@ गांधीनगर गुजरात :-
भारत विविध संस्कृतियों, धर्मों, परंपराओं, व्यंजनों तथा मान्यताओं की पहचान रखने वाला विशाल देश है। विश्वभर में खान-पान की बात का जब डंका बजता है, तब भारत का नाम सबसे पहली पंक्ति में लिया जाता है, कारण कि भारत के हर राज्य की परंपरागत से लेकर स्ट्रीट फूड के भोजन की सूची अपनी-अपनी विशेषताओं के साथ एक विशिष्ट पहचान रखतीa है। ऐसे में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में पहली बार आयोजित भारत पर्व-2025 ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक ही आँगन में एकत्र कर अद्भुत समन्वय का निर्माण किया है। देश के हर कोने से आए कलाकारों, शिल्पकारों, रसोइयों तथा दर्शकों के लिए यह पर्व एक जीवंत उदाहरण सिद्ध हो रहा है।

इस वर्ष भारत पर्व पहली बार दिल्ली के लाल किले से बाहर गुजरात की धरती पर एकता नगर में मनाया जा रहा है। राजपीपळा निवासी हर्निषा हिमांशु राव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन को लेकर गुजरात में भारत पर्व को मनाया जाना गौरव का विषय है। यहाँ हर प्रांत के व्यजन, नृत्य, लोक कला, हस्तकला तथा शिल्पकला; सब एक ही स्थान पर देखने को मिले। यह एक जीवंत भारत की झलक है।
उन्होंने कहा कि भारत पर्व में स्टूडियो किचन’ विशेष आकर्षण बना है। यहाँ प्रतिदिन देश के विभिन्न प्रांतों के मास्टरशेफ्स अपने प्रांत के खान-पान के विशिष्ट व्यंजन प्रस्तुत करते हैं। गुजरात के फाफडा-जलेबी, ढोकळा तथा हांडवा के सुगंध के बीच दक्षिण भारत के इडली-डोसा, उत्तर भारत के छोले-भटूरे तथा कश्मीर के रोशनजोश जैसे लाजवाब व्यंजन स्वादप्रेमियों को आकर्षित करते हैं।
पर्यटक हर्निषा कहती हैं कि यहाँ हर व्यंजन स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी है। साउथ तथा नॉर्थ के फ्यूजन से बनी कुछ बानगियाँ तो बहुत ही अनूठी लगीं। खान-पान में इस प्रकार का समन्वय आज स्वस्थ भारत की दिशा में एक नया प्रयास लगता है। यहाँ हर व्यंजन के पीछे एक कहानी है और हर व्यंजन प्रदेश की धरती की सुगंध, लोगों की संस्कृति तथा उनकी परंपरा का अहसास कराता है। लाइव किचन में व्यंजन तैयार होते देखना ही अपने आपमें कलात्मक अनुभव है। एकता नगर में भारत पर्व में लोक कला, नृत्य तथा संगीत के ताल गूंज उठे हैं। राजस्थान की कठपुतली कला, पंजाब का भंगड़ा, गुजरात का गरबा तथा दक्षिण भारत का भरतनाट्यम; सभी ने अपनी संस्कृति का अहसास कराया। विविधता में एकता का जीवंत दृश्य यहाँ भारत पर्व में देखने को मिला है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शनी स्टॉल्स में देशभर की हस्तकला, वस्त्र, शिल्प तथा हैंडमेड प्रोडक्ट्स ने सभी का ध्यान खींचा है। राजस्थान के मिरर वर्क से लेकर पूर्वोत्तर के बाँस के हस्त उद्योग एवं कश्मीरी पश्मीना की सुंदरता ने भारत की समृद्ध परंपरा को उजागर किया है। हर्निषा ने जोड़ा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में भारत पर्व के अनुभव का शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता है।
यह भारत पर्व उत्सव भारतीय एकता का प्रतीक बना है। यहाँ हर प्रांत, भाषा तथा स्वाद एक होकर भारत की आत्मा को जीवंत करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत पर्व के इस स्टूडियो किचन में भले ही प्रांत तथा व्यंजन अलग-अलग हों, परंतु स्वाद का भाव एक है भारतीय’। एकता नगर में आयोजित भारत पर्व स्वाद, संगीत, संस्कृति एवं समृद्ध परंपरा का अनूठा मेला है, जहाँ भारत स्वयं अपने रंग में झूम रहा है।
