मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल बनासकाँठा में भारी वर्षा से प्रभावित सीमावर्ती गाँवों के दौरे पर

@ गांधीनगर गुजरात :-

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भारी वर्षा से प्रभावित बनासकाँठा जिले के सुईगाम का गुरुवार को दौरा किया। उन्होंने सुईगाम गाँव के प्रभावित क्षेत्रों में मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया।

पटेल गुरुवार दोपहर सुईगाम पहुँचे और उन्होंने सुईगाम सामूहिक स्वास्थ्य केन्द्र के आश्रय स्थान में आसरा ले रहे बाढ़ प्रभावितों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने प्रभावितों को दी जा रही सुविधा तथा बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने प्रभावितों को अहसास कराया कि इस बाढ़ की स्थिति में सरकार उनके साथ है।

मुख्यमंत्री सुईगाम में वर्षा जलभराव वाले क्षेत्रों व जलोत्रा सब स्टेशन भी गए और वर्षा से उत्पन्न स्थिति से अवगत हुए।

उन्होंने प्रभावित बनासकाँठा जिले के वाव में गुरुवार रात्रि निवास कर ग्रामीणों के साथ संवाद किया और स्थिति की जानकारी प्राप्त की।

इससे पहले पटेल सुईगाम प्रांत अधिकारी कार्यालय में विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी, जिला प्रभारी मंत्री बळवंतसिंह राजपूत, विधायक स्वरूपजी ठाकोर, अनिकेत ठाकर, प्रवीण माली, पूर्व विधायक शशिकांत पंड्या, पदाधिकारियों और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एम. के. दास एवं अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत–बचाव के कामकाज की समीक्षा की और जरूरी मार्गदर्शक सुझाव दिए।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा किए गए कामकाज की प्रशंसा की और स्थिति पूर्ववत होने तक ऐसी ही संवेदना एवं तत्परता से कार्यरत रहने की प्रेरणा दी।

उन्होंने वर्षा प्रभावितों को कैशडोल्स का भुगतान गुरुवार शाम से ही शुरू कर देने तथा घरेलू सामान सहायता देने में एसओपी बनाकर तद्अनुसार सहायता देने के दिशानिर्देश दिए। उन्होंने पशुओं की मृत्यु के मामले में सहायता का भुगतान वेटरनरी ऑफिसर द्वारा सत्यापन करके किए जाने के निर्देश दिए।

उन्होंने प्रशासन से सुईगाम सहित सीमावर्ती गाँवों में कनेक्टिविटी बहाल करने को प्राथमिकता देने को कहा।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ की ऐसी स्थिति बार–बार न पैदा हो, इसके लिए दीर्घकालिक निवारण योजना की आवश्यकता समझाई।

इस समीक्षा बैठक में बनासकाँठा जिला कलेक्टर मिहिर पटेल ने सुईगाम, वाव, थराद एवं भाभर में 3416 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लगभग 296 गावों के भारी वर्षा से प्रभावित होने का विवरण प्रेजेंटेशन के जरिए दिया।

प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू तथा स्थानांतरण का विवरण देते हुए प्रेजेंटेशन में बताया गया कि 4 तहसीलों में कुल 228 लोगों को रेस्कूय किया गया और 6800 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। इतना ही नहीं, एनडीआरएफ की 2 तथा एसडीआरएफ की 3 टीमें स्थानीय प्रशासन की सहायता के लिए तैनात हैं।

राज्य सरकार द्वारा 15-15 किलो खाद्य सामग्री वाली 18 हजार किट प्रभावित क्षेत्रों मे लोगों को पहुँचाने के लिए रवाना की गई हैं। इसके अलावा, ढाई लाख फूड पैकेट तथा पानी की 3 लाख बोतल अब तक प्रभावितों को प्रदान की गई हैं।

प्रभावित तहसीलों में सभी सबस्टेशनों में विद्युत आपूर्ति बनी हुई है। 213 गाँवों में विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिनमें से 181 से अधिक गाँवों में विद्युत आपूर्ति बहाल हो गई है।

जलापूर्ति का विवरण देते हुए जिला कलेक्टर ने कहा कि प्रभावित 4 तहसीलों के 295 में से 168 गाँवों में जलापूर्ति पुनः शुरू कर दी गई है और सभी गाँवों में पीने का पानी पहुँचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है।

प्रभावित गाँवों में वर्षा जल के कारण बीमारी–महामारी फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता के साथ 207 मेडिकल सर्वेलांस टीम कार्यरत कर 7600 से अधिक क्लोरीन टैब्लेट, लगभग 1040 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं तथा हाउस टु हाउस स्वास्थ्य सर्वेक्षण कार्य भी तेजी से पूर्ण करने को प्रशासन प्रतिबद्ध है।

विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी ने मूल स्रोत से ही पानी का क्लोरीनेशन करवा कर वितरण करने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री सुईगाम के दौरे के बाद देर शाम थराद तहसील के नागला एवं खानपुर गाँवों में प्रभावितों से मिलने पहुँचे और उन्होंने इन क्षेत्रों में भरे हुए वर्षा जल की निकासी के लिए स्थानीय लोगों के साथ चर्चा की तथा मार्गदर्शन प्रदान किया।

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