@ चेन्नई तमिलनाडु :-
तमिलनाडु के चेन्नई में केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आयोजित ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) सम्मेलन को संबोधित किया और समुदायों को जोड़ने और अंतिम छोर तक शासन पहुंचाने में भारतीय डाक की ऐतिहासिक भूमिका के बारे में बताया।

डॉ. पेम्मासानी ने सभा को संबोधित करते हुए जीडीएस कर्मचारियों को ‘‘ग्रामीण भारत की धड़कन’’ बताया और कहा कि वे देश भर में सरकारी सेवाओं को नागरिकों से जोड़ते हैं।
उन्होंने जीडीएस समुदाय का स्वागत करते हुए कहा, पत्रों से लेकर पार्सल तक, सरकारी योजनाओं से लेकर बैंकिंग तक, आधार कार्ड से लेकर पासपोर्ट सेवाओं तक—आप हर गांव, हर गली और हर घर तक पहुंचते हैं। चिलचिलाती धूप और मूसलाधार बारिश में भी, आप ग्रामीण भारत के लिए विश्वास का सेतु और सेवा का उदाहरण बने रहे हैं।
राज्य मंत्री ने भारत में संगठित संचार प्रणालियों के लंबे इतिहास को याद करते हुए कहा कि मौर्य शासन काल में, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने एक शाही संदेशवाहक सेवा स्थापित की थी जबकि तमिलनाडु क्षेत्र में चोल, पांड्या और चेरा शासकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक संदेशवाहक तंत्र संचालित किए थे। आधुनिक डाक प्रणाली ने 1774 में कलकत्ता में प्रधान डाक घर की स्थापना के साथ रूप लिया और भारतीय डाक अपने वर्तमान स्वरूप में 1 अक्टूबर 1854 को स्थापित हुई।
मंत्री जी ने भारत में ई-कॉमर्स की बढ़ती मांग से उत्पन्न विशाल अवसर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय डाक का पार्सल राजस्व वर्तमान में 1,000 करोड़ रुपये से कम है जबकि एक निजी कूरियर कंपनी लगभग 6,000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करती है। उन्होंने कहा, लॉजिस्टिक्स बाजार आज लगभग 10 बिलियन डॉलर (90,000 करोड़ रुपये) का है और 2031 तक इसके बढ़कर 20 बिलियन डॉलर (1.8 लाख करोड़ रुपये) होने की उम्मीद है। उन्होंने डाक कर्मचारियों से इस अवसर का लाभ उठाने में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।

पेम्मासानी ने कहा कि दशकों से भारतीय डाक देश भर में संचार की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता रहा है जिसके माध्यम से कानूनी दस्तावेज, धनादेश, समाचार पत्र और पुस्तकें पहुंचाई जाती थी, जो सार्वजनिक चर्चा बनती थी और दूर-दराज के परिवारों को आपस में जोड़ती थी। कई ग्रामीण क्षेत्रों में, डाकिया अक्सर एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में ग्रामीणों को पत्र पढ़ने और लिखने में मदद करता था और गांवों तथा व्यापक दुनिया के बीच एक कड़ी का काम करता था।
राज्य मंत्री ने बताया कि आज भारतीय डाक विश्व के सबसे बड़े डाक तंत्र में से एक का संचालन करती है जिसमें लगभग चार लाख नियमित कर्मचारी और 2.5 लाख से अधिक ग्रामीण डाक सेवक देश भर के 1.6 लाख से अधिक डाकघरों में कार्यरत हैं। संचार क्षेत्र में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए पेम्मासानी ने कहा कि मोबाइल फोन, इंटरनेट और निजी कूरियर कंपनियों के आगमन से लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। उन्होंने कहा कि लागत में कटौती करने के बजाय राजस्व बढ़ाने और उभरते अवसरों का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
डॉ. पेम्मासानी ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण डाक सेवक शासन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में एक विशेष भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, आप शासन की अंतिम कड़ी नहीं हैं, आप पहली कड़ी हैं। आपके बिना सरकारी सेवाएं गांवों तक नहीं पहुंच सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि निजी लॉजिस्टिक्स कंपनियां वहीं काम करती हैं जहां मुनाफा होता है लेकिन भारतीय डाक वहां काम करती है जहां लोग रहते हैं। इनमें दूरदराज के आदिवासी क्षेत्र और दुर्गम इलाके भी शामिल हैं।
उन्होंने तमिलनाडु डाक सर्कल के प्रदर्शन की भी सराहना की और बताया कि कुल राजस्व के मामले में यह देश में दूसरे स्थान पर है।
राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मार्गदर्शन में डाक विभाग एक पारंपरिक सेवा विभाग से एक बड़े पैमाने पर, डेटा-संचालित और ग्राहक-केंद्रित सार्वजनिक लॉजिस्टिक्स संगठन में बदल रहा है।

उन्होंने कहा कि इस बदलाव के अंतर्गत कई पहलें की जा रही हैं। इसमें वरिष्ठ प्रौद्योगिकी और विपणन नेतृत्व की नियुक्ति, नियमित प्रदर्शन समीक्षा और सेवा वितरण पर विशेष ध्यान देना शामिल है। लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से आईटी 2.0 प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक बड़ा प्रौद्योगिकी उन्नयन लागू किया जा रहा है, जिससे मेल और पार्सल की संपूर्ण ट्रैकिंग, ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट, यूपीआई-सक्षम नकदी रहित लेनदेन, जियोटैगिंग और एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
पेम्मासानी ने डिजीपिन की शुरुआत के बारे में भी बताया। यह एक 10-अंकीय भू-कोडित राष्ट्रीय पता प्रणाली है जो आपातकालीन प्रतिक्रिया, ई-कॉमर्स, ड्रोन लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट शासन में सहायक होगा।
राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने संशोधित पारिश्रमिक और प्रदर्शन को पुरस्कृत करने वाली एक संरचित प्रोत्साहन प्रणाली के साथ-साथ पदोन्नति के अवसर, प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्थानांतरण लाभ प्रदान करके ग्रामीण डाक सेवकों के योगदान को मान्यता दी है।
डॉ. पेम्मासानी ने डाक कर्मचारियों से भारतीय डाक की विरासत को कायम रखने का आह्वान करते हुए उनसे समर्पण और व्यावसायिकता के साथ सेवाएं प्रदान करने का आग्रह किया। अपना डाकघर प्रतिदिन समय पर खोलें। गर्व के साथ डिलीवरी करें। खोला गया हर बचत खाता और जारी की गई हर बीमा पॉलिसी विभाग और राष्ट्र दोनों को मजबूत करती है।
उन्होंने जीडीएस के कर्मचारियों को भारत की विकास यात्रा में योगदानकर्ता के रूप में स्वयं को देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया। आप शायद स्वयं को केवल एक डाकिया या जीडीएस समझते हों। लेकिन आप जो बैग ले जाते हैं उस बैग में केवल चिट्ठियां ही नहीं होती बल्कि उसमें एक राष्ट्र का भरोसा होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय डाक देश को जोड़ने और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
