भारत रंग महोत्सव 2026 में बहुभाषीय भारतीय नाट्य प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी

@ नई दिल्ली :-

16 फरवरी 2026, दिल्ली: भारत रंग महोत्सव (भारंगम) 2026 के 25वें संस्करण में, जो विश्व का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव है और जिसका आयोजन राष्ट्र्रीय नाट्य विद्यालय (रानावि) द्वारा किया जाता है, आज का दिन अनेक भारतीय भाषाओं और बोलियों—विशेषकर कुछ अल्प-प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं—में प्रस्तुत आकर्षक नाटकों के साथ भारत की समृद्ध कथन परंपराओं का उत्सव बना रहा।

देशभर से आई विविध नाट्य प्रस्तुतियों के साथ-साथ शैक्षणिक और प्रेरणादायी सत्रों ने पूरे दिन को अर्थपूर्ण बनाया। इसी क्रम में आज के सबसे प्रमुख आकर्षणों में से एक था स्ट्रीट प्ले खंड का वैलिडिक्टरी समारोह, जिसका आयोजन रानावि परिसर में किया गया।

भारत रंग महोत्सव 2026 के स्ट्रीट प्ले खंड में दिल्ली–एनसीआर के 36 कॉलेज थिएटर समूहों ने भाग लिया। ये समूह करीब 140 आवेदक थिएटर समूहों में से चुने गए थे, जिन्होंने 1 से 15 फरवरी 2026 के बीच प्रदर्शन किए। छात्र समूहों ने अपने नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से नागरिक जिम्मेदारी, मानसिक स्वास्थ्य, अभिभावकीय दबाव, विषैली मर्दानगी, घरेलू हिंसा, प्रदूषण, कॉर्पोरेट तनाव तथा अनेक समकालीन सामाजिक मुद्दों को संवेदनशीलता से उठाया।

दिन की नाट्य प्रस्तुतियों की शुरुआत ‘सियावर रामचंद्र की जय’ से हुई, जिसे राधिका देशपांडे ने लिखा और निर्देशित किया तथा राधिका क्रिएशंस, पुणे ने मंचित किया। जश्न-ए-बचपन के अंतर्गत मंचित यह हिन्दी प्रस्तुति अपने जीवंत प्रस्तुति शिल्प के साथ दिन की सशक्त शुरुआत बनी।

इसके बाद ‘कदंबरी’, जिसे मेघना रॉय चौधरी ने लिखा और निर्देशित किया तथा पैराडाइम शिफ्ट आर्ट्स, पुणे ने प्रस्तुत किया, ने दर्शकों को भावनात्मक कथा-विन्यास और प्रभावपूर्ण अभिनय के साथ जोड़ते हुए एक संवेदनशील यात्रा पर ले गया।

‘जेठ रंगरेनी सान्सा’ (बैखो पूजा पर आधारित विकसित नाटक), लेखक पबित्रा राभा द्वारा, रानावि सिक्किम केंद्र के छात्रों ने राभा और असमिया भाषाओं में प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने आदिवासी परंपरा की झलक और युवाओं की मौलिक ऊर्जा से दर्शकों को प्रभावित किया।

इसके बाद ‘सुनो ना यार’, लेखक चिराग खंडेलवाल एवं निर्देशक विभा छिब्बर, जिसे फ़न तूश प्लेयर्स, मुंबई ने मंचित किया, ने हिन्दी में अपने सहज हास्य और भावनात्मक स्पर्श से दर्शकों को खूब प्रभावित किया।

महोत्सव में ‘फेमिनिस्ट मेनिफेस्टो’, लेखक–निर्देशक अभिमन्यु विनायकुमार द्वारा, जनभेरी, पलक्कड़ (केरल) द्वारा मलयालम में प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्तुति अपने साहसिक विषय-वस्तु और अभिव्यक्तिपूर्ण मंचन के कारण चर्चाओं का केंद्र बनी।

एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तुति ‘सोन मछरिया’, लेखक विकास कुमार झा तथा निर्देशक संजय चौधरी, मैथिली में मंचित की गई, जिसने भाषायी विविधता में एक और आयाम जोड़ा।

देशभर से आए युवा रंगकर्मियों ने थिएटर एप्रिसिएशन कोर्स में भी भाग लिया, जिसमें इंदु जैन ने ‘फेमिनिज़्म एंड थिएटर – ए हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव’ पर और कृति वी. शर्मा ने ‘एस्थेटिक्स ऑफ कॉस्ट्यूम डिज़ाइन’ पर सत्र लिये, जिससे प्रतिभागियों को नाट्य कला की गहन समझ प्राप्त हुई।

अदिवित्य महोत्सव की प्रस्तुतियाँ पूरे दिन केंद्र में रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफ़र असीम बजाज की मास्टरक्लास से हुई, जिसके बाद एक ऊर्जावान स्ट्रीट प्ले का प्रदर्शन किया गया। दिनभर चर्चाएँ जारी रहीं—जिनमें कास्टिंग पर ‘जोगी मलंग’ टॉक शो और अभिनेता की यात्रा पर ‘राजेश तैलंग’ टॉक शो प्रमुख थे। शाम का समापन एक जीवंत छात्र बैंड प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने रचनात्मकता, सीख और युवा ऊर्जा को एक मंच पर संजो दिया।

भारंगम 2026 अपने 25 दिनों (27 जनवरी से 20 फरवरी 2026) तक चलने वाले कार्यक्रम में 228 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रस्तुतियाँ लेकर आया है। महोत्सव में 9 देशों और भारत के हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के रंग समूह भाग ले रहे हैं।

भारत की विविध रंग-परंपराओं का उत्सव मनाते हुए भारत रंग महोत्सव 2026 में बाल नाट्य समूहों, जनजातीय समुदायों और वंचित वर्गों के कलाकारों की प्रस्तुतियाँ भी शामिल हैं, जो रानावि की समावेशिता और रंगकर्म के सार्वजनिकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं।

रानावि लगातार देश में रंगमंच के प्रसार और लोकतंत्रीकरण के लिए कार्यरत है। हाल ही में उसने ‘रंग–आकाश’ इंटरनेट रेडियो और अपना ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ‘नाट्यम’ शुरू किया है, ताकि अपनी विशिष्ट प्रस्तुतियाँ देशभर के रंगप्रेमियों तक पहुँचाई जा सकें।

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