प्रधानमंत्री ने बजट के बाद स्वास्थ्य, आयुष और फार्मा क्षेत्रों पर आयोजित वेबिनार की अध्यक्षता की

@ नई दिल्ली :-

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज स्वास्थ्य, आयुष और फार्मा क्षेत्रों पर आयोजित बजट-पश्चात वेबिनार की अध्यक्षता की। इसका विषय था ‘सबका साथ, सबका विकास – लोगों की आकांक्षाओं को साकार करना’। यह वेबिनार सरकार के बजट-पश्चात जनसंपर्क अभियान के तहत आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर चर्चा करना और भागीदारों से सुझाव आमंत्रित करना था। इस वेबिनार में नीति निर्माता, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शोधकर्ता और केंद्र एवं राज्य सरकारों के अधिकारी भारत के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ एक मंच पर आए।

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अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नीतिगत घोषणाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन में बदलने के लिए बजट के बाद के परामर्शों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना केंद्रीय बजट का मुख्य उद्देश्य है।  उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्र इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बजट में घोषित पहल के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए वेबिनार में भाग लेने वाले विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, उद्यमियों और हितधारकों के सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल के व्यापक दृष्टिकोण के साथ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और आयुष्मान भारत जैसी पहलों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ देश के स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का काफी विस्तार हुआ है, जो देश भर के गांवों तक स्वास्थ्य सेवा को पहुंचा रहे हैं। उन्होंने योग और आयुर्वेद सहित भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की बढ़ती वैश्विक मान्यता पर भी प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने आने वाले दशक में भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि और प्रशिक्षित देखभाल करने वालों की वैश्विक मांग में भी वृद्धि को देखते हुए केयर इकोनॉमी को मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने वेबिनार में भाग लेने वाले विशेषज्ञों को देश के स्वास्थ्य सेवा कार्यबल को मजबूत करने और युवाओं के लिए नए कौशल आधारित रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए नवीन प्रशिक्षण मॉडल और साझेदारी का सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के बढ़ते महत्व का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में टेलीमेडिसिन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कई लोग पहले से ही टेलीमेडिसिन से लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन जागरूकता बढ़ाने और पहुंच में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक लोग इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

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आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने बजट के बाद आयोजित वेबिनार के समापन सत्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 एक समग्र, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ के दृष्टिकोण को सुदृढ़ कर रही है और साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है।

जाधव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आयुष मंत्रालय के लिए आवंटित 4,408 करोड़ रुपये की राशि से आयुष पद्धतियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करने में और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन जैसी पहलों के माध्यम से सरकार देश भर में आयुष सेवाओं की पहुंच का विस्तार कर रही है और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को मजबूत कर रही है, जिससे प्राथमिक, माध्यमिक और वंचित क्षेत्रों में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा मिल रहा है।

केंद्रीय बजट में की गई प्रमुख घोषणाओं का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना के प्रस्ताव से उच्च शिक्षा, नैदानिक सेवाओं और पारंपरिक चिकित्सा में अनुसंधान को काफी बढ़ावा मिलेगा। ये संस्थान साक्ष्य-आधारित एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देते हुए वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा क्षमता को मजबूत करेंगे।

जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्ता आश्वासन मंत्रालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं के उन्नयन से प्रमाणन प्रणाली, नियामक निरीक्षण और पेशेवर मानकों को मजबूती मिलेगी, जिससे लोगों के लिए सुरक्षित, उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं सुनिश्चित होंगी और साथ ही भारत की निर्यात क्षमता भी बढ़ेगी। इन उपक्रमों से औषधीय पौधों की खेती में लगे किसानों को भी लाभ होगा और प्रसंस्करण और विनिर्माण में शामिल लघु एवं मध्यम उद्यमों को भी सहायता मिलेगी।

पारंपरिक चिकित्सा में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को मजबूत करने से साक्ष्य-आधारित पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा के लिए वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। यह पहल पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान सहयोग, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और नीतिगत संवाद को बढ़ावा देगी।

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उन्होंने केंद्रीय बजट में राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। ये केंद्र एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों के रूप में कार्य करेंगे, जो उन्नत चिकित्सा सेवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान सुविधाओं को एक साथ लाएंगे। आयुष केंद्रों और मेडिकल वैल्यू ट्रैवल सुविधाओं के साथ इन केंद्रों से भारत को समग्र स्वास्थ्य देखभाल और किफायती चिकित्सा यात्रा के लिए एक प्रमुख वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करने की उम्मीद है।

जाधव ने समर्पित कौशल विकास पहल के माध्यम से देखभाल करने संबंधी (केयर) अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।

राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) का कड़ाई से पालन करते हुए 1.5 लाख बहु-कुशल देखभाल करने वालों को प्रशिक्षित करने की रणनीतिक योजना बनाई गई है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल के विकास के साथ-साथ निवारक, पुनर्वास और वृद्धावस्था देखभाल प्रावधानों का विस्तार करने और द्विपक्षीय उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इसे सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में आयुष क्षेत्र ने संस्थागत विकास, अनुसंधान, वैश्विक मान्यता और सार्वजनिक स्वीकृति के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति देखी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय बजट 2026 इसी मजबूत नींव पर आधारित है और विस्तार से उत्कृष्टता की ओर, पैमाने से गुणवत्ता की ओर और राष्ट्रीय मजबूती से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ने को लेकर एक नई दिशा प्रदान करता है।

मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वेबिनार से हुई चर्चाएं और सुझाव केंद्रीय बजट में घोषित पहल के कार्यान्वयन में तेजी लाने और भारत के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को और मजबूत करने में मदद करेंगे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और हितधारकों को उनके बहुमूल्य सुझावों के लिए धन्यवाद दिया और ‘स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने सत्र के दौरान पिछले एक वर्ष में आयुष क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर जोर दिया। ये सुधार अनुसंधान, शिक्षा, मानकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में किए जा रहे सुदृढ़ प्रयासों का परिणाम हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थानों की प्रस्तावित स्थापना से देशभर में शिक्षा, अनुसंधान और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसमें आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन शामिल है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयुष उत्पाद सुरक्षित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों। उन्होंने यह भी कहा कि डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (जीटीएमसी) को मजबूत करने से साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा में भारत का नेतृत्व और भी मजबूत होगा।

वेबिनार का समापन वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की चर्चा और प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसमें केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित उपक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। सरकार, शिक्षा, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों और स्वास्थ्य सेवा समुदाय के प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने, आयुष सेवाओं का विस्तार करने, गुणवत्ता मानकों को बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने पर बहुमूल्य सुझाव साझा किए। विचार-विमर्श से प्राप्त जानकारियों से बजट घोषणाओं के कार्यान्वयन में तेजी आने और भारत की समग्र, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की परिकल्पना को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

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