भारतीय वायु सेना का जैसलमेर के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में ‘वायु शक्ति’2026 का शानदार प्रदर्शन

@  सुनीत निगम जैसलमेर पोखरण राजस्थान :-

भारतीय वायु सेना ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में ‘वायु शक्ति’ अभ्यास के दौरान शुक्रवार को अपनी मारक क्षमता, सटीक प्रहार और एकीकृत युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में फायर पावर प्रदर्शन में भाग लिया, उनके साथ राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू, संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी.एस. शेखावत, मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल, कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के कमांडर-इन-चीफ, तीनों सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, डीपीएसयूएस, पूर्व वायु सेना प्रमुख, सम्मानित दिग्गज, मित्र विदेशी देशों के रक्षा अताशे, भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और स्कूली बच्चे शामिल थे।

राफेल लड़ाकू विमान ने सुपरसोनिक बूम के साथ शुरुआत की, जिससे पूरी रेंज थर्रा उठी। सुखोई-30 एमकेआई ने दुश्मन के रनवे और ठिकानों पर 44 बम गिराए। मिग-29 ने टैंक काफिले को नष्ट किया, जबकि जगुआर ने सुदर्शन फॉर्मेशन में लक्ष्य पर सटीक हमला किया।

वायु सेना ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद अपने पहले शक्ति प्रदर्शन में मिराज-2000, हॉक और अन्य विमानों से रॉकेट, लेजर गाइडेड बम और मिसाइल गिराकर दुश्मन के नकली ठिकानों जैसे रडार, बंकर, एम्यूनिशन डंप, हवाई पट्टी और पेट्रोल पंप को ध्वस्त किया। कुल 18 नकली लक्ष्यों को बर्बाद किया गया। हेलीकॉप्टरों में अपाचे, प्रचंड (एलसीएच), चिनूक, एमआई-17 और चेतक शामिल रहे। चिनूक ने एम-777 होवित्जर तोप पहुंचाई, जबकि गरुड़ कमांडो ने हेलीकॉप्टर से ड्रॉप कर आतंकवादी ठिकाने मुक्त करवाया। सी-130जे हरक्यूलिस ने रात में असॉल्ट लैंडिंग की और कमांडो ड्रॉप किया। सी-295 ने भी असॉल्ट लैंडिंग दिखाई।

पाकिस्तान के साथ हवाई संघर्ष में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 से दुश्मन के हमलों को नाकाम करने का प्रदर्शन आज यहां दोहराया गया। स्वदेशी हथियारों जैसे आकाश और समर मिसाइल ने सतह से हवा में मार करने वाले लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया। परिवहन विमानों में सी-17, सी-130जे, सी-295 आदि शामिल थे। इस बार का मुख्य आकर्षण पहली बार वायु शक्ति में शामिल भव्य ड्रोन शो रहा।आसमान में ड्रोन के जरिए भारत का नक्शा, आतिशबाजी, एयरफोर्स का प्रतीक विमान दिखाया गया। इस ड्रोन शो में पाकिस्तान के साथ 1965 के सरगोधा युद्ध में निर्मलजीत सिंह की बहादुरी, कारगिल में टाइगर हिल बमबारी, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को दर्शाया गया।

पोखरण में शाम 5.10 बजे से 7.45 तक वायु सेना ने दिन की रोशनी में, रेगिस्तान के धूल भरे वातावरण में और रात के अंधेरे में अपनी शक्तिशाली क्षमता का प्रदर्शन किया। कुल 2 घंटे 35 मिनट के इस ‘वायु शक्ति’ में वायु सेना के 77 फाइटर जेट, 43 हेलीकॉप्टर और 8 परिवहन विमानों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा दूर से संचालित विमानों ने एरियल टारगेट, जमीन से हवा में मार करने वाले हथियारों का प्रदर्शन करके ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक दिखाई। लड़ाकू विमानों में राफेल, मिराज-2000, स्वदेशी एयरक्राफ्ट तेजस, सुखोई-30, मिग-29, और जगुआर और हेलीकाप्टरों में अपाचे, एमआई-17 वीआई, चिनूक, एमआई-17 वी5, एलसीएच ‘प्रचंड’ और एएलएच ‘ध्रुव’ इस हवाई अभ्यास का हिस्सा बने।

वायु शक्ति के दौरान कुल 23 लक्ष्यों पर सटीक हमलों से पाकिस्तानी सीमा से लगी जैसलमेर की धरती थर्रा उठी, जिनमें जमीन से हवा में, हवा से जमीन में, हवा से हवा में या जमीन से जमीन पर हमले किये गए। इन हमलों में 277 हथियारों के जरिये कुल 11 हजार 835 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया।

यह सभी हमले पोखरण रेंज के 3 किलोमीटर के दायरे में किये गए। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पार इस्तेमाल किये गए लंबी दूरी के हथियारों का प्रदर्शन सुरक्षा के नजरिये से पोखरण में नहीं हुआ, लेकिन सीमित दूरी के हथियारों से वायु सेना ने अपनी मारक क्षमता दिखाई। हालिया तकनीकी घटना के कारण स्वदेशी तेजस मार्क-1 वायु शक्ति अभ्यास में शामिल नहीं हुआ, क्योंकि वायु सेना तेजस बेड़े की सुरक्षा जांच कर रही है।

राष्ट्रपति ने जैसलमेर एयर फोर्स स्टेशन से देश में बने हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में भी उड़ान भरी,

भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को सुबह जैसलमेर एयर फोर्स स्टेशन से स्वदेशी हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की जरूरत को देखते हुए वायु सेना में शामिल किये गए एलसीएच ‘प्रचंड’ से पाकिस्तान और चीन के खिलाफ भारतीय वायु सेना और मजबूत हुई है। इससे पहले राष्ट्रपति लड़ाकू विमान राफेल और सुखोई में उड़ान भर चुकी हैं।

मल्टी रोल वाले हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ की जोधपुर में पहली ‘धनुष’ स्क्वाड्रन बनाई गई है। भारतीय सेनाओं की भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विशेष तौर पर तैयार किये गए यह हेलीकॉप्टर दुर्गम स्थानों और सघन पर्वतीय क्षेत्रों में भी कारगर हैं। इसे कई तरह के बड़े बम, बंदूकों और मिसाइलों से लैस किया जा सकता है।

हवा में उड़ान भरते वक्त और दुश्मन को चकमा देते वक्त भी अपाचे हेलीकॉप्टर पहाड़ियों और घाटियों में छिपे दुश्मन पर सटीक निशाना लगा सकता है। अचूक निशाने की वजह से हेलीकॉप्टर के गोला-बारूद बर्बाद नहीं होते हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में निर्मित प्रचंड पूरी तरह भारत में बनाया गया लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है। इसे खासतौर पर ऊंचे पहाड़ों लद्दाख, सियाचिन जैसे इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर जिले में पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायु सेना के शक्तिशाली फायरपावर ‘वायु शक्ति’ अभ्यास देखने के लिए आईं थीं। इसी दौरान उन्होंने स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी। यह पहली बार है, जब किसी राष्ट्रपति ने एलसीएच ‘प्रचंड’ में उड़ान भरी है। उन्होंने उड़ान के दौरान ‘वायु शक्ति’ अभ्यास क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण भी किया। शाम को राष्ट्रपति पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायु सेना के सबसे बड़े फायरपावर प्रदर्शन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं।

द्रौपदी मुर्मु ने 29 अक्टूबर, 2025 को अंबाला (हरियाणा) स्थित वायु सेना स्टेशन से राफेल विमान में उड़ान भरी थी। उन्होंने लगभग 30 मिनट की उड़ान में लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय की, उसके बाद वे वायु सेना स्टेशन लौट आईं। विमान को 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी ने उड़ाया। विमान ने समुद्र तल से लगभग 15000 फीट की ऊंचाई पर और लगभग 700 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भरी। इससे पहले उन्होंने 2023 में सुखोई 30 एमकेआई में उड़ान भरी थी। भारतीय वायु सेना के दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली वह भारत की पहली राष्ट्रपति हैं।

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