@ नई दिल्ली :-
इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट, जो हीरे, रंगीन रत्नों और आभूषणों के प्रमाणन में एक वैश्विक और भरोसेमंद संस्था है तथा भारत में जिसकी मजबूत मौजूदगी है, ने अपनी दूसरी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इससे उत्तर भारत में IGI की मौजूदगी और मजबूत हुई है। रंगीन रत्नों के व्यापार, बिना कटे पोल्की और बेहतरीन आभूषण कारीगरी में जयपुर की पुरानी और समृद्ध परंपरा इसे IGI के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बनाती है।

सीतापुरा, जो जयपुर का प्रसिद्ध और समर्पित रत्न एवं आभूषण निर्माण केंद्र है, IGI के व्यापार के करीब रहने के उद्देश्य के अनुरूप है। इससे उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और भरोसा सुनिश्चित होता है। IGI का सीतापुरा में शुभारंभ, स्थानीय उपस्थिति और बेहतर पहुंच के माध्यम से निर्माताओं और निर्यातकों को समर्थन देने की उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
इस अवसर पर बोलते हुए IGI के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं ग्लोबल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, तेहमास्प प्रिंटर ने कहा,IGI में हमने उपभोक्ताओं की पसंद में हो रहे वैश्विक बदलाव को समय रहते पहचाना है, विशेष रूप से रंगीन रत्नों की बढ़ती मांग को। इस मांग में तेजी का मुख्य कारण ऐसे अनोखे फ्यूज़न डिज़ाइनों में उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि है, जिनमें कई कीमती रत्नों का संयोजन होता है, साथ ही पर्सनलाइज़्ड ज्वेलरी की लोकप्रियता और रंगीन रत्नों की दुर्लभता व सुंदरता के प्रति बढ़ता आकर्षण भी इसमें अहम भूमिका निभा रहा है।”
इसके अतिरिक्त, रंगीन रत्नों की उत्पत्ति का निर्धारण और उनमें किए गए ट्रीटमेंट की पहचान अत्यंत विशेषज्ञता वाले प्रक्रियाएँ हैं, जिनके लिए अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों की आवश्यकता होती है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उन्नत तकनीक के साथ-साथ गहन जेमोलॉजिकल विशेषज्ञता भी आवश्यक है। जयपुर में हमारी नई प्रयोगशाला के माध्यम से IGI बड़े पैमाने पर इस सटीकता को प्रदान करने की अपनी क्षमता को और सशक्त कर रहा है। यह विस्तार न केवल उद्योग की बढ़ती जरूरतों को समर्थन देता है, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में पारदर्शिता, विश्वास और भरोसे को भी मजबूत करता है—जिससे वैश्विक स्तर पर रंगीन रत्नों के बाजार के विस्तार में योगदान मिलता है।
जयपुर स्थित यह सुविधा हीरे और रंगीन रत्नों आभूषणों के लिए IGI की प्रमाणन सेवाओं की पूरी श्रृंखला प्रदान करेगी, जिससे पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित होगा। रमन स्पेक्ट्रोमेट्री, यूवी-विज़-एनआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी और एक्स-रे फ्लोरेसेंस जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग करते हुए IGI रत्नों की आंतरिक संरचना, संघटन और समावेशन का विश्लेषण करता है, ताकि उनकी भूवैज्ञानिक उत्पत्ति और इतिहास का पता लगाया जा सके।
व्यापार को सशक्त बनाने के उद्देश्य से, सीतापुरा कार्यालय क्षेत्रीय कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक कार्यक्रम भी प्रदान करेगा। ये कार्यक्रम IGI स्कूल ऑफ जेमोलॉजी के माध्यम से उद्योग से जुड़े, आधुनिक जेमोलॉजिकल ज्ञान प्रदान करेंगे। इस नई शुरुआत के साथ, IGI अब 10 देशों में 35 प्रयोगशालाएं संचालित करता है। इसके अलावा, IGI के 21 स्कूल ऑफ जेमोलॉजी भी कार्यरत हैं।
