@ देहरादून उत्तराखंड :-
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रोफेसर ड़ॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि ,धार्मिक एवं सामाजिक विचारों का समूह ही वास्तविक गांधीवाद है जो आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना गांधीजी के जीवन काल में था।

इतिहास संकलन समिति द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में गाँधीवाद पर बोलते हुए देवभूमि उत्तराखण्ड यूनिवर्सिटी, देहरादून के विधि-संकायअध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि – महात्मा गांधी के विचार आज के वैश्वीकरण और सामाजिक असहिष्णुता के दौर में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और उपयोगी हो गये हैं, गांधीजी का मानना था कि “इस पृथ्वी पर मनुष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन उसके लालच के लिए नहीं”।
ड़ॉ. दीक्षित ने सवाल किया कि, जब प्रश्न यह उठे कि यह गांधीवाद क्या है ?
जवाब मिलता है कि, किसी भी शोषण का अहिंसक प्रतिरोध, सबसे पहले दूसरों की सेवा, संचय से पहले त्याग, झूठ के स्थान पर सच, अपने बजाय देश और समाज की चिंता करना आदि विचारों को समग्र रूप से गांधीवाद की संज्ञा दी जाती है, गांधीवादी विचार व्यापक रूप से प्राचीन भारतीय दर्शन से प्रेरणा पाते है, पूरी दुनियां में जो आज तनाव और हिंसक माहौल है उसमे गांधी जी का अहिंसा का सिद्धांत विवादों को सुलझाने का सबसे प्रभावी मार्ग बन सकता है।
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर ड़ॉ. अनिल दीक्षित ने कहा कि, गांधीजी के विचारों में, शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो केवल साक्षर न बनाए बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर और व्यावहारिक रूप से सक्षम करे। देहरादून गाँधी पार्क में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में श्रीमती मीना तिवारी, ड़ॉ.सुनील कुमार, क्रिश तिवारी, सुश्री साधना एडवोकेट, राजेंद्र प्रसाद एडवोकेट, संदीप राजभर आदि मौजूद रहे।
