। सुखोई-30 एमकेआई के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, राफेल के साथ स्कैल्प, जगुआर के साथ सेंसर फ्यूज्ड वेपन, मिराज-2000 के साथ क्रिस्टल मेज तथा तेजस और मिग-29 के साथ दृश्य सीमा से परे मार करने वाली मिसाइलों का संदर्भ दिया गया। इन प्रणालियों के माध्यम से लंबी दूरी के सटीक प्रहार, जमीनी लक्ष्यों पर कार्रवाई, हवाई श्रेष्ठता और आधुनिक निगरानी तकनीक जैसे वायु अभियानों के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा गया।

एयर शो में ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख हुआ। इन अभियानों के संदर्भ में वायुसेना की परिचालन तत्परता, सटीक प्रहार क्षमता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने के संकल्प को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में सी-17 ग्लोबमास्टर और सूर्य किरण एरोबैटिक टीम के प्रदर्शन ने समारोह को नई ऊंचाई दी। ‘दशाश्वमेध’ कॉल साइन वाली फॉर्मेशन में विशाल सी-17 ग्लोबमास्टर के साथ सूर्य किरण टीम की उपस्थिति ने काशी की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वायु शक्ति के संगम को दर्शाया।

इसके बाद ग्रुप कैप्टन अजय दशरथ के नेतृत्व में नौ हॉक विमानों वाली सूर्य किरण एरोबैटिक टीम ने आसमान में रोमांचक करतबों की श्रृंखला प्रस्तुत की। टीम ने बेहद सटीक तालमेल के साथ उड़ान भरते हुए अपनी संरचना बदली, अलग-अलग आकृतियां बनाईं और कम अंतर पर समन्वित हवाई करतब दिखाए। तेजस को समर्पित फॉर्मेशन, विजय फॉर्मेशन, फ्लावर और बैरल रोल जैसे प्रदर्शनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

एक विमान के फॉर्मेशन से अलग होने और फिर दोबारा टीम में शामिल होने के दृश्य ने रोमांच को और बढ़ाया। विमानों के एक साथ दिशा बदलने, रोल करने और आकाश में सममित आकृतियां बनाने पर दर्शकों की तालियां लगातार गूंजती रहीं। सूर्य किरण टीम ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि एरोबैटिक्स केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि असाधारण एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और पायलटों के बीच अटूट विश्वास की परीक्षा भी है।

‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो ने भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ को यादगार बनाते हुए सैन्य विमानन की विरासत, आधुनिक युद्धक क्षमता, स्वदेशी तकनीक और संयुक्त सैन्य अभियानों की तैयारी को एक मंच पर प्रस्तुत किया। काशी के ऐतिहासिक घाटों के ऊपर विमानों की गर्जना और गंगा पर पुष्प वर्षा ने इस आयोजन को विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान दी।

राफेल और सुखोई जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों से लेकर स्वदेशी तेजस, परिवहन विमानों, निगरानी प्रणालियों और सूर्य किरण टीम के हवाई करतबों तक, हर प्रस्तुति ने वायुसेना के प्रशिक्षण और पेशेवर दक्षता की झलक दिखाई। यह आयोजन राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित वायु योद्धाओं के साहस, अनुशासन, तकनीकी क्षमता और निरंतर तैयारी का प्रभावशाली संदेश बनकर सामने आया।

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