भारत के लोकपाल ने 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया; भ्रष्टाचार मुक्त शासन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

@ नई दिल्ली :-

भारत के लोकपाल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय माणिकराव खानविलकर ने भारत के 80 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर,  सदस्यों न्यायमूर्ति लिंगप्पा नारायण स्वामी, न्यायमूर्ति संजय यादव,  सुशील चंद्र, न्यायमूर्ति ऋतु राज अवस्थी,  पंकज कुमार और अजय तिर्की की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने सभी सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी।

उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के प्रेरणादायक शब्दों को याद करते हुए एक ऐसे राष्ट्र की परिकल्पना पर बल दिया, “जहाँ मन भयमुक्त हो और सिर ऊँचा हो।” नागरिकों से इस आदर्श को पुनः स्थापित करने और इसे अपने विचारों और कार्यों में बनाए रखने का आग्रह किया गया।

उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की स्वतंत्रता बड़ी मेहनत से प्राप्‍त हुई है। यह स्वतंत्रता सेनानियों और अनगिनत देशभक्तों के अदम्य बलिदानों के फलस्वरूप प्राप्त हुई है, जिनका साहस आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराने को महज़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के अतीत और स्वतंत्रता के साथ आने वाली ज़िम्मेदारियों की एक गंभीर स्मृति बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सच्ची स्वतंत्रता का अर्थ भूख, अन्याय, शोषण और असमानता से मुक्ति, और प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर है।

भारत के लोकपाल की भूमिका पर विशेष बल दिया गया, जो स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए प्रतिबद्ध संस्था है। लोकपाल को प्राप्त शिकायतों की बढ़ती संख्या को संस्था में नागरिकों की बढ़ती भागीदारी और विश्वास का संकेत माना गया।

उन्होंने संविधान, विधि के शासन, जवाबदेही, दक्षता, पारदर्शिता और सुलभता के प्रति लोकपाल की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने एक ऐसी संस्था की मांग की जो कुशल, पारदर्शी, सुलभ हो और प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से मजबूत हो। उन्होंने संविधान की सेवा करने, विधि के शासन को बनाए रखने और सार्वजनिक प्राधिकरण के उत्तरदायित्वपूर्ण प्रयोग को सुनिश्चित करने के लोकपाल के मूल उद्देश्य पर जोर दिया। सभी अधिकारियों से आग्रह किया गया कि वे प्रत्येक शिकायत को गंभीरता, निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता के साथ निपटाएं, यह याद रखते हुए कि प्रत्येक मामले के पीछे न्याय की मांग करने वाला एक नागरिक और संस्थागत निर्णयों से प्रभावित होने वाला जीवन है।

उन्होंने सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों के समर्पण और व्यावसायिकता के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए अपना भाषण समाप्त किया और समारोह में भाग लेने के लिए सभी को धन्यवाद दिया। भाषण का समापन देशभक्तिपूर्ण नारे “जय हिंद” के साथ हुआ।

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