दिल्ली स्थित यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान में विश्व किडनी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

@ नई दिल्ली :-

दिल्ली स्थित यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान में 12 मार्च 2026 को विश्व किडनी दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन किडनी के महत्व, किडनी रोगों की रोकथाम और समय पर जांच के प्रति लोगों, देखभाल करने वालों, नीति निर्माताओं और सरकार के बीच जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से किया गया।

इस वर्ष विश्व किडनी दिवस की 20वीं वर्षगांठ मनाई गई, जिसका वैश्विक विषय था “लोगों की देखभाल, ग्रह की रक्षा”। कार्यक्रम में आम नागरिकों, अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों, मरीजों और उनके परिजनों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा अन्य अतिथियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में ILBS के चांसलर एवं निदेशक डॉ. एस. के. सरीन  ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि ILBS में किडनी से जुड़ी बीमारियों के निदान और उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें आधुनिक डायलिसिस यूनिट, कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (CRRT), पेरिटोनियल डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण जैसी सेवाएं शामिल हैं।

नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और विभागाध्यक्ष डॉ. आरपी माथुर ने विश्व किडनी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किडनी रोगों की रोकथाम और समय पर जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।

वहीं यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभियुत्थन सिंह जादोन ने ILBS में उपलब्ध उन्नत किडनी ट्रांसप्लांट सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यहां लिविंग डोनर और डीसिज्ड डोनर ट्रांसप्लांट की सफल सेवाएं उपलब्ध हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी और प्रख्यात लेखक विकास स्वरूप ने ILBS में मरीजों को दी जा रही उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि किडनी रोगों की शुरुआती पहचान के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद आवश्यक है। इस अवसर पर उन्होंने किडनी देखभाल के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नर्सों और तकनीशियनों को सम्मानित कर प्रमाणपत्र भी वितरित किए।

कार्यक्रम के दौरान किडनी प्रत्यारोपण से स्वस्थ हुए मरीज गौरव ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि छह महीने तक डायलिसिस पर रहने के बाद आठ महीने पहले उनके पिता ने उन्हें किडनी दान की। सफल प्रत्यारोपण के बाद अब वे फिर से अपने जीवन और कला के प्रति जुनून को आगे बढ़ा पा रहे हैं।

विश्व किडनी दिवस के इस आयोजन के माध्यम से विशेषज्ञों ने लोगों को यह संदेश दिया कि स्वस्थ जीवनशैली, नियमित जांच और समय पर उपचार से किडनी रोगों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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