42 साल की सेवा के बाद एपी सिंह ने सौंपी वायुसेना की कमान, आशुतोष दीक्षित होंगे नए प्रमुख

@ नई दिल्ली :-

भारतीय वायुसेना के इतिहास में 31 अक्टूबर 2026 का दिन नेतृत्व परिवर्तन और गौरवशाली सैन्य परंपराओं के निर्वहन के रूप में दर्ज हो गया। देश की वायु सुरक्षा और सामरिक क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (एपी सिंह) ने 42 वर्षों की विशिष्ट सैन्य सेवा के बाद वायुसेना प्रमुख के पद से विदाई ली।एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (एपी सिंह) को 5,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।

उनके स्थान पर एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कमान संभाली। इस अवसर पर वायुसेना मुख्यालय और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गरिमामय समारोह आयोजित किए गए।

पदभार छोड़ने से पहले एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पहुंचकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने पुष्पचक्र चढ़ाकर शहीदों के अदम्य साहस, समर्पण और राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा को नमन किया। यह अवसर भारतीय सशस्त्र बलों की गौरवशाली परंपरा और उन वीर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक बना, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

इसके बाद एयर चीफ मार्शल एपी सिंह को भारतीय वायुसेना के वायु योद्धाओं की ओर से औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। यह समारोह उनके सम्मान में विदाई सलामी के रूप में आयोजित किया गया। वर्दीधारी वायु योद्धाओं ने सैन्य अनुशासन और परंपरा के अनुरूप उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी। 42 वर्षों के लंबे सेवाकाल के बाद यह पल उनके सैन्य जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।

ऑपरेशन सिंदूर में रही महत्वपूर्ण भूमिका

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता, आधुनिक तकनीक और युद्धक तैयारियों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अभियान ने भारतीय वायुसेना की परिचालन तत्परता, सटीक कार्रवाई और सामरिक क्षमता को प्रदर्शित किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उनके 42 वर्षों के गौरवशाली सेवाकाल की सराहना करते हुए उनके अनुकरणीय नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति योगदान को याद किया था। उन्होंने भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत बनाने तथा ऑपरेशन सिंदूर के सफल संचालन में उनके योगदान की प्रशंसा की।

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के हाथों में वायुसेना की कमान

नवनियुक्त वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित इससे पहले वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर कार्यरत थे। केंद्र सरकार ने 6 अक्टूबर 2026 को उन्हें भारतीय वायुसेना का अगला प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा की थी। उन्होंने 31 अक्टूबर को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद कमान संभाली।

9 दिसंबर 1966 को जन्मे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। लगभग चार दशक के सैन्य करियर में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण परिचालन और रणनीतिक जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तथा एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सेंट्रल एयर कमांड जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी सेवाएं दे चुके हैं।

3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव

एयर मार्शल दीक्षित एक अनुभवी फाइटर पायलट, एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग विमानों के विभिन्न संस्करणों, जगुआर, हॉक और तेजस सहित कई विमानों को उड़ाया है।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वायु सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और वर्ष 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

भारतीय वायुसेना के इस नेतृत्व परिवर्तन के साथ अब एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के सामने आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, लड़ाकू विमानों की उपलब्धता और वायुसेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत बनाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। वहीं, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की 42 वर्षों की गौरवशाली सेवा भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद की जाएगी।

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