@ गांधीनगर गुजरात :-
संकटग्रस्त महिलाओं को तत्काल सुरक्षा, आश्रय और आवश्यक सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुजरात के 34 जिलों में 36 सखी वन स्टॉप सेंटर कार्यरत हैं। सितंबर 2026 तक के उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक इन केन्द्रों के माध्यम से पूरे राज्य में 53,851 महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है।

उल्लेखनीय है कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं तथा किशोरियों को मुसीबत के समय अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और एक ही स्थान से आवश्यक सेवाएँ मिल सकें; इस उद्देश्य से इन केन्द्रों की व्यवस्था स्थापित की गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सखी वन स्टॉप सेंटर में तत्काल आश्रय, चिकित्सा उपचार, कानूनी सलाह, पुलिस सहायता और काउंसलिंग जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
आश्रय से काउंसलिंग तक की सहायता एक ही छत्र तले
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस व्यवस्था के अंतर्गत हिंसा की शिकार महिलाओं को उनकी आवश्यकतानुसार विभिन्न सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार अब तक 29,351 महिलाओं को तत्काल आश्रय, 7,617 महिलाओं को कानूनी सेवाएँ, 8,527 महिलाओं को चिकित्सा सेवाएँ और 4,706 महिलाओं को पुलिस सहायता प्रदान की गई है। उल्लेखनीय बात यह है कि सखी वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा; संकट की स्थिति में आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
परिवार, कार्यस्थल, समुदाय या सार्वजनिक स्थान पर हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं और किशोरियों के लिए ये केन्द्र आशा की किरण सिद्ध हो रहे हैं।
2016 में शुरू हुई सखी वन स्टॉप सेंटर योजना
हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान से समन्वित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा अगस्त, 2016 में शुरू किए गए सखी वन स्टॉप सेंटर मुश्किल में फँसी महिलाओं के लिए प्रकाशस्तंभ का कार्य कर रहे हैं। गुजरात में भी इस योजना अंतर्गत 36 केन्द्र कार्यरत हैं, जो महिलाओं की सुरक्षा एवं देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
