फिनलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अलेक्जेंडर स्टब ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की

@ नई दिल्ली :-

फिनलैंड गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. अलेक्जेंडर स्टब ने 5 मार्च, 2026 राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति स्टब का स्वागत करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष के ‘रायसीना डायलॉग’ में मुख्य अतिथि के रूप में उनकी उपस्थिति भारत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समकालीन वैश्विक स्थिति पर उनके विचार सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत मूल्यवान होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत फिनलैंड को एक मूल्यवान और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है, जिसके साथ संबंध आपसी विश्वास और साझा लोकतांत्रिक परंपराओं पर आधारित हैं।

दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि हाल के वर्षों में भारत-फिनलैंड संबंध नवाचार, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, शिक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे प्रमुख स्तंभों द्वारा संचालित एक गतिशील साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि हाल ही में घोषित भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौता हमारे व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति प्रदान करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी से लेकर 6जी तक, अत्याधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों में फिनलैंड वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। उन्होंने ‘विकसित भारत’ की दिशा में भारत की यात्रा में फिनिश कंपनियों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कई भारतीय कंपनियां फिनलैंड में सक्रिय हैं और हजारों भारतीय, विशेषकर आईटी पेशेवर, फिनलैंड की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परिदृश्य इन क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की अपार संभावनाएं प्रदान करता है।

राष्ट्रपति ने सतत विकास और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में फिनलैंड के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने भी सौर एवं पवन ऊर्जा क्षमताओं का विस्तार करके, हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देकर, सतत ऊर्जा दक्षता में सुधार करके और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन एवं वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन जैसे मंचों की शुरुआत करके जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने राष्ट्रपति स्टब को लाइफ मिशन के बारे में भी जानकारी दी, जो लोगों को टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ प्रौद्योगिकियों में फिनलैंड की विशेषज्ञता और हरित ऊर्जा से जुड़े भारत के नवाचार को मिलाकर हम इस तथ्य को प्रदर्शित कर सकते हैं कि समृद्धि और स्थिरता साथ-साथ संभव हो सकती है।

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