@ नई दिल्ली :-
भारतीय सेना ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल विश्व नाथ शर्मा (सेवानिवृत्त), पीवीएसएम, एवीएसएम, एडीसी को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका आज नई दिल्ली स्थित बरार स्क्वायर श्मशान घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जनरल शर्मा का नई दिल्ली में 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।

थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के सभी रैंकों की ओर से जनरल विश्व नाथ शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
मिजोरम के राज्यपाल एवं पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) ने भी दिवंगत जनरल को श्रद्धांजलि अर्पित की और अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इस गंभीर अवसर पर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, पूर्व थल सेनाध्यक्ष, वायुसेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख, सेवारत एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक और परिजन उपस्थित रहे। सभी ने एकत्र होकर इस विशिष्ट सैनिक को अंतिम सम्मान अर्पित किया।
जनरल शर्मा का जन्म 4 जून, 1930 को ब्रिटेन के लंदन में हुआ था। वे भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा और भारतीय सेना के पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुरेंद्र नाथ शर्मा के छोटे भाई थे।
जनरल शर्मा 5वें रेगुलर कोर्स के तहत देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) में शामिल हुए और 4 जून 1950 को 16 लाइट कैवेलरी में कमीशन प्राप्त किया। वे 1 सितंबर 1966 को 66 आर्मर्ड रेजिमेंट के गठन के समय इसमें सेकंड-इन-कमांड के रूप में शामिल हुए। जून 1968 में उन्होंने रेजिमेंट के दूसरे कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कमान संभाली और फरवरी 1970 तक इस पद पर रहे।

अपने सैन्य करियर के दौरान जनरल शर्मा ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। इनमें आर्मर्ड डिवीजन के कर्नल जनरल स्टाफ, कोर के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ, आर्मी मुख्यालय में महानिदेशक सैन्य अभियान (डीजीएमओ) और महू स्थित कॉलेज ऑफ कॉम्बैट (अब आर्मी वॉर कॉलेज) के कमांडेंट जैसे प्रमुख दायित्व शामिल थे। उन्होंने 30 अप्रैल 1988 से 30 जून 1990 तक थल सेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले मिजोरम में माउंटेन ब्रिगेड, जयपुर में आर्मर्ड ब्रिगेड, सिक्किम में माउंटेन डिवीजन, मिजोरम में कोर और कोलकाता स्थित ईस्टर्न कमांड की कमान संभाली। अपने गौरवशाली सैन्य करियर के दौरान जनरल शर्मा को कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों एवं पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
जनरल शर्मा ने सेवानिवृत्ति के बाद, अपने पिता और ससुर की समाज-सेवा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए हिमाचल प्रदेश में निःशुल्क तपेदिक (टीबी) क्लिनिक के माध्यम से जरूरतमंद समुदायों की सेवा में चार दशक से अधिक समय समर्पित किया। वे अपनी चिकित्सा टीम के साथ एंबुलेंस से दूर-दराज के गांवों तक पहुंचे और कई बार ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में पैदल जाकर उन लोगों तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं, जिनके लिए चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच आसान नहीं थी। जनसेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना। उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्य भी इसी सेवा-परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जनकल्याण के कार्यों में योगदान दे रहे हैं।
जनरल शर्मा का देश के प्रति असाधारण सेवा, अदम्य साहस और समर्पण से परिपूर्ण जीवन आने वाली पीढ़ियों के सैनिकों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
