
वरिष्ठ पत्रकार प्रभात डबराल की कलम से…
यूरोप में , ख़ासकर इंग्लैंड में हों तो विशाल मेगा स्टोर्स में जाना ही होगा – सेंसबरी, एस्डा, लिड्डल और टेस्को नाम के स्टोर थोड़ी थोड़ी दूर पर मिलते जाएँगे।

खाने पीने की रोज़मर्रा की ज़रूरत के समान के अलावा यहाँ दारू और रेडीमेड खाना भी बाज़ार से सस्ते दामों में मिल जाता है।
इस पोस्ट को लिखने का आशय ये बताना है कि बड़े बड़े अरबपतियों के इन मेगा- स्टोरों के बीच एक को-आपरेटिव मेगास्टोर चेन भी है। इंग्लैंड की पंद्रह कोआपरेटिव सोसायटियों द्वारा मिलजुलकर बनाई गई इस चेन के यूरोप में ढाई हज़ार से ज़्यादा स्टोर हैं। बना बनाया ताज़ा पैक्ड खाना यहाँ बाक़ी स्टोरों से काफ़ी सस्ता मिलता है।
कई टैक्सी ड्राइवरों और कामकाजियों ने बताया कि जहां तक हो सके वो coop स्टोरों से खाना लेते है – सस्ता पड़ता है।
लेकिन पिछले दो तीन सालों से ये स्टोर घाटे में चल रहे है। पिछले साल इन्हें 20 लाख पाउंड का घाटा हुआ। इससे पहले साल का घाटा 3 करोड़ था । इसकी CEO हैं शीरीन हक़।
बाक़ी सारे निजी स्टोर भर भरकर मुनाफ़ा कमा रहे हैं।
सेंसबेरी ने पिछले साल 22 करोड़ पाउंड कमाए तो टेस्को का मुनाफ़ा क़रीब 300 करोड़ पाउंड था।
एक दिलचस्प जानकारी और,
सैंसबेरी के मेजोरिटी शेयर कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी के पास हैं। पिछले दिनों खबर आई थी कि कतर के शाह की इस कंपनी ने JIO सिनेमा में 25 हज़ार करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट किया है।
सहारा ग्रुप ने भी लंदन का अपना शानदार होटल ग्रॉसवेनर हाउस इसी कंपनी को बेचा था। लंदन के रियल एस्टेट में इस कंपनी ने ढेर सारा निवेश किया हुआ है। लोग तो मज़ाक़ में यहाँ तक कहते हैं कि एक चौथाई लंदन तो इसी कंपनी का है।
