@ नई दिल्ली :-
भारतीय वायु सेना की 94 एयरफोर्स डे की प्रेस कांफ्रेंस एयर फोर्स ऑडिटोरियम सुब्रतो पार्क नई दिल्ली में आयोजित हुई । जिसमे वायुसेना प्रमुख (चीफ ऑफ एयर स्टाफ) एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को इसकी रूपरेखा, उद्देश्यों और प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी।

भारतीय वायुसेना 8 अक्टूबर को अपना 94वां वायुसेना दिवस मनाएगी। इस वर्ष मुख्य समारोह एयर फोर्स स्टेशन कानपुर में आयोजित किया जाएगा, जहां वायुसेना की युद्धक क्षमता, स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं और समृद्ध विमानन विरासत का प्रदर्शन किया जाएगा। समारोह का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और देश के बढ़ते रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित करना है।
वायुसेना प्रमुख ने प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान पत्रकारों के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया।
आपको बता दें कि वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर 2026 को अपनी सेवा से सेवानिवृत्त भी हो रहे हैं।
वायुसेना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, वायु रक्षा प्रणालियों और मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAS) समेत विभिन्न अत्याधुनिक संसाधनों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही हेरिटेज फ्लाइट के माध्यम से भारतीय वायुसेना के गौरवशाली विमानन इतिहास और उसकी विरासत को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
समारोह में वायुसेना की ‘टीम शक्ति’ विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। यह भारतीय वायुसेना की महिला कर्मियों का ड्रिल दल है, जो अनुशासन, सटीकता और समर्पण का प्रदर्शन करेगा। इसके अलावा 33 सदस्यीय भारतीय वायुसेना ड्रम टीम भी समारोह में अपनी प्रस्तुति देगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से आयोजन में सैन्य अनुशासन और औपचारिक गरिमा देखने को मिलेगी।
भारतीय वायुसेना प्रमुख ने कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब भारतीय वायुसेना के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायुसेना की अलग से ड्रोन बल गठित करने की कोई योजना नहीं है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में विभिन्न हथियार प्रणालियों को अलग-अलग संचालित करने के बजाय उन्हें एकीकृत करना आवश्यक है, ताकि वांछित परिचालन प्रभाव हासिल किया जा सके। उनके अनुसार, ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई अचानक आया क्रांतिकारी बदलाव नहीं हैं, बल्कि तकनीकी और परिचालन क्षमताओं के क्रमिक विकास का हिस्सा हैं।
वायुसेना प्रमुख ने आत्मनिर्भरता, नई तकनीकों के समावेश और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण को भविष्य की परिचालन जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
वायुसेना दिवस के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय वायुसेना की युद्धक तैयारियों, तकनीकी प्रगति और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को सामने रखा जाएगा। लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य प्रणालियों का प्रदर्शन देश की वायु शक्ति तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करेगा।
94वें वायुसेना दिवस के आयोजन में साहस, प्रतिबद्धता और वायु शक्ति की भावना को प्रमुखता दी जाएगी। कानपुर में होने वाला मुख्य समारोह तथा रांची का एयर डिस्प्ले देश की वायु शक्ति, स्वदेशी क्षमताओं और विमानन विरासत को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा।
