@ नई दिल्ली :-
केंद्र सरकार ने देश के बैंकिंग क्षेत्र को अधिक मजबूत, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के साथ ही भविष्य की जरूरतों के अनुरूप व्यापक सुधारों की सिफारिश करेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को अधिक सक्षम, वित्तीय रूप से समावेशी, पारदर्शी और मजबूत बनाना है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) सुरेश एन. पटेल इस उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर गिरीश चंद्र मुर्मु, इंडियन बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद्मजा चुंदुरु और आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एन. एस. विश्वनाथन को सदस्य बनाया गया है। वित्तीय सेवा विभाग में संयुक्त सचिव (बैंकिंग) समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। समिति को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने इस वर्ष केंद्रीय बजट में बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा के लिए ऐसी समिति गठित करने की घोषणा की थी। इसी घोषणा को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने समिति के गठन का निर्णय लिया है। समिति भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मौजूदा कार्यप्रणाली, संस्थागत व्यवस्था और नियामकीय प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल बैंकिंग व्यवस्थाओं और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों का विश्लेषण कर यह आकलन करेगी कि उन्हें भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप किस प्रकार लागू किया जा सकता है।
समिति के कार्यक्षेत्र में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा सहकारी बैंक भी शामिल होंगे। इन संस्थानों को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनी और नियामकीय ढांचे की समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करना, कार्यक्षमता बढ़ाना और ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाओं को अधिक सरल एवं सुलभ बनाना है। समिति यह भी देखेगी कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय जरूरतों के अनुसार बैंकिंग संस्थानों को किस प्रकार अधिक सक्षम बनाया जा सकता है।
डिजिटल तकनीक और साइबर सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए समिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल बैंकिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए भी कार्ययोजना तैयार करेगी। डिजिटल नवाचारों के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता, गति और पहुंच बढ़ाने के उपाय सुझाए जाएंगे। वहीं, साइबर हमलों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल वित्तीय जोखिमों से निपटने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
सरकार की इस पहल को वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। समिति की सिफारिशें देश की बैंकिंग व्यवस्था को भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए तैयार करने और वैश्विक वित्तीय प्रणाली में भारत की स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती हैं।
