@ नई दिल्ली :-
नीति आयोग ने 27 फरवरी, 2026 को आकांक्षी जिला एवं ब्लॉक कार्यक्रम (एडीपी/एबीपी) के अंतर्गत फ्रंटियर 50 कार्यशाला का आयोजन किया और यह सार्वजनिक नीति में डिजिटल शासन से कुशल एआई-सक्षम शासन की ओर एक रणनीतिक परिवर्तन का प्रतीक है।

कार्यशाला में नीति आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर, नीति फ्रंटियर टेक्नोलॉजी की विशिष्ट फेलो और मुख्य वास्तुकार देबजानी घोष और नीति आयोग के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, आकांक्षी जिला एवं ब्लॉक कार्यक्रम के रोहित कुमार उपस्थित थे।
केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जिला मजिस्ट्रेटों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। विचार-विमर्श में 50 आकांक्षी ब्लॉकों में फ्रंटियर टेक्नोलॉजी को वास्तविक दुनिया के प्रभाव के परीक्षण क्षेत्रों के रूप में कार्यान्वित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यशाला के दौरान एडीपी/एबीपी न्यूज़लेटर ‘आकांक्षी टाइम्स’ का विमोचन किया गया।
उद्घाटन सत्र में इस बात पर बल दिया गया कि भारत का विकास ज़िला दर ज़िला होता है। प्रौद्योगिकी को विकसित भारत के लिए एक रणनीतिक सहायक के रूप में प्रस्तुत किया गया और यह शासन को सेवा डिजिटलीकरण से अनुकूलनीय बुद्धिमत्ता और संस्थागत पुनर्निर्माण की ओर ले जाता है।
वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय तकनीकी लाभ को प्राप्त करने, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति को गति देने और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। प्रमुख सिद्धांतों में वास्तविक शासन समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना, डेटा-आधारित निर्णय लेने को सक्षम बनाना, संस्थागत क्षमता का निर्माण करना, अलगाव को समाप्त करना और नेतृत्व एवं विश्वास में प्रौद्योगिकी को स्थापित करना शामिल था।

अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पर विषयगत सत्र
आठ मंत्रालयों को जिला स्तर पर निर्णय लेने में डिजिटल एकीकरण के अवसरों को प्रदर्शित करने का मंच मिला। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रारूप ने 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘सक्षम’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रमाणित किया है।
‘पोषण’ 2.0 के अंर्तगत, ‘पोषण’ ट्रैकर 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों की लगभग वास्तविक समय में निगरानी करता है, जिससे पोषण वितरण एक मापने योग्य शासन प्रणाली में परिवर्तित हो गया है। जल जीवन मिशन के तहत, पीएम गति शक्ति पर भू-टैग किए गए परिसंपत्तियों और पाइपलाइन मानचित्रण के साथ ग्रामीण नल जल कवरेज का विस्तार हुआ है, जिसमें जिला कलेक्टरों, वीडब्ल्यूएससी के नेतृत्व वाले स्वामित्व और जल गुणवत्ता परीक्षण पर बल दिया गया है। पशु आधार के माध्यम से डिजिटल पशुधन शासन वास्तविक समय में टीकाकरण ट्रैकिंग और रोग निगरानी के लिए एआई-तैयार डेटासेट को सक्षम बनाता है।
डिजिटल कृषि मिशन एग्रीस्टैक और भारत विस्तार के माध्यम से अंतरसंचालनीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का निर्माण कर रहा है, जिसमें किसान रजिस्ट्रियां, भू-संदर्भित मानचित्र और बहुभाषी सलाह शामिल हैं। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में, एआई क्रेडिट स्कोरिंग, धोखाधड़ी का पता लगाने, एएमएल और केवाईसी स्वचालन और वित्तीय समावेशन संकेतकों की निगरानी में सहायता करता है। चर्चाओं में बोरवेल पर निर्भर क्षेत्रों में आवश्यकता आकलन, एपीआई एकीकरण में सुधार, पोशान सत्यापन और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के लिए एआर-आधारित प्रशिक्षण का भी उल्लेख किया गया।
समूह चर्चा और भविष्य का मार्ग
फ्रंटियर टेक्नोलॉजी के प्रदर्शनों में अभिषेक सिंह द्वारा प्रस्तुत भारत के एआई संप्रभु स्टैक अनुप्रयोग, साची चोपड़ा द्वारा प्रदर्शित नीति फ्रंटियर टेक रिपॉजिटरी, एआई-सक्षम मृदा निदान, सिंधुदुर्ग (राज्य के स्वामित्व वाले एसपीवी मॉडल के तहत भारत का पहला पूर्णतः एआई-सक्षम जिला) और टोंक जिले में कक्षा 10 के गणित परिणामों में सुधार लाने वाली ‘पढ़ाईविदएआई’ शामिल थे। फ्रंटियर 50 के तहत, एआई डिजिटल इंटेलिजेंस और दूरसंचार अवसंरचना को समृद्धि केंद्रों को सहायक डिजिटल एक्सेस प्वाइंट के रूप में उपयोग करते हुए एक भौतिक-डिजिटल मॉडल के माध्यम से एकीकृत किया गया है। यह जिलों के लिए अपने जिलों और ब्लॉकों में विषयगत चुनौतियों के समाधान के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेपों को प्रस्तुत करने का भी एक अवसर था।
निष्कर्ष के तौर पर, नीति आयोग ने सूक्ष्म स्थानीयकरण, अंतरसंचालनीय जिला डेटा स्टैक, मापने योग्य परिणामों और जवाबदेह नेतृत्व पर बल दिया।
