@ गांधीनगर गुजरात :-
भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) नियमों को लागू करने और गहरे समुद्र में मत्स्याखेट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह 20 फरवरी को वेरावल में विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास फ्रेमवर्क लॉन्च करेंगे। इस नए ढांचे से मछुआरों को गहरे समुद्री क्षेत्रों में मत्स्याखेट के लिए आधिकारिक अनुमति (एक्सेस पास) लेना आसान हो जाएगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह पहल भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाएगी। गुजरात में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, तब एक्सेस पास की पहल परंपरागत और छोटे पैमाने के मछुआरों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और मत्स्यपालक उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) को सशक्त बनाएगी।
उल्लेखनीय है कि एक्सेस पास भारत के ईईजेड में मछुआरों को मत्स्याखेट के लिए कानूनी और पारदर्शी तरीके से अनुमति देगा। यह उन्हें गहरे समुद्री क्षेत्रों में टूना जैसी उच्च-मूल्य की प्रजातियों को पकड़ने में मदद करेगा तथा अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन एवं उचित ट्रैकिंग भी सुनिश्चित होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है एक्सेस पास प्रदान करने का निर्णय
भारत के पास 11,099 किलोमीटर की तटरेखा और 24 लाख वर्ग किलोमीटर का ईईजेड है। विशाल समुद्री संसाधन से समृद्ध होने के बावजूद अधिकतर मछली पकड़ने की गतिविधियां 40-50 नॉटिकल मील (समुद्री मील) तक ही सीमित रहती है। ईईजेड नियम, 2025 में मत्स्याखेट के टिकाऊ उपयोग को 4 नवंबर, 2025 को प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय शेल्फ, विशेष आर्थिक क्षेत्र तथा अन्य समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया। ये नियम एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचा बनाते हैं, जिसका उद्देश्य ईईजेड में मत्स्याखेट गतिविधियों का जिम्मेदार और टिकाऊ तरीके से विस्तार करना है।
यह ढांचा निगरानी, अनुपालन और सुरक्षा में वृद्धि करेगा, साथ ही इससे मत्स्य पालन क्षेत्र की आय में भी बढ़ोतरी होगी। यह भारत के सीफूड यानी समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को भी मजबूत बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाएगा। भारत वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 62,408 करोड़ रुपए मूल्य के सीफूड निर्यात के साथ मत्स्य पालन और जलीय कृषि का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया।
गुजरात में वेरावल एक मुख्य मछली प्रसंस्करण और निर्यात केंद्र है और इसकी रणनीतिक लोकेशन के कारण इसे एक्सेस पास के लॉन्च के लिए चुना गया है। भारत सरकार का उद्देश्य देश भर में 34 मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्लस्टरों का विकास करना है, जिसमें वेरावल सीफूड निर्यात, मूल्यवर्धन और प्रसंस्करण के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में मुख्य भूमिका निभाएगा। यह पहल सरकार के ब्लू इकोनॉमी विजन के अनुरूप है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत के सीफूड निर्यात का लाभ सीधे मछुआरों और तटीय समुदायों को मिले और प्रीमियम वैश्विक बाजारों तक पहुंच भी सुनिश्चित हो।
विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) सामुद्रिक कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय 1982 (यूएनसीएलओएस) के अंतर्गत व्याख्यायित वह समुद्री क्षेत्र होता है, जो किसी देश की समुद्री सीमा से 200 नॉटिकल मील तक फैला होता है। इस जोन में देश को समुद्री संसाधनों की खोज, संरक्षण और उपयोग करने के विशिष्ट अधिकार मिलते हैं, जिसमें मत्स्याखेट, ऊर्जा उत्पादन और खनिजों का दोहन शामिल है। लगभग 24 लाख वर्ग किमी में फैले ईईजेड के साथ, भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री क्षेत्र वाले देशों में से एक है। यह क्षेत्र टिकाऊ मत्स्य पालन विकास, आजीविका उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और निर्यात वृद्धि के लिए अपार अवसर प्रदान करता है।
वेरावल स्थित विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मत्स्याखेट और एक्सेस पास की सुविधा लॉन्च होने से यह क्षेत्र मत्स्य पालन विकास के एक मुख्य केंद्र के रूप में उभरेगा, जो समुद्री संसाधन वृद्धि और निर्यात में गुजरात के नेतृत्व को दिखाता है।
