@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-
उत्तराखंड को वीरभूमी के साथ देवभूमी भी कहा जाता है। यहाँ कण कण में देवत्व का वास होता है मठ मंदिरो की यहाँ भरमार है और इसके महत्व की थाह लेना आसान नहीं है।

ऐंसा ही पावन स्थान विकास खंड द्वारीखाल पौड़ी गढ़वाल के निकटवर्ती गाँव ग्वीन छोटा में तूँगनाथ जी का सिद्धपीठ मंदिर है यहाँ हर वर्ष वार्षिक पूजन का आयोजन होता है तथा बारह साल बाद तूँगनाथ जी की महापूजा जात का दिव्य और भव्य आयोजन होता है बारह साल में होनी वाली महा पूजा जात की मान्यता हरिद्वार, उज्जैन, प्रयागराज, नासिक के कुँभ की तरह है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह रावत ने बताया की विगत वर्ष की भाँति तुँगनाथ जी की वार्षिक पूजन 29 सितम्बर को होना निश्चित हुआ है। उन्होने बताया कि 28 सितम्बर साँयकाल को विभिन्न विकास खंडो, देश, प्रदेश तथा अन्य गाँवो के रैवासी तथा प्रवासी तुँगनाथ जी के भक्तो का आदर स्वागत किया जायेगा और 29 सितम्बर को वैदिक विधि से पूजा अर्चना के साथ सत्यरुपी प्रसाद भोग ग्रहण करके भगवान तूँगनाथ के दर्शनार्थ करके पुण्य अर्जित करेंगें।
सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर बीरेन्द्र रावत, सेवानिवृत्त सूबेदार रसपाल उनियाल ने कहा तूँगनाथ जी पर असीम आस्था रखने वाले भक्तो का बाबा के नाम से स्मरण से ही संकट टल जाता है और पावन धाम तूँगनाथ जी के जप तप कीर्तन वन्दना और श्रद्धालुओ के पुण्यतीर्थ के दर्शन से जीवन सार्थक हो जाता है।

