आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग (आईवीएफआरटी) स्कीम जारी रखने की मंजूरी

@ नई दिल्ली :-

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1800 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग (IVFRT) योजना को 31 मार्च, 2026 के बाद भी पांच साल की अवधि के लिए 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है।

IVFRT प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारत में आव्रजन, वीजा जारी करने और विदेशियों के पंजीकरण से संबंधित कार्यों को परस्पर जोड़ना और उन्हें सुव्यवस्थित करना है। IVFRT का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित और एकीकृत सेवा वितरण ढांचे के भीतर आव्रजन और वीजा सेवाओं का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है। इसका लक्ष्य वैध यात्रियों को सुविधा प्रदान करना और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

इस परियोजना को 13 मई, 2010 को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा 1011 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ सितंबर 2014 तक की अवधि के लिए अनुमोदित किया गया था। परियोजना के लिए बजट आवंटन 2015 में संशोधित करके 638.90 करोड़ रुपये कर दिया गया था और कार्यान्वयन की समयसीमा को 31 मार्च, 2017 तक और फिर बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के 31 मार्च, 2021 तक बढ़ा दिया गया था। 638.90 के कुल संशोधित परिव्यय करोड़ रुपये की तुलना में 613.28 करोड़ रुपये का व्यय हुआ। इस परियोजना को 01.04.2021 से 31.03.2026 तक पांच साल की अवधि के लिए आगे बढ़ाने को मंत्रिमंडल ने 19.01.2022 को 1365 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी।

इस योजना का उद्देश्य न केवल वर्तमान संरचना को नया रूप देकर और उसमें सुधार करके, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था से समझौता किए बिना उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकीय समाधानों को लागू करने के जरिए विद्यमान IVFRT योजना के दायरे और क्षमता का विस्तार तथा सुदृढ़ीकरण करना है। वैश्विक यात्रा की बढ़ती मांगों को पूरा करने और उभरती राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए IVFRT परियोजना का आधुनिकीकरण आवश्यक है। आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 और इसके बाद के नियमों और आदेशों के लागू होने के बाद, आव्रजन नियंत्रण और विदेशी प्रबंधन, जिसमें अवैध प्रवासन भी शामिल है, के क्षेत्र में उभरती आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए आव्रजन, वीजा और विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग (IVFRT) प्रणाली को सुदृढ़ और आधुनिक बनाना अनिवार्य हो गया है। परियोजना का निरंतर संचालन केवल तकनीकी उन्नयन नहीं है, बल्कि भारत सरकार के विश्व स्तरीय आव्रजन और वीजा जारी करने की प्रणाली के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को बढ़ावा देने के विजन के अनुरूप एक रणनीतिक परिवर्तन है। अगला चरण तीन व्यापक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा: (क) उभरते प्रौद्योगिकीय नवोन्मेषण, (ख) मुख्य अवसंरचना का रूपांतरण और (ग) प्रौद्योगिकी एवं सेवा अनुकूलन।

यह योजना मोबाइल आधारित सेवाओं और सुरक्षित यात्री आवागमन के लिए सेल्फ-सर्विस कियोस्क सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाकर आव्रजन और वीजा व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी। यह आव्रजन चौकियों, एफआरआरओ और डेटा केंद्रों में मुख्य बुनियादी ढांचे को उन्नत और विस्तारित करके देशव्यापी स्तर पर एक गतिशील और विस्तार योग्य प्रणाली का निर्माण करेगी। इसके अतिरिक्त, यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने, मुख्य अनुप्रयोग संरचना को नया रूप देने और बेहतर दक्षता तथा उपयोगकर्ता अनुभव के लिए नेटवर्क और परिनियोजन ढांचे को सुदृढ़ करने के जरिए प्रौद्योगिकी और सेवा वितरण को अनुकूलित करेगी। इससे वैध यात्रियों को सुविधा मिलेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी। यह सेवा निरंतरता बनाए रखने और भविष्य में भारत में अधिक विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अभिनव प्रौद्योगिकीय समाधानों को शामिल करने में मदद करेगी। इससे पर्यटन, चिकित्सा और व्यापार क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। IVFRT के अत्यधिक सकारात्मक प्रभाव हैं, जो अंतरराष्ट्रीय यातायात, व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। इससे आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और रोजगार के अवसरों में योगदान मिलेगा।

इस योजना के अंतर्गत देश भर में 117 आव्रजन चौकियां (जेपी), 15 विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) और 854 विदेशी पंजीकरण अधिकारी (एफआरओ)/पुलिस अधीक्षक (एसपी)/पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) शामिल हैं।

IVFRT प्रणाली ने आव्रजन और वीजा संबंधी सभी कार्यों में सेवा वितरण और परिचालन दक्षता में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इस प्रणाली ने ऑनलाइन अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग और भुगतान सुविधाओं के साथ 100 प्रतिशत संपर्क रहित और व्यक्तिगत संपर्क रहित वीजा प्रक्रिया को सक्षम बनाया है, जिससे वीजा प्रसंस्करण का समय कम हो गया है। इससे पिछले पांच वर्षों में 91.24 प्रतिशत ई-वीजा आवेदनों को 72 घंटों के भीतर मंजूरी मिल गई है। आव्रजन चौकियों पर यात्रियों की औसत निकासी का समय भी बायोमेट्रिक्स सहित पारंपरिक 5-6 मिनट से घटकर 2.5-3 मिनट हो गया है।

13 प्रमुख हवाई अड्डों पर लागू किए गए स्वचालित ई-गेट के माध्यम से फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन-ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम (एफटीआई-टीटीपी) से आव्रजन प्रक्रिया में लगने वाला समय 2.5-3 मिनट से घटकर 30 सेकंड हो गया है। वर्तमान में भारतीय नागरिकों और ओसीआई कार्डधारकों के लिए इसका पंजीकरण निशुल्क है।

IVFRT प्रणाली के कारण व्यापार करने में सुगमता, सुविधा और सुरक्षा की गारंटी से व्यापक आर्थिक लाभ संभव हो पाए हैं। पर्यटन, व्यापार, वाणिज्य, सेवा उद्योग, विशेष रूप से विमानन और आतिथ्य उद्योग को IVFRT प्रणाली से व्यापक लाभ प्राप्त हुआ है।

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