@ नई दिल्ली :-
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अंतर्गत एक प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संगठन, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) और आईआईटी बीएचयू के नवाचार, इनक्यूबेशन एवं उद्यमिता केंद्र (सीआईआईई) ने वाराणसी स्थित आईआईटी बीएचयू में “स्वास्थ्य एवं सहायक प्रौद्योगिकियों के लिए एआई” विषय पर एक टेक कॉन्क्लेव का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सरकारी प्रतिनिधियों, शिक्षा जगत के विशेषज्ञों, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों और स्टार्टअप्स ने भाग लिया। इसका उद्देश्य व्यावहारिक एवं व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत बनाने, सुगम्यता में सुधार करने तथा समावेशन और नागरिकों के कल्याण को बढ़ावा देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विचार-विमर्श करना था।
उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात आईआईटी बीएचयू के सीआईआईई के संकाय प्रभारी प्रो. मनोज कुमार मेश्राम ने स्वागत संबोधन दिया। इस सत्र में भार सरकार के एमईआईटीवाई के सचिव एस. कृष्णन ने मुख्य संबोधन दिया। इसक पश्चात एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार और आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो.अमित पात्रा ने विशेष संबोधन दिए। उत्तर प्रदेश सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिकी विभाग के उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन तथा बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मल्लिका तिवारी ने भी विशेष संबोधन दिए।
मुख्य संबोधन देते हुए भारत सरकार के एमईआईटीवाई के सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने, नैदानिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने और सेवाओं की उपलब्धता एवं वितरण में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।उन्होंने आईआईटी (बीएचयू), एसटीपीआई, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर सहयोग को प्रोत्साहित किया, ताकि व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य सेवा एवं सहायक प्रौद्योगिकी संबंधी समाधान विकसित किए जा सकें। उन्होंने इंडिया एआई मिशन और एमईआईटीवाई की अन्य पहलों के माध्यम से उपलब्ध सहायता को भी रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने एक टिकाऊ नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए स्टार्टअप्स को निवेशकों, वेंचर कैपिटल नेटवर्क और बाजार के अवसरों से जोड़ने में एसटीपीआई की भूमिका पर जोर दिया।
अरविंद कुमार, महानिदेशक, एसटीपीआई ने पिछले तीन दशकों में भारत के प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में हुए परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। 1991 से भारत के आईटी/आईटीईएस उद्योग के विकास में एसटीपीआई की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए, उन्होंने स्वदेशी नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में इस सफलता को दोहराने के अवसर पर बल दिया। उन्होंने आगे कहा कि स्थापित प्रौद्योगिकी केंद्रों से परे, विशेष रूप से उभरते क्षेत्रों में, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है, जिसके लिए आईआईटी (बीएचयू) जैसे शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है।
इस सम्मेलन में दो पैनल चर्चाएँ भी हुईं — “एआई के माध्यम से नागरिकों का सशक्तिकरण: स्वास्थ्य, समावेशन और कल्याण” और “नवाचार से प्रभाव तक: एआई अनुसंधान को व्यावहारिक स्वास्थ्य सेवा और सहायक समाधानों में बदलना”। इन चर्चाओं में सरकार, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप्स के विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा एआई की संभावनाओं और उसे व्यावहारिक एवं व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों में परिवर्तित करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। एसटीपीआई लखनऊ के अपर निदेशक एवं प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) प्रवीण कुमार द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
प्रथम पैनल चर्चा, “एआई के माध्यम से नागरिकों का सशक्तिकरण: स्वास्थ्य, समावेशन और कल्याण,” में प्रो. मनोज कुमार मेश्राम, समन्वयक, सीआईआईई-आईआईटी बीएचयू; डॉ. संजय कुमार सिंह, प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी बीएचयू; प्रो. अवनीश सिंह परमार, प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, आईआईटी बीएचयू; डॉ. शिरू शर्मा, प्रोफेसर, बायोमेडिकल अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी बीएचयू; डॉ. रुचि चावला, एसोसिएट प्रोफेसर, फार्मास्युटिकल अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग, आईआईटी बीएचयू; शाहबाज अहमद, संस्थापक, आर्किशन एआई प्राइवेट लिमिटेड; और अमित कुमार वर्मा, अतिरिक्त निदेशक, एसटीपीआई ने भाग लिया। चर्चा में अधिक सुलभ एवं समावेशी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने और नागरिकों के कल्याण में सुधार लाने में एआई की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की भागीदारी ने लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले समाधानों की खोज के लिए तकनीकी विशेषज्ञता, स्वास्थ्य संबंधी अनुसंधान और उद्यमशीलता के दृष्टिकोण को एक साथ लाने के महत्व को उजागर किया।
दूसरे पैनल चर्चा सत्र “नवाचार से प्रभाव तक: एआई अनुसंधान को व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य सेवा एवं सहायक समाधानों में रूपांतरित करना” में एमईआईटीवाई के निदेशक राजेश्वर सिंह जेनवार, आईएमएस-बीएचयू के जैव-सांख्यिकी केंद्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. आकाश मिश्रा, बायोनेस्ट बीएचयू के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. दुर्गेश नारायण सिंह, लेमिनएआई की संस्थापक तृप्ति वर्मा तथा लखनऊ स्थित एसजीपीजीआईएमएस में एसटीपीआई मेडटेक सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के सीओओ श्याम कुमार ने भाग लिया। इस सत्र में अनुसंधान एवं नवाचार से लेकर स्वास्थ्य सेवा और सहायक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यावहारिक तथा व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान विकसित करने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया गया। संस्थागत, वैज्ञानिक और स्टार्टअप जगत के विभिन्न दृष्टिकोणों के समावेश ने आशाजनक विचारों को वास्तविक उपयोग में लाने की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
इस सम्मेलन ने सुलभ स्वास्थ्य सेवा, सहायक प्रौद्योगिकियों और समावेशी कल्याण के लिए एआई का उपयोग करने हेतु सरकार, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग के महत्व पर बल दिया। निरंतर सहभागिता, अनुसंधान अनुवाद और उद्यमिता समर्थन के माध्यम से, एसटीपीआई और सीआईआईई, आईआईटी बीएचयू, एक ऐसे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देना चाहते हैं जो सामाजिक आवश्यकताओं के लिए व्यावहारिक, जिम्मेदार और विस्तार योग्य प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करे।

Sweet blog! I found it while browsing on Yahoo News. Do you have
any suggestions on how to get listed in Yahoo News?
I’ve been trying for a while but I never seem to get there!
Thank you xnxx