@ अंडमान एवं निकोबार :-
कार निकोबार में मछुआरों के लिए शुरू किए गए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरणों ने कुशल और सटीक मछली पकडने की तकनीक को सक्षम बनाया है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए मछली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई है।
इससे न केवल उनके ताजे प्रोटीन और महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के सेवन में वृद्धि हुई है, बल्कि टीटॉप गांव के श्री जुनैद और चुचुचा गांव के श्री अब्दुल सत्तार जैसे कुछ मछुआरों ने बाजारों में अपनी मछली बेचना शुरू कर दिया है, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हुई है।

निकोबारी समुदायों का जीवन और आजीविका पारंपरिक मछली पकडने पर आधारित है। उनकी मछली पकडने की तकनीक अनुभव से परिष्कृत तो है, लेकिन समुद्र और मौसम की अप्रत्याशित प्रकृति के साथ-साथ सटीक नेविगेशन उपकरणों की कमी के कारण सीमित रही है। अक्सर, मौसम की खराबी के कारण नावें रास्ता भटक जाती हैं, जिससे उत्पादकता का नुकसान होता है और कभी-कभी जान का जोखिम भी बन जाता है।
इस चुनौती से निपटने के लिए सेंट्रल आइलैंड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एसईईडी प्रभाग कार्यक्रम के तहत स्थानीय समुद्री वातावरण और मछली पकड़ने की पद्धतियों के अनुकूल जीपीएस उपकरण पेश किए हैं।
मछुआरों को जीपीएस नेविगेशन और आधुनिक मछली पकड़ने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे जीपीएस उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। उनकी जरूरतों और चुनौतियों का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण किए गए और जनजातीय परिषद के माध्यम से इस प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
जीपीएस प्रौद्योगिकी की शुरूआत ने मछुआरों द्वारा मछली पकड़ने के स्थानों को खोजने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव किया है, जिससे उनके लिए सर्वोत्तम स्थानों तक पहुंचना बहुत आसान और तेज़ हो गया है। इन उपकरणों की मदद से मछली पकड़ने की उनकी क्षमता में काफी सुधार हुआ है, जिससे उनके परिवारों और व्यापक समुदाय के लिए भरपूर भोजन उपलब्ध हो पा रहा है।
कार निकोबार द्वीप पर तटीय मत्स्य पालन सूचना केंद्र स्थापित किया गया है। कार निकोबार के जनजाति मछुआरों को कुल 5 जीपीएस उपकरण प्रदान किए गए हैं और अन्य 5 जीपीएस उपकरण मछुआरों के सामान्य उपयोग के लिए रखे गए हैं।
इन प्रयासों से दैनिक मछली पकड़ने की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है। सटीक नेविगेशन और उत्पादक क्षेत्रों की पहचान के कारण मछुआरे अब मछली पकड़ने में कम समय बिताते हुए भी अपनी पकड में औसतन लगभग 168 प्रतिशत की वृद्धि का अनुभव कर रहे हैं।
मछलियों की बढती उपलब्धता ने परिवारों और समुदाय में पोषण के स्तर को सुधारा है। उच्च आय ने विविध खाद्य स्रोतों तक बेहतर पहुंच प्रदान की है, जो बेहतर स्वास्थ्य और पोषण में योगदान दे रही है।
अधिक जानकारी के लिए डॉ. आर. किरुबा शंकर से rkirubasankar[at]gmail[dot]com पर संपर्क करें।
