@ नई दिल्ली :-
काकोरी प्रतिरोध की ऐतिहासिक शताब्दी के अवसर पर सभ्यता अध्ययन केंद्र (Centre for Civilisational Studies), नई दिल्ली एक व्यापक राष्ट्रव्यापी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक अभियान का शुभारंभ करने जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत शोध-आधारित नाट्य प्रस्तुति “काकोरी क्रांति गाथा – Kakori Files का भव्य उद्घाटन मंचन 15 मार्च 2026 को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), अभिमंच सभागार, मण्डी हाउस, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के उस क्रांतिकारी अध्याय का राष्ट्रीय स्मरण है जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ों को चुनौती दी और देश के युवाओं में स्वतंत्रता के लिए अदम्य साहस और समर्पण की भावना जगाई।
इस उद्घाटन अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं तथा सांस्कृतिक जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति प्रस्तावित है।
इस नाटक के लेखक और सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक रवि शंकर ने कहा:
“काकोरी प्रतिरोध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक क्षण था। इस नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से हमारा प्रयास है कि उस ऐतिहासिक संघर्ष और उसके पीछे की क्रांतिकारी चेतना को शोध-आधारित और संवेदनशील प्रस्तुति के साथ समाज के सामने रखा जाए, ताकि नई पीढ़ी उस राष्ट्रीय संकल्प और बलिदान को समझ सके जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी।
नाट्य प्रस्तुति की निर्देशक और Silly Souls Foundation की संस्थापक मती प्रियंका शर्मा ने कहा:
“हमने इस नाटक को केवल एक ऐतिहासिक कथा के रूप में नहीं, बल्कि उस भावनात्मक और वैचारिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है जिसने अनेक युवाओं को राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने के लिए प्रेरित किया। हमारा उद्देश्य दर्शकों को उस युग की चेतना और संघर्ष का जीवंत अनुभव कराना है।

इस अवसर पर सभ्यता अध्ययन केंद्र के उपाध्यक्ष प्रकाश शर्मा ने कहा:
“काकोरी के क्रांतिकारियों का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अमर अध्याय है। शताब्दी वर्ष के इस अवसर पर हमारा उद्देश्य उन वीरों की गौरवगाथा को पुनः राष्ट्रीय स्मृति में प्रतिष्ठित करना है, ताकि आज की युवा पीढ़ी उस साहस, एकता और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा ले सके जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी।
सभ्यता अध्ययन केंद्र द्वारा प्रारंभ की जा रही यह पहल केवल एक नाट्य प्रस्तुति तक सीमित नहीं है। “काकोरी क्रांति गाथा की यह प्रस्तुति देश के विभिन्न शहरों में भी आयोजित की जाएगी, ताकि स्वतंत्रता संग्राम के इस क्रांतिकारी अध्याय को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाया जा सके।
