आज सिद्धपीठ भैरवगढी़ मन्दिर में हुआ मेला का आयोजन

@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-

पौड़ी जिला के विकास खंड द्वारीखाल के नजदीक ऐतिहासिक मंदिर बावन गढो़ में से एक गढ़़ भैरवगढी़ का वार्षिक दो दिवसीय मेला का शुभारंभ हो गया है। प्रथम दिन राजखील गाँव के निवासी ढोल दमाउ के साथ बाबा भैरवनाथ की महिमा को गाते हुये नृत्य करते हुये मंदिर पहुँचते है। और भैरवनाथ जी की विधिवत जात के साथ पूजन करते हैं।

पौराणिक कथा अनुसार महाभारत काल के समाप्त हो जाने के बाद हनुमान जी हिमालय की और आये। हनुमान जी का एक पग लंगूरगढ तथा दूसरा पग भैरवगढ में पडा, भैरवगढ़ में विश्राम के बाद हनुमान जी अन्यत्र चले गये। पहले उन्होने महाबगढ़ में प्रवास किया लेकिन उपयुक्त वातावरण न मिलने के कारण लंगूरगढ और भैरवगढ़ में रहने लगे तभी एक घटना घटी भैरवगढ़ के सरहद पर बखरोडी गाँव पडता है।

यहाँ के गाँव के रामा बखरोडी की एक गाय बहुत दिनो से दूध नहीं दे रही थी। उस व्यक्ति को शक हुआ कि कोई उसकी गाय का दूध निकाल रहा है, तो वह उसे छुपकर देखने लगा कि गाय का दूध कहाँ जाता है तो उसने देखा कि गाय चीड के पौधे के उपर सारा दूध छोड़ रही है तो उसने क्रोध वश उस पेड की काट डाला तो एक तरफ दूध तो दूसरी तरफ खून निकला। उसके बाद भैरवनाथ जी गाँव के ब्राह्मण डोबरियाल के सपने में आये और कहा मुझे उस स्थान पर स्थापित कर देना जिसके बाद भैरवनाथ जी पुजारी तथा पूजा राजखील के डोबरियाल जाति के लोग करते हैं।

द्वितीय दिन यहाँ दिव्य और भव्य मेला का आयोजन होता है जिसमें दूर दूर से श्रद्धालु मेले में आते हैं और भैरौ बाबा के दर्शन करकर मनवांछित फल प्राप्त करते हैं मेले के दिन मंदिर में भक्ति और अध्यात्म का रंग गाढा हो जाता है रैवासियो और प्रवासियों का मिलन इस मेला में होता है जिससे यहाँ का माहौल भक्तिमय हो जाता है।

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