योग मानसिक शांति, धैर्य और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का सशक्त माध्यम: लोक सभा अध्यक्ष

@ नई दिल्ली :-

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संसद भवन में सांसदों के साथ योगाभ्यास का नेतृत्व किया। इस अवसर पर सभी को शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा कि यह दिवस भारत की उस शाश्वत सभ्यतागत विरासत का उत्सव है, जिसने मानवता को स्वास्थ्य, संतुलन और आंतरिक शांति का मार्ग प्रदान किया है।उन्होंने कहा कि “योग केवल शरीर को नहीं, विचारों को भी संतुलित करता है। संसद में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन योग हमें संवाद और संयम का मार्ग दिखाता है।”

योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बिरला ने कहा कि भारत के ऋषियों-मनीषियों ने सदियों तक योग परंपरा के संरक्षण के लिए प्रयास किए और इसे जीवन जीने की पद्धति के रूप में स्थापित किया।इसका उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और मानव चेतना का जागरण था। उन्होंने कहा कि आज योग एक वैश्विक जनआंदोलन बन चुका है और दुनिया इसे अपना रही है, पर यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान-परंपरा का उपहार है।

समकालीन जीवन में योग की प्रासंगिकता पर बल देते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक जीवन तनाव, असंतुलन और अनिश्चितताओं से घिरा है। ऐसे समय में योग मानसिक शांति, धैर्य, भावनात्मक संतुलन और अनुशासित जीवनशैली बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मानसिक तनाव है; योग इसका सुलभ, वैज्ञानिक और समावेशी समाधान प्रस्तुत करता है।आज की डिजिटल पीढ़ी को स्क्रीन टाइम और स्ट्रेस के बीच संतुलन बनाने के लिए योग को जीवनशैली बनाना होगा।

बिरला ने कहा कि योग केवल फिटनेस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, चरित्र और चेतना के विकास का माध्यम है। दैनिक जीवन में योग अपनाने से व्यक्ति अधिक संतुलित और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होता है तथा उसके समग्र स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।उन्होंने कहा कि “स्वस्थ नागरिक ही मजबूत लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं” और यदि देश के 140 करोड़ नागरिक प्रतिदिन कुछ मिनट योग के लिए निकालें, तो यह भारत की सबसे बड़ी जन-स्वास्थ्य क्रांति बन सकती है।

लोक सभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि योग का संदेश देश के प्रत्येक कोने तक पहुँचना चाहिए। जनप्रतिनिधि समाज के साथ संवाद में रहते हैं और वे लोगों को योग अपनाने तथा इसकी परिवर्तनकारी शक्ति को समझने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।जिस प्रकार हम लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं, उसी प्रकार योग को भी जन-जन के जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

बिरला ने कहा कि योग भारत की सॉफ्ट पावर नहीं, मानवता के लिए भारत की जिम्मेदारी है।उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि योग को एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि 365 दिनों का संकल्प बनाएं और नियमित योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य, सामंजस्य और आत्म-अनुशासन की संस्कृति को सुदृढ़ करें।

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