लोकतंत्र संवाद, धैर्य और गहन चर्चा से फलता-फूलता है: लोक सभा अध्यक्ष

@ नई दिल्ली :-

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसद में बार-बार होने वाले व्यवधानों में काफी कमी आई हैजिसके परिणामस्वरूप कार्य उत्पादकता और सार्थक चर्चा में वृद्धि हुई है।

मानेसरगुरुग्राम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अध्यक्ष महोदय ने कहा कि लोक सभा में सत्र देर रात तक चलते हैं और लंबे समय तक वाद-विवाद होता हैजो इस बात को दर्शाता  है कि लोकतांत्रिक संस्कृति परिपक्व और जिम्मेदार हो रही है।

उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को और मजबूत करने के लिए नियमित बैठकें करने सुदृढ़ समिति प्रणालियां विकसित करने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ  सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं को अपनाने  का आह्वान किया । 3-4 जुलाई, 2025 को गुरुग्राम में इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT)IMT मानेसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन पूरे भारत के शहरों में भागीदारीपूर्ण शासन संरचनाओं के माध्यम से संवैधानिक लोकतंत्र को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका पर चर्चा करने की ऐतिहासिक पहल है।

अपने संबोधन में बिरला ने शहरी स्थानीय निकायों  में प्रश्न काल और शून्य काल जैसी सुस्थापित लोकतांत्रिक प्रथाओं को शामिल करने के महत्व पर जोर देते हुए प्रतिनिधियों को बताया कि संसद में ऐसे प्रावधानों ने कार्यपालिका को जवाबदेह बनाए रखने और जनता के सरोकारों को व्यवस्थित रूप से मुखरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस बात का उल्लेख करते हुए कि नगरपालिका की कम अवधि कीअनियमित या तदर्थ बैठकें स्थानीय शासन को कमजोर करती हैं,   बिरला ने नियमितसंरचित सत्रोंस्थायी समितियों के गठन और व्यापक जन परामर्श का समर्थन किया । संसद की तरहशहरी स्थानीय निकायों को भी व्यवधानों से बचना चाहिए तथा रचनात्मक और समावेशी चर्चाएं करणी चाहिए।

अध्यक्ष महोदय ने लोक सभा का उदाहरण देते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन और सभा में प्लैकार्ड दिखाने में कमी आने से  कार्य-उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई हैजनता की धारणा बदली है और बेहतर कानून बनाने में मदद मिली है। बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि व्यवधान लोकतंत्र की मजबूती को नहीं दर्शातेबल्कि इसे कमजोर करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवादधैर्य और गहन चर्चा के माध्यम से ही लोकतंत्र फलता-फूलता है । अध्यक्ष महोदय ने नगर निगम के प्रतिनिधियों से अपने-अपने शहरों और कस्बों में अच्छे आचरण का उदाहरण रखते हुए लोगों का नेतृत्व करने का आग्रह किया।

बिरला ने शहरी स्थानीय निकायों को जनता के सबसे नजदीक बताते  हुए कहा कि इन निकायों के प्रतिनिधि लोगों को पेश आने वाली चुनौतियों और जरूरतों के बारे में गहराई से जानते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम जैसे शहरों में शहरी परिवर्तन आर्थिक जीवंतता और लोकतांत्रिक भागीदारी दोनों को दर्शाता है। भारत की सभ्यतागत विरासत का प्रतीक होने से लेकर नवाचार और उद्यम का केंद्र बनने की यात्रा में गुरुग्राम यह दर्शाता है कि सरकारों और सशक्त स्थानीय संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।

बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि 2030 तक 600 मिलियन से अधिक लोगों के शहरी क्षेत्रों में रहने का अनुमान है इसलिए शहरी शासन का पैमाना और दायरा उसी के अनुसार विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों  को सेवाएं पहुंचाने की पारंपरिक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं रहना चाहिएबल्कि स्व-शासन की सच्ची संस्थाओं के रूप में उभरते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान करना चाहिए। उन्होंने इस बात को दोहराया कि सम्मेलन का विषय- “संवैधानिक लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और राष्ट्र निर्माण में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका” समयोचित और दूरदर्शी है।

बिरला ने इस बात का उल्लेख किया कि शहरी स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि बुनियादी ढांचे के विकाससीवेज और सफाई व्यवस्थाअपशिष्ट प्रबंधनसड़क निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण जैसे आवश्यक क्षेत्रों में काम करते हुए लोगों के दैनिक जीवन पर कितना महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। उन्होंने कहा कि ये केवल स्थानीय कार्य नहीं हैंबल्कि प्रमुख दायित्व हैं जो शहरों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्यसुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं। इन कार्यों को पूरा करने में शहरी स्थानीय निकायों  की प्रभावशीलता से न केवल जनता का विश्वास बढ़ता है बल्कि दीर्घकालिकसतत शहरी विकास का आधार भी मजबूत होता  है। उन्होंने कहा कि लोगों तक सीधे और मूर्त रूप से सेवाएं पहुंचाने के कारण स्थानीय निकायों के कार्य लोगों की स्मृति में अंकित रहते हैं ।

बिरला ने प्रतिनिधियों से कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी हैजहाँ ग्राम सभाओं से लेकर शहरी नगर पालिकाओं तक स्थानीय स्वशासन हमेशा से इसके सांस्कृतिक ताने-बाने का अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों  को सशक्त बनाने से राज्य विधान सभाएँलोक सभा और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाएँ अपने आप ही सशक्त हो जाएँगी। जब स्थानीय संस्थाएँ जीवंतप्रतिनिधिक और सक्षम होती हैंतो राष्ट्रीय शासन अधिक उत्तरदायी और प्रतिनिधिक बन जाता है।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से नागरिकों के साथ प्रभावी संवाद करने दीर्घकालिक नीति नियोजन और नगरपालिका के कामकाज में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों को शहरी माँगों का पूर्वानुमान लगानेक्षमता निर्माण में निवेश करने और जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि भारत के शहर समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनें।

बिरला ने इस बात का उल्लेख भी कहा कि यह सम्मेलन साझा समाधान खोजने के साथ ही आमजन की आकांक्षाओं को पूरा करने और भावी  कानूनों और संस्थाओं को आकार देने में सक्षम लोकतांत्रिक नेता तैयार करने का एक मंच भी है।

सम्मेलन के दूसरे दिन अर्थात 4 जुलाई, 2025 को सभी प्रतिनिधि रिपोर्ट और कार्रवाई योग्य सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे। समापन सत्र को हरियाणा के माननीय राज्यपाल  बंडारू दत्तात्रेय संबोधित करेंगे। समापन सत्र में  राज्य सभा के उपसभापति  हरिवंश और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित होंगे।

ओम बिरला ने शहरी स्थानीय निकायों  से उत्कृष्टतानिष्ठा और नवाचार के लिए प्रयास करने का आग्रह करते हुए अपनी बात समाप्त की । उन्होंने कहा कि स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में भारत के शहर सशक्तसमावेशी और भविष्य के लिए तैयार शहरों के नेटवर्क के रूप में विकसित होंगे । ऐसे सामूहिक प्रयासों के माध्यम से भारत 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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